बिहार में एक मजदूर का बेटा कठिन परिस्थितियों में संघर्ष करते हुए बना दारोगा

मुजफ्फरपुर/बिहार। मुजफ्फरपुर में एक युवक ने गरीबी और संघर्ष में रहते हुए अभाव में अवसर को तलाश लिया है। मजदूर पिता का बेटा दारोगा बना है। उसके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया है। युवक का नाम अभिषेक कुमार है। उसके पिता रामेश्वर राम मजदूर हैं। किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते हैं। अभिषेक का पूरा परिवार झोपड़ी में रहता है। उनके बेटे का अंतिम रूप से चयन दारोगा में हुआ है। अभिषेक के माता-पिता और आस-पड़ोस के लोग काफी खुश हैं। उन्हें लग रहा है कि गरीब का बेटा भी मेहनत करे, तो सफलता पा सकता है।
दारोगा में चयनित हुए अभिषेक की राह इतनी आसान नहीं थी। उसके संघर्ष की कहानी हाल ही में रिलीज हुई विक्रांत मेसी की फ़िल्म 12th Fail से बिल्कुल मिलती-जुलती है। जिसमे 12वीं फेल होने के बाद भी हीरो हार नहीं मानता है। कठिन मेहनत से आईपीएस बन जाता है। अभिषेक के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। साल 2018 में इंटर की परीक्षा में क्रॉस लग गया था, जिसके बाद उसने कंपार्टमेंटल परीक्षा दी। इंटर कम्पार्टमेंटल से पास करने के बाद आगे की पढ़ाई की, और गांव में ही सीनियर के संपर्क में रहकर दारोगा की तैयारी शुरू कर दी। उसके बाद उसने काफी परिश्रम किया और सफलता हासिल की।
अभिषेक के पिता रामेश्वर राम बताते हैं कि इनका जीवन बेहद संघर्षपूर्ण रहा। मजदूरी करके और पेट्रोल पम्प पर नोजल मैन का काम करके बेटे को पढ़ाया। आज बेटा दारोगा बन गया है, जिससे पूरे परिवार और समाज में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गरीबी में भी अवसर को मेहनत के बल पर हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। ये अफवाह उड़ाई जाती है कि सरकारी नौकरी में घूसखोरी चलती है। आज भी ईमानदारी है। गरीब के बेटे का चयन बिहार पुलिस में हुआ है। अभिषेक के दारोगा बनने से गांव के अन्य युवाओं को काफी प्रेरणा मिली है। गांव के युवा जमकर पढ़ाई कर रहे हैं। युवाओं का कहना है कि वे अपनी तैयारी अच्छी तरह से करेंगे ताकि सफलता मिले।

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