भाई दूज पर यमुना स्नान करने से नहीं होगी अकाल मृत्यु, यमराज ने अपनी बहन को दिया था वरदान

धर्म डेस्क। यमुना में भाई दूज पर यम द्वितीया का स्नान होगा। बहनें यम की फांस से मुक्ति दिलाने के लिए भाई के साथ स्नान करके दीर्घायु की कामना करती हैंं। इसके लिए यमुना के घाटों की सफाई समुचित ढंग से नहीं हो सकी है। हिन्दू धर्म में दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव का समापन भाई दूज के साथ होता है। यह पर्व भाई और बहन के पवित्र और अटूट प्रेम का प्रतीक है। इसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है, और इसी नाम के पीछे छिपा है इस दिन यमुना नदी में स्नान करने का महत्व। इस साल भाई दूज का पर्व 23 अक्टूबर, दिन गुरुवार को मनाया जाएगा, तो आइए इससे जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं, जो इस प्रकार हैं – तिलक शुभ मुहूर्त – दोपहर 01 बजकर 13 मिनट से 03 बजकर 28 मिनट तक रहेगा।
यमुना स्नान का महत्व
भाई दूज के दिन यमुना स्नान करने की परंपरा का संबंध सीधे मृत्यु के देवता यमराज और उनकी बहन यमुना देवी से है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार देवी यमुना ने अपने भाई यमराज अपने घर आने के लिए आग्रह किया। यम देव कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को अपनी बहन यमुना के घर गए। यमुना उन्हें देखकर बहुत खुश हुईं। उन्होंने अपने भाई का आदर-सत्कार किया, उन्हें प्रेमपूर्वक भोजन कराया और उनके माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु और कल्याण की कामना की। बहन के प्रेम और सत्कार से प्रसन्न होकर यमराज ने यमुना से वरदान मांगने को कहा। तब यमुना ने वरदान मांगा कि “जो भाई आज के दिन यमुना नदी में स्नान करे और अपनी बहन से तिलक लगवाए, उसे अकाल मृत्यु का भय न हो।” साथ ही उसे यमलोक की यातना न सहनी पड़ेगी। यमराज ने यह वरदान तुरंत स्वीकार किया और बोलें की कि इस दिन भाई-बहन जो भी यमुना में स्नान करेंगे, उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होगी।
यमुना स्नान के लाभ
- भाई दूज के दिन यमुना नदी में करने वाले भाई को यमराज के भय से मुक्ति मिलती है और उसकी आयु लंबी होती है।
- यमुना स्नान भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करता है और उन्हें मोक्ष की ओर ले जाता है।
- इस दिन यमुना स्नान करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।





