दिल्ली बजट 2026: औद्योगिक विकास, इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार एवं ग्रीन पहल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम — दिल्ली मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन

दिल्ली ब्यूरो। दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026-27 का बजट राजधानी के समग्र विकास, औद्योगिक सुदृढ़ीकरण एवं पर्यावरण संतुलन को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया एक व्यापक एवं दूरदर्शी दस्तावेज़ है। लगभग ₹1,03,700 करोड़ के इस बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, ग्रीन पहल, परिवहन, जल-सीवर व्यवस्था तथा MSME सेक्टर पर विशेष ध्यान दिया गया है। दिल्ली मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने इस बजट का स्वागत करते हुए इसे उद्योगों के लिए संभावनाओं से परिपूर्ण एवं दिशा प्रदान करने वाला बताया है। एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. अनिल गुप्ता ने कहा कि बजट में औद्योगिक क्षेत्रों के विकास हेतु ₹160 करोड़ का प्रावधान तथा सड़कों, जल एवं सीवर व्यवस्था पर बड़े स्तर पर निवेश उद्योग जगत के लिए अत्यंत राहतकारी कदम है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से उद्योगों को खराब सड़कों, जलभराव, ड्रेनेज एवं बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था, जिनके समाधान की दिशा में यह बजट एक सकारात्मक एवं ठोस पहल है।
डॉ. गुप्ता ने विशेष रूप से PWD एवं MCD के माध्यम से सड़कों के व्यापक विकास, 750 किलोमीटर डस्ट-फ्री रोड योजना तथा जल निकासी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के प्रयासों को “गेम चेंजर” बताते हुए कहा कि इन कदमों से औद्योगिक क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स बेहतर होगा, जिससे उत्पादन लागत में कमी आएगी और उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली जल बोर्ड के लिए ₹9000 करोड़ का प्रावधान तथा सीवर ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाने और ड्रेनेज मास्टर प्लान लागू करने की दिशा में किए गए प्रयास उद्योगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यदि इन योजनाओं का प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाता है, तो औद्योगिक क्षेत्रों में जलभराव एवं सीवर संबंधी समस्याओं में उल्लेखनीय सुधार संभव है। ग्रीन बजट के रूप में प्रस्तुत इस बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. अनिल गुप्ता ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है और उद्योग जगत भी इसके प्रति अपनी जिम्मेदारी को भली-भांति समझता है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष पर्यावरण एवं वन विभाग के लिए लगभग ₹822 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। इसके अतिरिक्त प्रदूषण नियंत्रण एवं आपातकालीन उपायों के लिए लगभग ₹300 करोड़ का विशेष प्रावधान किया गया है।
उन्होंने आगे कहा कि इन प्रावधानों के अंतर्गत एंटी-स्मॉग गन, मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें तथा प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे राजधानी में वायु गुणवत्ता सुधारने में सहायता मिलेगी। डॉ. गुप्ता ने सुझाव दिया कि इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ उद्योगों को भी ग्रीन टेक्नोलॉजी अपनाने हेतु प्रोत्साहन, सब्सिडी एवं तकनीकी सहयोग प्रदान किया जाना चाहिए, ताकि पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन कायम रखा जा सके।
एसोसिएशन के महासचिव विनीत जैन ने बजट में MSME सेक्टर को दिए गए महत्व को सराहनीय बताते हुए कहा कि MSME उद्योग दिल्ली की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा that बैंकिंग प्रणाली को सरल, पारदर्शी एवं उत्तरदायी बनाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि उद्यमियों को समय पर वर्किंग कैपिटल, कैश क्रेडिट एवं अन्य वित्तीय सुविधाएँ उपलब्ध हो सकें।
विनीत जैन ने आगे कहा कि Ease of Doing Business को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना समय की मांग है। उन्होंने सुझाव दिया कि उद्योगों से संबंधित सभी अनुमतियाँ एवं सेवाएँ एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएँ, जिससे उद्यमियों को बार-बार विभिन्न विभागों के चक्कर न लगाने पड़ें और उनका समय एवं संसाधन दोनों बचें।
परिवहन क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार, वर्ष 2029 तक 100% इलेक्ट्रिक बसों के लक्ष्य तथा EV नीति के अंतर्गत दी जा रही सब्सिडी को उन्होंने भविष्य के लिए सकारात्मक एवं दूरदर्शी कदम बताया। इससे न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों एवं कर्मचारियों की आवाजाही भी अधिक सुगम होगी। सुरक्षा के दृष्टिकोण से CCTV कैमरों का विस्तार, डार्क स्पॉट्स का उन्मूलन तथा स्मार्ट लाइटिंग जैसी व्यवस्थाएँ औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होंगी।
स्वास्थ्य एवं शिक्षा क्षेत्र में किए गए प्रावधानों पर प्रतिक्रिया देते हुए एसोसिएशन ने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ एवं कौशल विकास कार्यक्रम उद्योगों के लिए अप्रत्यक्ष रूप से लाभकारी हैं, क्योंकि इससे कुशल एवं प्रशिक्षित कार्यबल उपलब्ध होता है।
अंत में, दिल्ली मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने यह अपेक्षा व्यक्त की कि बजट में घोषित योजनाओं को समयबद्ध, पारदर्शी एवं प्रभावी तरीके से लागू किया जाए। एसोसिएशन का मानना है कि यदि सरकार, प्रशासन एवं उद्योग जगत के बीच निरंतर संवाद एवं समन्वय बना रहता है, तो दिल्ली को एक सशक्त औद्योगिक एवं आर्थिक केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सकता है।




