अयोध्या में गुरुकुल की जमीन पर भू-माफियाओं का कब्जा, छात्रों ने खेल का मैदान वापस दिलाने की उठाई मांग

अयोध्या में 100 साल पुरानी गुरुकुल की जमीन पर भू-माफियाओं द्वारा कब्जा करने का मामला सामने आया है। गुरुकुल के प्राचार्य और छात्रों ने सीएम योगी से मदद की गुहार लगाई है।

अयोध्या,उत्तर प्रदेश। राम मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर रामपथ पर स्थित लगभग एक सदी पुराने निशुल्क गुरुकुल महाविद्यालय की जमीन पर कथित कब्जे का मामला सामने आया है। गुरुकुल के प्राचार्य, व्यवस्थापक और विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर परिसर की जमीन को कब्जामुक्त कराने की मांग की है। उनका आरोप है कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दौरान अस्थायी पार्किंग के लिए दी गई जमीन का इस्तेमाल अब लंबे समय से किया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई, खेलकूद और अन्य गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
गुरुकुल प्रबंधन के मुताबिक, राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के समय प्रशासन को कुछ दिनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था करने के उद्देश्य से महाविद्यालय का प्रांगण उपलब्ध कराया गया था। प्रबंधन का आरोप है कि अस्थायी व्यवस्था धीरे-धीरे स्थायी रूप लेती चली गई और करीब दो वर्ष बीत जाने के बाद भी जमीन का उपयोग पार्किंग सहित अन्य कार्यों के लिए किया जा रहा है। परिसर में नगर निगम और यातायात पुलिस के वाहनों के खड़े होने से विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध खुला स्थान सीमित हो गया है।
महाविद्यालय के व्यवस्थापक अरुण मित्र शास्त्री के अनुसार, वर्ष 1925 में स्थापित इस गुरुकुल में करीब 200 विद्यार्थी रहकर चारों वेदों की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। संस्थान का उद्देश्य विद्यार्थियों को वैदिक ज्ञान, संस्कार और भारतीय संस्कृति की शिक्षा देना है। प्रबंधन का कहना है कि पहले परिसर में विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त खेल का मैदान था। छात्र यहां खेलकूद के साथ खेती भी करते थे और सब्जियां उगाने जैसी गतिविधियों में भाग लेते थे। लेकिन जमीन का उपयोग पार्किंग और वाहनों को खड़ा करने के लिए किए जाने से इन गतिविधियों पर असर पड़ा है।
गुरुकुल प्रबंधन ने आशंका जताई है कि परिसर की कीमती जमीन के साथ-साथ महाविद्यालय भवन पर भी कुछ लोगों की नजर है। हालांकि, जमीन पर अवैध कब्जे और भवन को लेकर जताई गई आशंकाओं की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। प्रबंधन ने प्रशासन से भूमि के अभिलेखों और वास्तविक स्थिति की जांच कराकर गुरुकुल के अधिकारों की रक्षा करने की मांग की है।
बताया जाता है कि एक वर्ष पहले देश के प्रमुख उद्योगपति गौतम अदाणी भी इस महाविद्यालय पहुंचे थे। उनके सहयोग से परिसर में एक बड़े कक्ष का निर्माण कराया गया था। प्रबंधन और विद्यार्थियों का कहना है कि गुरुकुल की मूल शैक्षणिक व्यवस्था और विद्यार्थियों की सुविधाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। छात्रों ने मैदान वापस दिलाने की मांग करते हुए परिसर में वाहनों की पार्किंग बंद कराने की अपील की है।
गुरुकुल से जुड़े लोगों का कहना है कि यह संस्थान लंबे समय से वैदिक शिक्षा की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध जमीन का उपयोग उनकी शैक्षणिक और शारीरिक गतिविधियों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से मामले में शीघ्र कार्रवाई कर गुरुकुल की जमीन के उपयोग को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने लाने की मांग की है।
वहीं, प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, संबंधित भूमि की स्थिति और मालिकाना हक को लेकर जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही जमीन के स्वामित्व और उसके उपयोग के संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल गुरुकुल प्रबंधन और विद्यार्थियों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी शिकायत पर कार्रवाई करेगा और उन्हें अपना खेल का मैदान वापस मिल सकेगा।

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