म्यांमार आर्मी ने 4 साल बाद हटाई इमरजेंसी, छह महीने में होंगे चुनाव
Myanmar Army lifts emergency after 4 years, elections to be held in six months

नेपीडा। म्यांमार की सेना ने आंग सान सू की सरकार के तख्तापलट के चार साल बाद आपातकाल खत्म दिया है। जुंटा शासन ने छह महीने में चुनाव कराने के लिए आयोग का गठन किया है। फरवरी 2021 में तत्कालीन कार्यवाहक राष्ट्रपति यू म्यिंट स्वी ने एक वर्षीय आपातकाल की घोषणा करते हुए सैन्य प्रमुख को सत्ता सौंप दी थी। इसके बाद राज्य प्रशासन परिषद का गठन किया गया और आपातकाल बार-बार छह महीने के लिए बढ़ाया गया। आपातकाल को 31 जुलाई 2025 के बाद आगे नहीं बढ़ाने का फैसला लिया गया है।
म्यांमार में चुनाव कराने के लिए जुंटा शासन के हेड जनरल मिन आंग ह्लाइंग के नेतृत्व में 11 सदस्यीय आयोग का गठन किया है। जुंटा ने फिलहाल चुनाव की तारीख की घोषणा नहीं की है। अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में मिन आंग ह्लाइंग प्रभावी रूप से देश के प्रभारी बने रहेंगे। म्यांमार में 2021 के तख्तापलट के बाद पहला राष्ट्रीय चुनाव होगा। इस तख्तापलट ने म्यामांर को गृहयुद्ध और अराजकता में धकेल दिया।
जुंटा शासन के आलोचकों और विपक्षी समूहों ने चुनावों को दिखावा करार देते हुए इसके बहिष्कार की घोषणा की है। विश्लेषकों का कहना है कि चुनावों के बाद भी ह्लाइंग राष्ट्राध्यक्ष या सशस्त्र बलों के प्रमुख के रूप में सत्ता के सर्वेसर्वा बने रहेंगे। चुनाव का ऐलान ऐसे समय किया गया है, जब विद्रोही समूहों ने जुंटा से देश का बड़ा हिस्सा छीन लिया है। जुंटा का इस समय देश के केवल पांचवें हिस्से पर नियंत्रण बचा है।
चुनावों की घोषणा और आयोग के गठन से ठीक पहले सेना ने एक कानून पारित किया है। इस कानून के तहत इस साल के अंत में होने वाले चुनावों का विरोध करने या उन्हें बाधित करने वाले किसी भी व्यक्ति को मृत्युदंड तक की सजा दी जा सकती है। चुनावी प्रक्रिया के किसी भी हिस्से को बाधित करने के लिए लोगों को संगठित करने, उकसाने या विरोध करने पर तीन से दस साल की कैद की सजा हो सकती है।




