शारदीय नवरात्र की महानवमी को रजादेपुर मठ पर नौ कन्याओं का किया गया पूजन

सगड़ी/आजमगढ़,(उत्तर प्रदेश)।नवरात्र के नौ दिन मां दुर्गा को अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. आज (23 अक्टूबर) को चैत्र नवरात्रि का 9वां यानी अंतिम दिन है। नवरात्रि के दौरान महानवमी का तिथि हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है। नवरात्रि का नौवां दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के लिए समर्पित है। इस दिन देवी दुर्गा के मां सिद्धीदात्री स्वरूप की पूजा करने का विधान है। मां सिद्धिदात्री को सिद्धिदात्री के रूप में जाना जाता है। यह मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री सभी दिव्य इच्छाओं को संतुष्ट करती हैं।
इसी क्रम में सगड़ी तहसील क्षेत्र के गोरखपुर-दोहरीघाट मुख्य मार्ग पर स्थित प्राचीन सिद्ध पीठ रजादेपुर मठ में महानवमी के शुभ अवसर पर नौ कन्याओ का पूजन कर श्रद्धापूर्वक भोजन कराया गया। रजादेपुर मठ के महंत और मठाधीश शिवसागर भारती ने आज रजादेपुर मठ में कन्याओं के पांव पखारकर कन्या पूजन किया। साथ ही अपने हाथों से उन्हें प्रसाद ग्रहण कराया। रजादेपुर मठ की परंपरा के अनुसार, बटुक देव की भी पूजा की गई। इसके तहत देवी स्वरूपा इन कन्याओं के बीच एक बालक भी मौजूद था जिनके पांव मठाधीश शिवसागर भारती ने पखारे और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। साथ ही अपने हाथों से भोजन भी कराया। रजादेपुर मठ में यह परंपरा बरसों से चली आ रही है जिसका निर्वहन आज भी जारी है। मठाधीश शिवसागर भारती ने रजादेपुर मठ की परंपरा का निर्वहन कर अपने ध्येय को और मजबूती दी। रजादेपुर मठ के महंत और मठाधीश शिवसागर भारती ने शारदीय नवरात्र के पहले दिन 15 तारीख को कलश स्थापना के साथ इसकी शुरुआत की थी।अष्टमी के अनुष्ठान के बाद आज महानवमी के दिन रजादेपुर मठ परिसर में मां सिद्धिदात्री की पूजन अर्चना के बाद उन्होंने कन्याओं के पांव पखारे एवं सभी नौ कन्याओं को चुनरी ओढा़कर उपहार एवं दक्षिण प्रदान कर आशीर्वाद लिया।

वही मठ के मठाधीश शिवसागर भारती ने कहा कि महानवमी नवरात्रि का आखिरी दिन होता है। मां सिद्धीदात्री देवी दुर्गा का नावां स्वरूप है। नवरात्रि के दौरान नवमी को मां दूर्गा का नावें स्वरूप मां सिद्धीदात्री की पूजा की जाती है। सिद्धदात्री नाम दो शब्दों से मिलकर बना है, सिद्धि का अर्थ है ध्यान करने की क्षमता और धात्री का अर्थ है देने वाली। इस दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा करने से समस्त सिद्धियों का ज्ञान प्राप्त होता है। इनकी पूजा करने से बुद्धि और विवेक में वृद्धि होती है। नवरात्रि के नौवे दिन मां की पूजा के बाद हवन किया जाता है। इस दिन कन्या पूजन भी किया जाता है. कन्या पूजन के बाद उन्हे उपहार देकर विदा करना चाहिए। कन्या पूजन के बाद ही नवरात्रि व्रत का पारण किया जाता है। इस दिन किए गए पूजा-पाठ से पूरे 9 दिन की पूजा सफल मानी जाती है। कन्या पूजन के दौरान महंत शिवसागर भारती, भजन गायक सोमनाथ सांवरिया, प्रधान देवनाथ, पुजारी अनिकेत दुबे तथा क्षेत्र के सम्मानित व्यक्ति मौजूद रहे।




