मध्यावधि चुनाव में हार के बाद ट्रंप प्रशासन को पहला झटका, भारतीय मूल की हरमीत कौर ढिल्लों ने दिया इस्तीफा
अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में हार के बाद भारतीय-अमेरिकी हरमीत कौर ढिल्लों ने नागरिक अधिकार प्रभाग प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया है। वह पद छोड़ने वाली ट्रम्प की पहली प्रमुख सहयोगी हैं और उन्होंने राष्ट्रपति का आभार जताया।

वाशिंगटन,एजेंसी। अमेरिका में 3 नवंबर को हुए मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को मिली करारी हार के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को पहला बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी न्याय विभाग के नागरिक अधिकार प्रभाग की प्रमुख भारतीय-अमेरिकी वकील हरमीत कौर ढिल्लों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वह ट्रंप प्रशासन की उन प्रमुख सहयोगियों में पहली हैं, जिन्होंने चुनावी हार के बाद अपना पद छोड़ा है। उनके इस्तीफे के बाद अमेरिकी प्रशासन और रिपब्लिकन खेमे में राजनीतिक हलचल तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
चंडीगढ़ में जन्मीं हरमीत कौर ढिल्लों ने न्यूयॉर्क जाने से पहले लंदन में भी समय बिताया था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिसंबर 2024 में उन्हें नागरिक अधिकार प्रभाग के प्रमुख पद के लिए नामित किया था। इसके बाद अप्रैल में उन्होंने नागरिक अधिकारों के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल (एएजी) के रूप में शपथ ली थी। ढिल्लों का इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है, जब मध्यावधि चुनावों में मिली हार के बाद ट्रंप प्रशासन की नीतियों को लेकर पार्टी के भीतर ही असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है।
हरमीत कौर ढिल्लों ने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने इस्तीफे की जानकारी साझा करते हुए कहा कि नागरिक अधिकारों के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल के रूप में अपने देश की सेवा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है। उन्होंने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में विभाग ने कथित अवैध विविधता, समानता और समावेश (डीईआई) नीतियों को समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा महिलाओं और लड़कियों के खेलों की सुरक्षा के लिए भी काम किया गया। उन्होंने यह अवसर देने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आभार जताया और कहा कि अब आगे क्या होता है, इसका उन्हें इंतजार रहेगा।
गौरतलब है कि हरमीत कौर ढिल्लों की कानूनी फर्म वर्ष 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान ट्रंप के चुनावी अभियान से भी जुड़ी रही थी। यही वजह है कि उन्हें ट्रंप के भरोसेमंद कानूनी सहयोगियों में गिना जाता रहा है। हालांकि, उन्होंने अपने इस्तीफे के पीछे किसी व्यक्ति, विवाद या प्रशासनिक फैसले को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से ट्रंप के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अपने कार्यकाल को सम्मानजनक बताया है।
दूसरी ओर, मध्यावधि चुनावों में मिली हार के बाद रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी असंतोष के स्वर तेज हो रहे हैं। कई रिपब्लिकन नेताओं और ट्रंप समर्थकों ने ईरान युद्ध तथा व्यापार शुल्क यानी टैरिफ नीति को चुनावी नुकसान की प्रमुख वजह बताया है। इन मुद्दों पर प्रशासन की रणनीति को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में ढिल्लों के इस्तीफे के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आने वाले दिनों में ट्रंप प्रशासन के कुछ अन्य अधिकारी भी अपने पद छोड़ सकते हैं।
हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने चुनावी हार की जिम्मेदारी अपनी नीतियों पर लेने के बजाय शेयर बाजार में आई भारी गिरावट के लिए डेमोक्रेट्स को जिम्मेदार ठहराया है। गुरुवार को अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर उन्होंने लिखा कि चुनाव परिणामों के कारण शेयर बाजार ने अपने सबसे खराब दिनों में से एक देखा है। उन्होंने बाजार की गिरावट पर दुख जताते हुए कहा कि उनकी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए कड़ी मेहनत की थी, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। ट्रंप ने निवेशकों के सेवानिवृत्ति खातों यानी 401(के) में आई गिरावट का जिक्र करते हुए इसके लिए रिपब्लिकन के बजाय डेमोक्रेट्स को जिम्मेदार बताया।
चुनावी नतीजों के बाद अमेरिकी राजनीति में सत्ता के समीकरण भी बदल गए हैं। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट में डेमोक्रेट्स के मजबूत नियंत्रण की स्थिति ने ट्रंप प्रशासन के सामने नई राजनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। आने वाले समय में विधायी फैसलों, सरकारी नीतियों और प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप को विपक्ष के कड़े विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि मध्यावधि चुनावों के नतीजे ट्रंप प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी हैं। हालांकि, फिलहाल उनकी नीतियों में किसी बड़े बदलाव की संभावना कम दिखाई दे रही है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि चुनावी हार और प्रशासनिक इस्तीफों के बाद ट्रंप अपनी राजनीतिक रणनीति में क्या बदलाव करते हैं और दो साल बाद होने वाले अगले राष्ट्रपति चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी किस तरह अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करती है। ट्रंप ने अपने समर्थकों को भरोसा दिलाया है कि उनकी पार्टी फिर वापसी करेगी और अमेरिका को फिर से महान बनाने के अपने संकल्प पर कायम रहेगी।




