प्रेमिका ने गूगल पर तलाशा सुनसान इलाका, घरवालों के साथ प्रेमी को कार सहित जिंदा जला दिया

मथुरा/उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के मथुरा में ट्रांसपोर्टर पुष्पेंद्र यादव की कार सहित जलाकर हत्या कर दी गई। मामले में नामजद हिस्ट्रीशीटर अवधेश यादव व उसके भाई राजेश का बुधवार को भी सुराग नहीं लगा। दोनों की तलाश में पुलिस की कई टीमें आगरा से लेकर फिरोजाबाद तक के संभावित स्थानों पर दबिश दे रही हैं। घटना फरह थाना क्षेत्र के नगला चंद्रभान के लिंक रोड की है।
पुष्पेंद्र यादव (35) पुत्र इंद्रपाल सिंह यादव मूलरूप से नगला लल्लू, जलेसर, एटा के रहने वाले थे। हाल में वह आवास विकास कॉलोनी, कासगंज में रहते थे। पुष्पेंद्र की हत्या को लेकर पुलिस के हाथ कई अहम सुराग हिस्ट्रीशीटर की बेटी डॉली के मोबाइल से मिले हैं। वारदात को अंजाम देने से पहले डॉली ने गूगल पर मथुरा के कई इलाके तलाशे थे। इसका खुलासा उसकी गूगल सर्च हिस्ट्री ने किया है। यह भी पता लगा है कि उसने पुष्पेंद्र को फोन कर बुलाया था। यह फोन भी उसे पुष्पेंद्र द्वारा ही दिया गया था।
पुलिस हिरासत में ली गई हिस्ट्रीशीटर की पत्नी पूनम व बेटी डॉली ने बताया है कि पुष्पेंद्र की हत्या के बाद ही अवधेश को अंदेशा हो गया था कि पुलिस उसे पकड़ लेगी। इसलिए वह तीनों बेटों को लेकर फिरोजाबाद भाग गया। कहा था कि बच्चों को ननिहाल छोड़ देगा। पुलिस फिरोजाबाद पहुंची, लेकिन वहां न तो उसके रिश्तेदार मिले और न ही बच्चे। पुलिस ने बुधवार को मैनपुरी तक दबिश दी, लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लगा।
पुष्पेंद्र की हत्या में हिस्ट्रीशीटर अवधेश यादव निवासी ककरेठा थाना सिकंदरा, आगरा की पत्नी पूनम व बेटी डॉली मंगलवार से पुलिस की हिरासत में हैं। पुलिस कई राउंड में इनसे पूछताछ कर चुकी है, लेकिन इनकी चुप्पी नहीं टूट रही है। डॉली पुलिस को बरगलाने में लगी है। वह बार-बार पुष्पेंद्र कैसा है, यह सवाल कर रही है। वहीं, पूनम का कहना है कि उसे इस प्रकरण के बारे में कुछ भी नहीं पता। जबकि पुलिस को मिले इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य इनके खिलाफ खुलकर गवाही दे रहे हैं।
पुष्पेंद्र की हत्या में नामजद हिस्ट्रीशीटर अवधेश यादव कुख्यात भूरा यादव गिरोह से जुड़ा हुआ था। इस गिरोह के तार मथुरा और आगरा में ऐसे फैले थे कि गैंग द्वारा अपहरण किए जाने के डर से दोनों जिलों के डॉक्टर व कारोबारियों ने सुबह की सैर पर निकलना छोड़ दिया था।
ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या पुष्पेंद्र की हत्या में भी पुराने पेशेवरों ने अवधेश यादव से दोस्ती निभाई है। उसकी हत्या के लिए मथुरा को ही क्यों चुना गया। खास बात यह भी है कि इस गैंग का सरगना भूरा यादव मूलरूप से फरह के पौरी गांव का ही रहने वाला था। उसके कई गुर्गे ऐसे हैं, जो पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं।
भूरा यादव को जून 2012 में आगरा के आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर पांच में गोलियों से भून दिया गया था। डेढ़ दशक पहले भूरा यादव के डर से डॉक्टर और कारोबारियों ने सुबह की सैर पर निकलना छोड़ दिया था। वह अपहरण के बाद मोटी फिरौती वसूलता था। उसने सबसे पहले खंदारी के दंत चिकित्सक के पिता का अपहरण किया था। चार दिन बाद 40 लाख रुपये की फिरौती वसूल की थी।

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