ईरान के खिलाफ नए सैन्य अभियान पर विचार कर रहे नेतन्याहू, इजरायली सेना प्रमुख के विरोध की खबर

इजरायल एक बार फिर ईरान पर हमले की तैयारी में है। इसके लिए वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। इस ऑपरेशन का उद्देश्य ईरान में सत्ता परिवर्तन करना है। हालांकि, ट्रंप मिडटर्म इलेक्शन तक इंतजार करना चाहते हैं, ताकि कोई गड़बड़ी न हो।

तेल अवीव। इजरायल और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की आशंकाओं के बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ओर से ईरान के खिलाफ नए सैन्य अभियान की पैरवी किए जाने की खबर सामने आई है। इजरायली मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित अभियान का उद्देश्य ईरानी नेतृत्व पर दबाव बढ़ाना और वहां की सत्ता व्यवस्था को कमजोर करना हो सकता है। हालांकि, इस योजना को लेकर इजरायल के सुरक्षा प्रतिष्ठान में मतभेद होने की बात भी कही गई है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और किसी नए संयुक्त सैन्य हमले की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
इजरायली समाचार पत्र ‘इजरायल हायोम’ की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ तेज सैन्य कार्रवाई की वकालत की है, लेकिन इजरायल रक्षा बलों के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर ने कथित तौर पर इस प्रस्ताव का विरोध किया है। दूसरी ओर, मोसाद प्रमुख रोमन गोफमैन के इस अभियान का समर्थन करने की बात कही गई है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि प्रस्तावित कार्रवाई क्षेत्र में इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष को फिर से भड़का सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, अभियान को फिलहाल शुरू नहीं किए जाने के पीछे चुनावी कारणों के बजाय सैन्य और परिचालन संबंधी पहलुओं को जिम्मेदार बताया गया है। हालांकि, इजरायल में विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि नेतन्याहू ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के जरिए घरेलू राजनीतिक माहौल और चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं। इन आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
इजरायल में बड़े सुरक्षा अभियानों से जुड़े फैसलों में विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों के बीच समन्वय की भूमिका अहम मानी जाती है। रिपोर्ट में सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों की समिति की बैठक का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें शिन बेट, मोसाद और इजरायल रक्षा बलों के शीर्ष अधिकारी शामिल होते हैं। किसी बड़े सैन्य अभियान के लिए सुरक्षा, खुफिया जानकारी, संभावित जवाबी कार्रवाई और क्षेत्रीय प्रभावों जैसे पहलुओं पर विचार किया जाना जरूरी होता है।
‘इजरायल हायोम’ की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि प्रस्तावित कार्रवाई का स्वरूप पहले के बड़े सैन्य अभियानों से अलग हो सकता है। हालांकि, इसके संभावित लक्ष्यों, समय और सैन्य रणनीति के बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, व्यापक स्तर पर हमला करने का फैसला इजरायल और अमेरिका के बीच समन्वय तथा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी पर निर्भर हो सकता है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर इजरायल लंबे समय से चिंता जताता रहा है। इजरायली अधिकारियों का मानना है कि ईरान की परमाणु गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं। दूसरी ओर, किसी सैन्य कार्रवाई के संभावित परिणामों में जवाबी हमले, क्षेत्रीय संघर्ष का विस्तार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ने जैसी आशंकाएं भी शामिल हैं। ऐसे में किसी भी कदम का समय और स्वरूप महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी प्रशासन सैन्य विकल्पों पर निर्णय लेने से पहले राजनीतिक और रणनीतिक परिस्थितियों पर विचार कर रहा है। हालांकि, अमेरिका की ओर से इस कथित योजना और उसके समय को लेकर किसी आधिकारिक फैसले की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि इजरायल और अमेरिका ईरान के खिलाफ कोई नया संयुक्त सैन्य अभियान शुरू करने जा रहे हैं।
फिलहाल इस पूरे मामले में इजरायली मीडिया की रिपोर्ट, सुरक्षा प्रतिष्ठान के भीतर बताए जा रहे मतभेद और विपक्ष के आरोप चर्चा में हैं। किसी संभावित कार्रवाई की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने के लिए इजरायल और अमेरिका की आधिकारिक घोषणाओं तथा विश्वसनीय स्वतंत्र रिपोर्टों का इंतजार करना होगा।

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