ऑस्ट्रेलिया में खरगोशों को द्वीप से हटाने का प्रयोग सफल, दुर्लभ समुद्री पक्षी गोल्ड्स पेट्रेल की आबादी में हुआ सुधार

ऑस्ट्रेलिया ने साल 1997 में गोल्ड्स पेट्रेल को बचाने के एक बड़े अभियान के तहत कैबेज ट्री आइलैंड से खरगोशों को पूरी तरह खत्म कर दिया था। हालांकि कुछ साल बाद चीजें बदल गईं।

ऑस्ट्रेलिया का दुर्लभ समुद्री पक्षी गोल्ड्स पेट्रेल

कैनबरा,एजेंसी। ऑस्ट्रेलिया में दुर्लभ समुद्री पक्षी गोल्ड्स पेट्रेल के संरक्षण के लिए चलाया गया अभियान सफल साबित हुआ है। न्यू साउथ वेल्स के तट के पास स्थित कैबेज ट्री द्वीप से खरगोशों को हटाने के बाद पक्षियों के प्राकृतिक आवास को बहाल करने और उनकी प्रजनन क्षमता में सुधार लाने में मदद मिली। यह अभियान इस बात का उदाहरण बन गया कि किसी बाहरी प्रजाति के कारण बिगड़े पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षण के ठोस उपायों से फिर सुधारा जा सकता है।
न्यू साउथ वेल्स राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव सेवा के अनुसार, कैबेज ट्री द्वीप गोल्ड्स पेट्रेल के प्रजनन के लिए महत्वपूर्ण स्थान है। वर्ष 1906 में यूरोपीय खरगोशों को यहां लाए जाने के बाद द्वीप की प्राकृतिक वनस्पति पर दबाव बढ़ने लगा। खरगोश पौधों और उनके छोटे पौधों को खा जाते थे, जिससे जंगल की नई वनस्पति विकसित नहीं हो पाती थी। कैबेज ट्री पाम सहित कई पौधे इस पक्षी के प्राकृतिक आवास का हिस्सा हैं। वनस्पति को नुकसान पहुंचने से पक्षियों के प्रजनन स्थलों और उनके अस्तित्व पर भी खतरा बढ़ गया था।
संरक्षणवादियों ने वर्ष 1997 में खरगोशों को द्वीप से हटाने के लिए व्यापक अभियान चलाया। इसके तहत खरगोशों की बची हुई आबादी को खत्म करने के लिए हवाई माध्यम से विष मिला चारा डाला गया। इस चारे में ब्रोडिफाकौम नामक रक्त का थक्का बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला विष इस्तेमाल किया गया था। अभियान के 13 दिनों के भीतर शेष खरगोशों के खत्म होने की सूचना मिली। इसके बाद छह महीने तक निगरानी की गई, जिसमें कोई जीवित खरगोश नहीं मिला।
खरगोशों को हटाने के साथ-साथ संरक्षणवादियों ने गोल्ड्स पेट्रेल के आवास को बहाल करने और पास के बूनडेलबाह द्वीप पर एक अन्य प्रजनन कॉलोनी विकसित करने के प्रयास भी किए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2000 तक बूनडेलबाह द्वीप पर प्रजनन करने वाले 800 से अधिक जोड़े मौजूद थे और वहां हर साल लगभग 400 बच्चे पैदा हो रहे थे। कैबेज ट्री द्वीप पर भी पक्षियों की प्रजनन गतिविधियों में सुधार दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों के लिए यह अभियान वन्यजीव संरक्षण की एक महत्वपूर्ण सीख है। किसी संकटग्रस्त प्रजाति को बचाने के लिए केवल उस जीव की संख्या बढ़ाने पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसके प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचाने वाले कारणों को दूर करना भी जरूरी है। खरगोशों को हटाने से वनस्पति पर दबाव कम हुआ और आवास बहाली के प्रयासों को गति मिली। प्रजनन स्थलों की सुरक्षा तथा अन्य खतरों के प्रबंधन ने भी संरक्षण कार्यक्रम को मजबूती दी।
ऑस्ट्रेलिया का यह अनुभव बताता है कि समय रहते उठाए गए कदम दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, किसी प्रजाति की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए लगातार निगरानी, प्राकृतिक आवास की देखभाल और अन्य खतरों पर नियंत्रण बनाए रखना आवश्यक है।

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