गाजियाबाद में जिस किडनैपिंग केस के चक्कर में सस्पेंड हो गए दो एसआई, वह निकला फर्जी

गाजियाबाद। गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में 2 साल पहले दर्ज हुए किडनैपिंग का केस फर्जी निकला। बिल्डर को सबक सिखाने और बैंक का लोन होने के बाद राजेश नाम के व्यक्ति ने पत्नी के साथ मिलकर यह प्लानिंग की थी। इसी के बाद वह घर से चला गया था। दो साल इधर-उधर नाम बदलकर रहा। नौकरी भी की, लेकिन बैंक ट्रांजैक्शन करने पर पुलिस के हाथ लग गया। पुलिस इसकी तलाश में लगी थी। सही से कार्रवाई न होने की वजह से पुलिस के दो एसआई को सस्पेंड भी कर दिया गया था। डीसीपी ट्रांस हिंडन निमिष पाटील ने बताया कि जांच के बाद राजेश और केस दर्ज करवाने वाली उसकी पत्नी पुष्पा देवी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
जानकारी के अनुसार, राजेश ने अपनी पुश्तैनी ज़मीन बेची थी। इसके बाद तीन फ्लैटों में 55 लाख रुपये निवेश किए। इस दौरान बिल्डर ने रजिस्ट्री करवाने के लिए कैश पेमेंट न लेकर लोन करवाने के लिए कहा तो उन्होंने 31 लाख का लोन लेकर बिल्डर को दे दिया। बिल्डर के पास करीब 85 लाख रुपये चले गए थे। बिल्डर ने उसके रुपये वापस नहीं किए। इस पर वह लोन की ईएमआई नहीं दे रहा था। इसके बाद बैंक ने दोनों फ्लैटों को सील कर दिया। इसके बाद राजेश ने बदला लेने के लिए किडनैपिंग की प्लानिंग की। वह पत्नी को बताकर 24 फरवरी को घर से चला गया और पत्नी ने बिल्डर हिमांशु चौधरी, विजेंद्र चौधरी, रविंद्र चौधरी, रेखा चौधरी और रविशंकर पांडेय पर केस दर्ज करवा दिया। करीब 1 साल पहले पत्नी ने बिल्डर पर धोखाधड़ी का केस भी दर्ज करवाया।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी गाजियाबाद से जाने के बाद सोनीपत और पानीपत में रह रहा था। इस बीच उसने पहचान बदलकर कई जगहों पर नौकरी भी की। किडनैपिंग के ड्रामे में वह पत्नी के संपर्क में था और केस की हर अपडेट ले रहा था। दूसरी तरफ इस मामले में पुलिस पर उसे बरामद करने का प्रेशर था। पुलिस के अनुसार आरोपी ने हाल ही में एक सिम लिया था। इसके अलावा, एक बार बैंक में जाकर पानीपत में ही रुपये निकाले थे। इन जानकारी पर पुलिस आरोपी तक पहुंची। पुलिस को देखकर राजेश ने खुद को पीड़ित ही बताकर गुमराह करने की कोशिश की। हालांकि, बाद में पूछताछ में उसने पूरी कहानी बता दी।

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