आगरा में जमानत पर छुडाने आए थे, मगर खुद ही अंदर हो गए, 5-5 सौ रुपये के लालच में बन बैठे थे फर्जी जमानतदार

आगरा/उत्तर प्रदेश। आगरा में जमानत देकर आरोपियों को छुड़ाने आए 6 फर्जी जमानतदार असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर के हत्थे चढ़ गए। एसीपी ने जमानतियों ने पूछ लिया कि तुम आरोपियों को जानते हो। तो वे हक्के बक्के रह गए। इस पर उनकी पड़ताल की तो वे फर्जी जमानतदार निकले। एसीपी ने उन पर धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया है।
दीवानी कचहरी फर्जी जमानतदारों के मामले सुर्खियों में रहने के बाद अब पुलिस कमिश्नरेट की कोर्ट में भी सामने आ रहे हैं। शुक्रवार को एसीपी हरीपर्वत के कोर्ट में शांतिभंग के चालान के 3 आरोपियों की फर्जी जमानत देने के लिए 6 लोग प्रस्तुत हुए। एसीपी हरीपर्वत मयंक तिवारी ने जमानतदारों से पूछ लिया कि आरोपी को जानते हो? क्या नाम है? इनके पिता का क्या नाम है? कैसे जानते हो..? इन सवालों को सुनकर जमानतदार सकपका गए। बाद में पता चला कि शांतिभंग के आरोपियो को छुड़ाने के लिए ये लोग महज 500 रुपये के लालच में तैयार हो गए थे। सख्ती दिखाने पर भागने लगे। एसीपी ने उन्हें गिरफ्तार करवा लिया। पकड़े गए कोमल सिंह, निवासी गांव पूरा गोवर्धन खंदौली, एत्माद्वौला जितेंद्र, रमेश चंद्र, फतेहाबाद के निवासी जय कुमार, मनोज कुमार और अनेक सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया है। एसीपी ने बताया कि वे अक्सर जमानतियों से सवाल पूछते हैं। आरोपियों को उनकी गारंटी पर छोड़ा जाता है।
दीवानी-कलेक्ट्रेट में घूमते हैं फर्जी जमानती
जो लोग आदतन नियम (हैबिचुअल ऑफेंडर) तोड़ते हैं उनके जमानती आसानी नहीं मिलते हैं। इनके लिए फर्जी जमानती तैयार किए जाते हैं। दीवानी सूत्रों ने बताया कि केस के हिसाब से जमानती तैयार किए जाते हैं। 5 हजार से 18 हजार तक में एक फर्जी जमानती तैयार किया जाता है। आधार कार्ड या पहचान पत्र पर फोटो अपलोड कर नाम पते बदल दिए जाते हैं। इसी वजह से इन्हें पकडऩा आसान नहीं होता है। दीवानी और कलेक्ट्रेट में फर्जी जमानती घूमते रहते हैं। इनका पूरा गैंग सक्रिय है।
एसपी सिटी ने चिन्हित किए थे 500 अपराधी
पुलिस कमिश्नरेट से पहले आगरा के एसपी सिटी रहे विकास कुमार ने दीवानी में फर्जी जमानतदारों का गैंग पकड़ा था। उन्होंने थाना न्यू आगरा में आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करवाए। गिरोह पेशेवर अपराधियों को जमानत पर रिहा कराने का काम करता था। इसके एवज में वह अधिवक्ताओं के माध्यम से मोटी रकम वसूलता था। फर्जी दस्तावेज तैयार करके उन्हें कोर्ट में पेश किया जाता था। पुलिस जांच में ऐसे 500 अपराधी चिन्हित हुए थे। जो कि पेशेवर अपराधियों को फर्जी जमानत पर रिहा कराते थे।




