सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की पत्नी ने सरकार को चेताया, जयपुर की सड़कों पर अब होगी आर-पार की लड़ाई

जयपुर/एजेंसी। श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के दिवंगत अध्यक्ष सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या के दो साल बीत जाने के बाद भी न्याय न मिलने से राजपूत समाज का आक्रोश सातवें आसमान पर है। सोमवार को धौलपुर और बौली (सवाई माधोपुर) में आयोजित बैठकों और प्रेस कॉन्फ्रेंस में समाज ने सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। उनकी पत्नी शीला सुखदेव सिंह गोगामेड़ी ने हुंकार भरते हुए 29 मार्च 2026 को जयपुर में मुख्यमंत्री निवास और विधानसभा के घेराव का आह्वान किया है।
यह खौफनाक वारदात 5 दिसंबर 2023 को जयपुर के श्याम नगर स्थित सुखदेव सिंह गोगामेड़ी के घर पर हुई थी। हत्यारे परिचित बनकर उनके घर में घुसे और करीब 10 मिनट तक चाय पीते हुए बातचीत की। अचानक, शूटरों ने अपनी जेब से पिस्टल निकाली और गोगामेड़ी पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं। हमलावरों ने उनके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर कई राउंड फायर किए, जिससे मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई। इस हत्याकांड की जिम्मेदारी कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े रोहित गोदारा ने ली थी। इस घटना ने न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश को हिलाकर रख दिया था।
शीला गोगामेड़ी का सरकार पर तीखा प्रहार
धौलपुर में पत्रकारों से बात करते हुए शीला गोगामेड़ी ने जांच एजेंसियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा- घटना को दो साल होने को हैं, लेकिन मुख्य साजिशकर्ता आज भी कानून की पहुंच से बाहर हैं। तीन मुख्य आरोपी देश छोड़कर भाग चुके हैं। प्रशासन ने हमें न्याय का भरोसा दिया था, लेकिन अब तक ठोस सजा किसी को नहीं मिली। संगठन महामंत्री योगेंद्र सिंह कटार और सुखदेव सिंह के भाई अभयराज गोगामेड़ी ने कहा कि समाज अपने नेता के बलिदान को भूला नहीं है। धौलपुर, करौली और सवाई माधोपुर के दौरों में मिल रहे अपार जनसमर्थन ने यह साफ कर दिया है कि 29 मार्च का जयपुर महापड़ाव ऐतिहासिक होगा।
29 मार्च को जयपुर की धरती पर होगा आंदोलन
सवाई माधोपुर के बौली कस्बे में हुई बैठक के दौरान वक्ताओं ने कहा कि न्याय के लिए अब सड़कों पर उतरना ही एकमात्र विकल्प बचा है। 29 मार्च को प्रदेशभर से हजारों की संख्या में करणी सैनिक जयपुर पहुंचेंगे। समाज की मातृशक्ति ने भी इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का संकल्प लिया है। करणी सेना के जिला अध्यक्षों और तहसील पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे गांव-गांव जाकर समाज को लामबंद करें।

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