‘अस्तित्व बचाने के लिए तीन बच्चे जरूरी’, वृंदावन में बोले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत

मथुरा/उत्तर प्रदेश। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत मथुरा पहुंचे। यहां उन्होंने भारत में घुसपैठ को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए लोगों से संदिग्ध अवैध प्रवासियों की जानकारी अधिकारियों को देने और यह सुनिश्चित करने का मंगलवार को आग्रह किया कि उन्हें देश में रोजगार न मिले। वृंदावन के रुक्मिणी विहार स्थित नव-निर्मित ‘जीवनदीप आश्रम’ का लोकार्पण करने के बाद एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने अमेरिका और चीन जैसे देशों की ‘आक्रामक’ प्रवृत्ति की निंदा की और भारत को अन्य दृष्टिकोणों के प्रति अधिक उदार बताया।
मोहन भागवत ने कहा कि अस्तित्व बचाने के लिए तीन बच्चे जरूरी हैं और घर वापसी करने वालों का स्वागत हो। उन्होंने कहा कि विदेशियों की पहचान के लिए कड़ी जांच होनी चाहिए और लोगों से अपील की कि वे सुनिश्चित करें कि अवैध प्रवासियों को देश में रोजगार न मिलें। हालांकि, भारतीय नागरिकों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि यदि ऐसे उपाय लागू किए जाएं तो पांच से दस वर्षों में स्थिति में सुधार संभव है और घटती जन्म दर स्थिर हो सकती है।
‘डॉक्टर तीन बच्चों की सलाह देते हैं’
संघ प्रमुख ने तीन संतान नीति पर जोर देते हुए कहा कि उच्च जन्म दर आवश्यक है। उन्होंने कहा कि डॉक्टर परिवार के स्वास्थ्य के लिए तीन बच्चों की सलाह देते हैं, क्योंकि बचपन में होने वाले मेलजोल से बच्चों में सामाजिक कौशल और समूह में सामंजस्य स्थापित करने की क्षमता विकसित होती है। उन्होंने जनसंख्या संबंधी अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा कि तीन से कम प्रजनन दर दीर्घकालिक जोखिम पैदा कर सकती है।
‘धर्मांतरण को रोकने का आह्वान’
उन्होंने कहा कि कम जन्म दर वाले कई देशों ने अपनी जनसंख्या वृद्धि दर तीन से ऊपर ले जाने के प्रयास किए हैं। परिवारों को दो बच्चों तक सीमित रहने के बजाय तीन बच्चों का लक्ष्य रखना चाहिए। हालांकि, कोई भी नीति बनाते समय जनहित सर्वोपरि होना चाहिए। भागवत ने जबरन धर्मांतरण को रोकने का आह्वान करते हुए कहा कि सरकार कानून बना सकती है, लेकिन समाज को भी इसे रोकने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
‘अनेक धर्मांतरित लोग मूल रूप से हिंदू’
उन्होंने दावा किया कि अनेक धर्मांतरित लोग मूल रूप से हिंदू रहे हैं और यदि वे वापस आना चाहते हैं तो उनका स्वागत किया जाना चाहिए। संघ प्रमुख ने अमेरिका और चीन जैसे देशों की ‘आक्रामक’ प्रवृत्ति की आलोचना करते हुए कहा कि भारत का दृष्टिकोण दूसरों पर कुछ थोपने का नहीं है। अमेरिका भले ही यह कहे कि हमारा आर्थिक मॉडल सबसे अच्छा है और सबको इसका अनुसरण करना चाहिए। वहीं, चीन यह कह सकता है कि हमने एक ऐसा मॉडल स्थापित किया है, जो सबके लिए सबसे उपयुक्त है।
‘आश्रम जीवन शिक्षा का केंद्र है’
आश्रम व्यवस्था पर बल देते हुए भागवत ने कहा कि आश्रम, भारतीय संस्कृति की विशिष्ट अवधारणा है और यह मूल रूप से जीवन शिक्षा का केंद्र है। यहां अनुशासन के साथ शिक्षा प्राप्त करने वाले लोग लंबे समय तक समाज की प्रभावी सेवा कर सकते हैं और अपने चरित्र का विकास कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि फिनलैंड की प्रशंसित शिक्षा प्रणाली भी कहीं न कहीं गुरुकुल-आश्रम परंपरा से मेल खाती है। यहां वास्तविक ज्ञान प्राप्त होता है, न कि केवल पेट भरने की क्षमता।
‘सनातन परंपरा आज की ‘अशांत दुनिया’ में भी प्रासंगिक है’
मोहन भागवत ने कहा कि भारत के प्राचीन सांस्कृतिक मूल्य और सनातन परंपरा आज की ‘अशांत दुनिया’ में भी प्रासंगिक हैं और आश्रम इन मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे। भागवत की ये टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं, जब असम और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और अवैध प्रवासियों का मुद्दा राजनीतिक विमर्श में प्रमुख बना हुआ है। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और अनेक संत-महात्मा भी उपस्थित थे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button