अमेरिका के एफ-35 जेट की केरल में खुली पोल, एक महीने में चालू नहीं कर पाए इंजीनियर, भारत को बेचना चाहते हैं ट्रंप
America's F-35 jet exposed in Kerala, engineers could not make it operational in a month, Trump wants to sell it to India

लंदन/एजेंसी। केरल के तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग करने वाला ब्रिटेन का एफ-35 लड़ाकू विमान लगभग एक महीने से वहीं खड़ा हुआ है। अमेरिका में निर्मित सबसे आधुनिक माने जाने वाले पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को तकनीकी खराबी के चलते यहां लैंडिंग करनी पड़ी थी। यह पहली बार है जब अमेरिका निर्मित लड़ाकू विमान तकनीकी खराबी के कारण किसी विदेशी देश में फंसा हुआ है। हालांकि, समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, अगले सप्ताह तक इसे मरम्मत करके वापस ब्रिटेन भेज दिया जाएगा।
एक भारतीय अधिकारी के हवाले से एजेंसी ने बताय कि ब्रिटेन के 24 इंजीनियरों की एक टीम लड़ाकू विमान में आई हाइड्रोलिक खराबी को ठीक करने के लिए काम कर रही है। इसी खराबी के चलते इसे आपात लैडिंग करनी पड़ी थी। खास बात ये है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस लड़ाकू विमान को भारत को बेचना चाहते हैं। लड़ाकू विमान को समस्या का ऐसे समय में सामना करना पड़ा है, जब ब्रिटिश राष्ट्रीय लेखा परीक्षा कार्यालय (एनएओ) की रिपोर्ट मेंएफ-35 कार्यक्रम को लेकर कई समस्याओं का जिक्र किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, एफ-35 स्टील्थ स्ट्राइक फाइटर ब्रिटेन का सबसे एडवांस लड़ाकू विमान कार्यक्रम है, लेकिन इस बेड़े को ऑपरेशन और वित्तीय दृष्टि से भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। एनएओ के अनुसार, लड़ाकू विमानों की खरीद पर अब तक खर्च किए गए 11 अरब पाउंड का निराशाजनक रिटर्न रहा है। अब बेड़े के विस्तार की अनुमानित योजना पर रक्षा मंत्रालय को शुरुआती लागत से तीन गुना से ज्यादा खर्च करना पड़ेगा।
इसमें आगे कह गया कि कम उपलब्धता, इंजीनियरिंग की कमियों और हथियारों के इंटीग्रेशन में देरी के कारण परियोजना में बाधा आ रही है। एनएओ के बयान में कहा गया है कि देरी, बुनियादी ढांचे की कमी और कर्मियों की कमी के कारण क्षमता लाभ पूरी तरह से प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं। ब्रिटेन ने अमेरिका से 138 एफ-35 विमान खरीदे हैं, लेकिन उसे अब तक केवल 38 ही प्राप्त हुए हैं। इसका अर्थ है कि पूर्ण परिचालन क्षमता 2025 के अंत तक खिसक गई , जो तय समय से दो साल पीछे है।




