भारत ने बनाई पहली स्वदेशी एमआरआई मशीन

एआई से है लैस, दिल्ली एम्स में शुरू होगा ट्रायल

नई दिल्ली/एजेंसी। चिकित्सा में आत्मनिर्भरता के लिए भारत ने पहली स्वदेशी चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग (एमआरआई) मशीन बनाने में कामयाबी हासिल की। अभी तक भारतीय अस्पतालों में जापान, कोरिया, अमेरिका और चीन में निर्मित एमआरआई मशीनों के जरिए मरीजों की जांच होती है लेकिन फिशर मेडिकल वेंचर्स लि. (एफएमवीएल) कंपनी ने भारत को पहली स्वदेशी मशीन सौंपी है।
हाल ही में कंपनी ने क्लीनिकल ट्रायल के लिए एक मशीन को चेन्नई स्थित कैंसर अस्पताल में स्थापित किया है। वहीं दूसरी मशीन को इसी साल अक्तूबर तक दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को सौंपी जाएगी। यहां करीब छह महीने तक मरीजों की इस मशीन से जांच होने के बाद उसके परिणाम का विश्लेषण किया जाएगा। इस परीक्षण के पूरा होने पर यह मशीन देश के अन्य अस्पतालों में स्थापित की जा सकती है।
मंगलवार को दिल्ली एम्स ने स्वदेशी मशीन के क्लीनिकल ट्रायल में शामिल होने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ एक एमओयू साइन किया है। इस दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के समीर कार्यक्रम के महानिदेशक डॉ. पीएच राव ने भारत ने पहली एमआरआई मशीन को तैयार किया है। वैज्ञानिक तौर पर इसके प्रभावों का आकलन करने के लिए क्लीनिकल परीक्षण की आवश्यकता है जिसके लिए दिल्ली एम्स सहित देश के कुछ अस्पतालों का चयन किया है।
एआई लैस है भारत की मशीन, रिपोर्ट तैयार करने में करेगी सहयोग
विशेषज्ञों ने बताया कि भारत की स्वदेशी मशीन कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से लैस है जो जांच के दौरान ली गई तस्वीरों की समीक्षा करने में सहयोग करेगी। भारतीय वैज्ञानिकों ने इसे लेकर एल्गोरिदम तैयार कर इसे पूरी तरह से अत्याधुनिक तकनीक पर बनाया है। इसका लाभ यह होगा कि मरीज को मिलने वाली जांच रिपोर्ट में तस्वीरों के आधार पर एक पूर्वानुमान भी होगा जिसके जरिए कोई भी डॉक्टर आगामी चिकित्सा को लेकर फैसला ले सकेंगे।
दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ. श्रीनिवास ने बताया कि सभी वैज्ञानिक मापदंडों पर परीक्षण के बाद इस मशीन को एक उत्पाद के तौर पर भारत में लॉन्च किया जाएगा। इसका मरीजों को लाभ यह होगा कि एमआरआई जांच की कीमत में कम से कम 30 से 40 फीसदी की कमी आएगी क्योंकि भारत के अस्पतालों और जांच केंद्रों को यह कम लागत पर उपलब्ध हो सकेगी।

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