नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की… मथुरा की गलियों में सुबह से ही श्रीकृष्ण धाम में भक्तों का सैलाब

Nand Ghar Anand Bhayo, Jai Kanhaiya Lal Ki... In the streets of Mathura, there is a flood of devotees in Shri Krishna Dham since morning

मथुरा/उत्तर प्रदेश। मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण के 5251वें जन्मोत्सव के माहौल भक्तिमय है। कान्हा के जन्मोत्सव को लेकर मथुरा में चारों तरफ उल्लास छाया हुआ है। जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान जहां रंग-बिरंगी लाइटों से जगमग है, वहीं शहर के चौराहों पर की गई साज-सजावट भी अपनी आभा बिखेरे हुए है। कान्हा के दर्शनों के लिए देशभर से आए श्रद्धालुओं ने भी यहां डेरा डाला है। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर आज जन्माष्टमी बहुत धूम-धाम से मनाई जा रही है। इस बार के जन्मोत्सव को महामहोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान रोशनी से नहाया हुआ है। जन्मभूमि की ओर जाने वाले रास्तों और चौराहों पर भी आकर्षक सजावट कराई गई है। ये मनमोहक सजावट कान्हा के जन्मोत्सव के माहौल को और भी खास बना रही है।
जन्मस्थान से निकाली गई भव्य शोभायात्रा
रविवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से एक दिन पहले कार्यक्रमों की शुरुआत भव्य शोभायात्रा से हुई। तीर्थ विकास परिषद, पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा निकाली गई शोभायात्रा जन्मभूमि से शुरू हुई, जिसमें सबसे आगे मान मंदिर बरसाना की सखियां रास नृत्य करते हुए निकलीं। वहीं इस्कॉन भक्तों की मंडली कीर्तन करते हुए निकली। शोभायात्रा में ब्रज के कलाकारों के लोकनृत्य भी आकर्षण का केंद्र रहे। देश-दुनिया से कान्हा के जन्मोत्सव पर मथुरा आए श्रद्धालुओं को लोकसंस्कृति के अलग-अलग रंग भी देखने को मिलेंगे। इसके लिए 5 बड़े और 19 छोटे मंच तैयार किए गए हैं। इसके साथ ही ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने जन्मस्थान की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर करीब 20 मंच तैयार कराए हैं, जहां लोक कलाकारों द्वारा अपनी संस्कृति की झलक दिखाई जाएगी।
सोम-चंद्रिका पोषाक धारण करेंगे कान्हा
इस बार जन्माष्टमी पर ठाकुरजी पीले रंग की सोम-चंद्रिका पोषाक धारण करेंगे। कान्हा के जन्मोत्सव के लिए यह खास पोशाक कोलकाता और गुजरात के कुशल कारीगरों द्वारा तैयार की गई है। पोशाक बनाने में पांच से अधिक कारीगरों को चार माह का समय लग गया। रेशम के कपड़े पर वनस्पतियां, बेल-बूटे उकेरे गए हैं। श्रीकृष्ण जन्मस्थान संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि भगवान श्रीराधाकृष्ण सोम-चंद्रिका पोषाक धारण करके भक्तों को दर्शन देंगे। नवरत्नों से सजा सोने का हार भी श्रीठाकुरजी को पहनाया जाएगा। जन्मोत्सव पर ठाकुरजी दिव्य मुकुट धारण करेंगे। भगवती योगमाया सोने का मुकुट धारण कर भक्तों को दर्शन देंगी।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को द्वापरकाल के कंस के कारागार की अनुभूति कराने के लिए गर्भगृह को कंस के कारागार के रूप में सजाया गया है। आज की सुबह शहनाई और नगाड़ों के साथ शुरू होगी। भगवान की मंगला आरती के साथ जन्मोत्सव का कार्यक्रम शुरू होगा। इसके बाद 8 बजे भगवान का पंचामृत अभिषेक होगा। इस बीच स्त्रोतों का पाठ और पुष्पार्चन होगा। सुबह 9 बजे भागवत भवन में भगवान राधाकृष्ण का कमल-पुष्प और तुलसीदल से पुष्पार्चन, मंगलार्चन वेदमंत्रों के बीच किया जाएगा।
जन्म महाभिषेक का मुख्य कार्यक्रम रात 11 बजे श्रीगणेश-नवग्रह पूजन से शुरू होगा। 1008 कमल के फूलों से ठाकुरजी का सहस्त्रार्चन होगा। रात्रि 12 बजे भगवान के प्राकट्य के साथ मंदिर परिसर में ढोल-नगाड़े, झांझ-मंजीरे, मृदंग की ध्वनि पर भक्तजन झूम उठेंगे। भगवान के जन्म की महाआरती रात 12 बजकर 10 मिनट तक होगी।
केसर एवं सुगंधित द्रव्यों से लिपटे हुए भगवान श्रीकृष्ण के चल विग्रह मोर्छलासन में विराजमान होकर अभिषेक स्थल ले जाया जाएगा। यहां स्वर्ण मढित चांदी की गऊ से रात्रि 12.10 बजे से 12. 25 बजे तक भगवान के श्रीविग्रह का प्रथम अभिषेक करेंगी। इसके बाद श्रीठाकुरजी को अभिषेक स्थल पर रजत कमल में विराजमान कर जन्म महाभिषेक रात 11.25 बजे से 12. 40 बजे होगा।
यह महाभिषेक श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास महाराज के सानिध्य में जन्माभिषेक पंचामृत दूध, दही, घी, बूरा, शहद, औषधियों, इत्रों से किया जाएगा। इसके बाद ठाकुरजी की श्रृंगार आरती रात 12.45 बजे से 12.50 बजे तक होगी। श्रीकृष्ण जन्मस्थान में श्रद्धालुओं का प्रवेश रात 1.30 बजे तक होगा।

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