गुजरात के सालंगपुर में हनुमान के अपमान पर हिंदू संतों का अल्टीमेटम

बोटाद,(गुजरात)। बोटाद के सालंगपुर में भगवान श्री राम के अनन्य भक्त हनुमान जी के अपमान का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। राज्य में 1 सितंबर को कई जगहों पर स्वामीनारायण संप्रदाय के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए। इसमें सनातन धर्म से जुड़े हिंदू धर्म गुरुओं ने अल्टीमेटम दिया। वडोदरा समेत कुछ स्थानों पर प्रशासन को ज्ञापन सौंपे गए। इसमें मांग की गई कि हनुमान जी का अपमान करने वाली चीजें तुरंत हटाई जाएं। तो वहीं दूसरी ओर सालंगपुर मंदिर परिसर में हनुमान जी के अपमान को लेकर भड़के गुस्से को देखते हुए परिसर में पुलिस तैनात रही। दो जिलों में पुलिस को शिकायत दिए जाने के बाद राजकोट में युवकों ने स्वामीनारायण संप्रदाय द्वारा हनुमानजी को दास बताए जाने पर पोस्टर वॉर शुरू कर दिया है। शहर के भूपेंद्र रोड स्थित एक स्वामीनारायण संप्रदाय के मंदिर के गेट पर युवकों ने पोस्टर लगा दिए हैं। इनमें स्वामीनारायण को हनुमान जी की सेवा करते हुए दर्शाया गया है। तो वहीं दूसरी तरफ इस मुद्दे पर मोरारी बापू के बाद अहमदाबाद के जगन्नाथ मंदिर के महंत दिलीपदास जी और शारदापीठ के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती जी की प्रतिक्रिया आई है। शंकराचार्य ने कहा है कि यह बेहद गलत है। स्वामीनारायण यानी सहजानंद स्वामी खुद नर नारायण और लक्ष्मी नारायण की पूजा करते थे। ऐसे में हनुमान उनकी सेवा कैसे कर सकते हैं?
क्या है सालंगपुर हनुमान मूर्ति विवाद?
1. अप्रैल, 2023 में बोटाद जिले में स्थित श्रीकष्टभंजनहनुमानजी मंदिर परिसर में हनुमान दादा (बजंरग बली) की 54 फीट ऊंची मूर्ति लगाई गई थी। इस मूर्ति का अनावरण हनुमान जयंती पर हुआ था।
2. 20 अगस्त को जामनगर में रहने वाला अप्पूराज रामावत का युवक सालंगपुर गया था। वहां उसकी नजर 54 फीट ऊंची मूर्ति के नीचे बनाई गई कलाकृतियों (पेंटिग स्वरूप में) पर नजर पड़ी। इसमें देखा कि हनुमान जी एक साधु के आगे झुक रहे हैं। उन्हें दास के तौर पर दिखाया गया है।
3. युवक ने सालंगपुर से लौटते वक्त इसकी तस्वीरें फेसबुक पर पोस्ट की। इसके बाद इस पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया। सोशल मीडिया पर हनुमान के अपमान की तस्वीरें वायरल हो गईं। रक्षाबंधन से पहले यह विवाद मीडिया की सुर्खियों में आ गया।
4. श्रीकष्टभंजनहनुमानजी मंदिर की व्यवस्था स्वामीनारायण संप्रदाय के वडताल ग्रुप के पास है। इस विवाद पर मोरारी बापू की प्रतिक्रिया आने से विवाद का दायरा और बढ़ गया। इसके बाद अहमदाबाद स्थित जगन्नाथ मंदिर के महंत दिलीप दास जी समेत शारदापीठ के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती जी का बयान भी आया है। सभी ने भगवान राम के भक्त हनुमान के अपमान की निंदा की है।
5. सनातन धर्म के संतों और गुरुओं के विरोध के बाद भी अब तक स्वामीनारायण संप्रदाय की तरफ से विवादित तस्वीरें नहीं हटाई गई हैं। तो दूसरी ओर विवादों का एक पूरा पिटारा खुल गया है। 54 फीट ऊंची हनुमान की मूर्ति में राम तिलक की जगह स्वामी नारायण संप्रदाय में लगाया जाने वाला तिलक लगाने का नया मामला जुड़ गया है।
6. हनुमान दादा (गुजराती में दादा का मतलब बाप के बाप) को स्वामीनारायण संप्रदाय में भगवान के तौर पर पूजे जाने वाले सहजानंद स्वामी के आगे झुकाने और उनकी सेवा करने के लिए दास के तौर पर हनुमान को दर्शाने पर विवाद है। स्वामीनारायण संप्रदाय की पुस्तकों में भी हनुमान को दास के तौर पर दिखाया गया है।
7. हनुमान के अपमान का आरोप लगाने वाले संतों और हिंदू संगठनों की दलील है कि स्वामीनारायण संप्रदाय जिन्हें भगवान मानता है। ऐसे धनश्याम पांडेय, (उत्तर प्रदेश, गोंडा जिला) का इतिहास 250 से कुछ साल अधिक पुराना है। ऐसे में पवनपुत्र हनुमान जो राम के अन्यय भक्त थे। वे स्वामीनारायण/धनश्याम पांडेय (जिन्हें भगवान के तौर पर पूजा जाता है) यानी कि सहजानंद स्वामी के दास कैसे हो सकते हैं? यह बेहूदी और गलत बात है। स्वामीनारायण संप्रदाय ने हनुमानजी का अपमान किया है।
8. सवाल खड़ा हो रहा है कि एक संप्रदाय हिंदू धर्म से कैसे बड़ा हो सकता है? यह खुद को श्रेष्ठ साबित करने की कोशिश की है। जिसमें हनुमानजी का अपमान किया जा रहा है।सालंगपुर आने वाली नई पीढ़ी क्या शिक्षा लेकर लौटेगी? विरोध के बढ़ने के बाद स्वामी नारायण संप्रदाय समेत बीजेपी और दूसरे राजनीतिक दल चुप हैं लेकिन लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचने से मामला तूल पकड़ रहा है। राजकोट में युवकों ने जय श्री राम के उद्घोष के साथ स्वामीनारायण मंदिर पर जवाबी पोस्टर लगा दिए हैं। स्वामी नारायण संप्रदाय के वडताल खेमे की कमान नौतम स्वामी के हाथों में हैं। गुजरात में बेहद प्रभावशाली संप्रदायों में शामिल स्वामीनारायण संप्रदाय चार खेमों में बंटा हुआ है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button