क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर करते थे ठगी, सैकड़ों को लगा चुके हैं चूना

नई दिल्ली। रोहिणी इलाके में साला बहनोई की जोड़ी क्रेडिट कार्ड की सीमा बढ़ाने के बहाने लोगों से ठगी कर रहे थे। रोहिणी साइबर थाना ने तकनीकी जांच करते हुए इन दोनों समेत पांच जालसाजों को गिरफ्तार किया है। आरोपी अब तक सैकड़ों लोगों से ठगी कर चुके हैं। ठगी की रकम से वे ऑनलाइन फोन, स्मार्ट घड़ी और कैमरा खरीदते थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 31 फर्जी सिम कार्ड, 19 फोन, ठगी की रकम से खरीदे गए 25 नए मोबाइल, चार कैमरा और चार स्मार्ट घड़ी बरामद किए हैं। जालसाजों की पहचान उत्तम नगर निवासी विजय कुमार शर्मा, उसके बहनोई मूलचंद मिश्रा, बुध विहार निवासी अमित सेंगर, भजनपुरा निवासी संजीव कुमार और संगम विहार निवासी शुभम के रूप में हुई है।

रोहिणी जिला पुलिस उपायुक्त प्रणव तायल ने बताया कि गैंग का सरगना विजय कुमार रत्नाकर बैंक में डायरेक्ट सेल्स एसोसिएट के रूप में काम कर चुका है। उसके खिलाफ हैदराबाद, हरिनगर और हिसार में ठगी का मामला दर्ज है और वह जेल भी जा चुका है। 25 मई को किराड़ी निवासी इब्राहिम अली ने पोर्टल पर ठगी की शिकायत की थी। इसने बताया कि उन्हें एक अनजान नंबर से फोन आया। फोनकर्ता ने अपने आपको एसबीआई का अधिकारी बताया। उसने क्रेडिट कार्ड की सीमा 1.25 लाख से बढ़ाकर 5 लाख करने का आश्वासन दिया। इसके बाद एक ओटीपी भेजकर कहा कि कार्ड की सीमा को बढ़ाने के लिए ओटीपी नंबर भरना होगा। जैसे ही शिकायतकर्ता ने ठग को ओटीपी नंबर बताया, उनके कार्ड से 89,120 रुपया कट गया। साइबर सेल की टीम ने तकनीकी जांच के बाद दबिश देकर पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

ठगों को पकड़ने वाली पुलिस टीम

मुख्य आरोपी ने बताया कि वह राज नाम के व्यक्ति से क्रेडिट कार्ड का डेटा खरीदता था। पीड़ितों से संपर्क करने के लिए वे फर्जी सिम कार्ड खरीदते थे। इसी नंबर से वे पीड़ित को फोन करते थे। वह खुद को बैंक अधिकारी बताकर क्रेडिट कार्ड की सीमा बढ़ाने के बहाने पीड़ितों से ओटीपी नंबर ले लेता था। पीड़ित के क्रेडिट कार्ड नंबर का इस्तेमाल कर फ्लिपकार्ट से मोबाइल फोन, स्मार्ट घड़ी और कैमरा खरीदते थे। बाद में इन चीजों को सस्ते दामों में बेच दिया जाता था। मुख्य आरोपी ने बताया कि वह राज नाम के व्यक्ति से क्रेडिट कार्ड का डेटा खरीदता था। पीड़ितों से संपर्क करने के लिए वे फर्जी सिम कार्ड खरीदते थे। इसी नंबर से वे पीड़ित को फोन करते थे। वह खुद को बैंक अधिकारी बताकर क्रेडिट कार्ड की सीमा बढ़ाने के बहाने पीड़ितों से ओटीपी नंबर ले लेता था। पीड़ित के क्रेडिट कार्ड नंबर का इस्तेमाल कर फ्लिपकार्ट से मोबाइल फोन, स्मार्ट घड़ी और कैमरा खरीदते थे। बाद में इन चीजों को सस्ते दामों में बेच दिया जाता था।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button