50 रुपये में एक घूंट गधी का दूध, हर मंगलवार मुंबई के धारावी में घर-घर हो रही बिक्री

मुंबई/एजेंसी। दूध बच्चों के आहार का एक प्रमुख हिस्सा है क्योंकि यह प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर होता है। दूध के श्रोत के लिए लोग गाय, भैंस और बकरियों पर आश्रित होते हैं। शहरों में दूध का मुख्य स्रोत भी यही हैं। इन दिनों मुंबई के कई इलाकों में गधी का दूध पॉप्युलर हो रहा है। एक शख्स अपने जेनी (गधी) को लेकर हर मंगलवार धारावी पहुंचता है। यहां वह घर-घर पहुंचता है। माताएं अपने बच्चों को लेकर बाहर निकलती हैं। शख्स एक चम्मच गधी का दूध बच्चों के मुंह में डलाता है और माताएं उसे 50 रुपये देती हैं। मतलब वह 50 रुपये में एक चम्मच गधी का दूध बेच रहा है। गधे का दूध एक अनसुनी अवधारणा नहीं है, विशेष रूप से दक्षिण भारत में। साउथ इंडिया में लंबे समय से गधी का दूध बच्चों को बेहतर पोषण और विकास के स्रोत के रूप में दिया जाता रहा है।
धारावी में दूध विक्रेता ने कहा कि गधे का दूध बुखार, थकान, आंखों पर दबाव, कमजोर दांत, अल्सर, अस्थमा और कुछ स्त्री रोग संबंधी समस्याओं के इलाज में मदद कर सकता है। ग्रामीण यूरोप और अमेरिका में, यह एक सामान्य है।
गधे का दूध महंगा होता है क्योंकि इसकी शेल्फ-लाइफ कम होती है। शहर के डॉक्टरों ने कहा कि उन्हें यकीन नहीं है कि गधे का दूध सभी बच्चों के लिए सही नुस्खा है या नहीं। नगरपालिका के एक अस्पताल के एक डॉक्टर ने कहा कि गधे से प्राप्त दूध पोषण और स्वाद के मामले में मां के दूध का विकल्प हो सकता है, लेकिन यह सभी बच्चों को नहीं दिया जा सकता है।
गधे के दूध में प्रोटीन कम और वसा अधिक होती है, और एक बाल रोग विशेषज्ञ ने कहा कि यह गाय के दूध में कुछ प्रोटीन से एलर्जी वाले बच्चों के लिए एक अच्छा विकल्प था। डॉक्टरों ने कहा कि छोटे बच्चों को कच्चा दूध देना और रोगजनकों की उपस्थिति एक प्रमुख चिंता का विषय है।
कई लोग गधी के दूध को ‘लिक्विड गोल्ड’ भी कहते हैं। कई महिलाएं इस दूध को अपनी स्किन के लिए लेती हैं ताकि वह चमकदार बनी रहे। कर्नाटक में गधों के दूध के बकायदा फार्म हैं। तमिलनाडु में भी यह फेमस है। दक्षिण भारत में एक लीटर गधी के दूध की कीमत 6000 रुपये तक है। अब फार्म्स में गधी के दूध के अलावा डंकी मिल्क पाउडर और डंकी मिल्क घी भी बनाकर बेचा जा रहा है।

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