इंदौर कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के व्यवहार पर वकीलों का विरोध, बहिष्कार की चेतावनी
इंदौर की कुटुंब न्यायालय में न्यायाधीश के व्यवहार को लेकर वकील लामबंद हो गए हैं। अधिवक्ता संघों ने प्रशासनिक न्यायाधीश से शिकायत कर सम्मानजनक व्यवहार की मांग की है। वकीलों ने चेतावनी दी है कि सुधार नहीं हुआ तो न्यायिक कामकाज का बहिष्कार किया जा सकता है।

इंदौर,मध्य प्रदेश। कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के कथित व्यवहार और कार्यशैली को लेकर अधिवक्ताओं में नाराजगी बढ़ गई है। सोमवार को जिला न्यायालय और उच्च न्यायालय के अधिवक्ता संघों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर अपनी शिकायतें प्रशासनिक न्यायाधीश के समक्ष रखीं। अधिवक्ताओं ने अदालत में सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो दोनों संघ संयुक्त रूप से न्यायिक कार्य का बहिष्कार करने का निर्णय ले सकते हैं।
जिला अभिभाषक संघ के अध्यक्ष राकेश पाल के अनुसार, कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के व्यवहार को लेकर नई कार्यकारिणी के चुनाव के बाद से लगातार शिकायतें मिल रही थीं। अधिवक्ताओं का आरोप है कि सुनवाई के दौरान उनसे उचित तरीके से बातचीत नहीं की जाती और कुछ मामलों में पक्षकारों के सामने भी कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणियां की जाती हैं। पाल ने बताया कि इस संबंध में पहले भी उच्च न्यायालय में दो बार लिखित शिकायत दी जा चुकी है। सोमवार को भी प्रशासनिक न्यायाधीश के समक्ष यह मामला उठाया गया।
राकेश पाल ने आरोप लगाया कि कई बार अधिवक्ताओं को अदालत में अपनी बात रखने और जिरह करने में कठिनाई होती है। उनके मुताबिक, कुछ मौकों पर वकीलों से यह तक कहा गया कि उन्हें वकालत करना नहीं आता और उन्हें कोई दूसरा काम करना चाहिए। अधिवक्ताओं का कहना है कि इस तरह की टिप्पणियों से उनके सम्मान और न्यायालय में प्रभावी पैरवी करने की प्रक्रिया पर असर पड़ता है। इसी मुद्दे पर जिला न्यायालय और उच्च न्यायालय के अधिवक्ता संघों ने संयुक्त रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
वकीलों ने कहा कि न्याय व्यवस्था में बार और बेंच की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अधिवक्ता अपने पक्षकारों का पक्ष अदालत के सामने रखते हैं और न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग करते हैं। ऐसे में उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार होना आवश्यक है। अधिवक्ताओं के मुताबिक, न्यायालय में आने वाले पक्षकारों के साथ भी संवेदनशीलता और मर्यादा बनाए रखी जानी चाहिए, ताकि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
जिला अभिभाषक संघ के सचिव धर्मेंद्र गुर्जर ने बताया कि प्रधान न्यायाधीश के व्यवहार को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। इसके अलावा कुटुंब न्यायालय में आवश्यक दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां समय पर नहीं मिलने की शिकायतें भी मिली हैं। इस मुद्दे पर नकल शाखा के प्रभारी से बातचीत की गई है। अधिवक्ताओं ने मांग की कि दस्तावेज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सुचारु बनाया जाए, ताकि पक्षकारों और वकीलों को अनावश्यक देरी न झेलनी पड़े।
सोमवार को अधिवक्ताओं ने विरोध जताते हुए प्रधान न्यायाधीश से व्यवहार में सुधार लाने का अनुरोध किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायालय की गरिमा बनाए रखने के साथ अधिवक्ताओं के सम्मान का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। राकेश पाल और धर्मेंद्र गुर्जर के अनुसार, यदि शिकायतों के बाद भी स्थिति में बदलाव नहीं आता है तो जिला न्यायालय और उच्च न्यायालय के अधिवक्ता संघ संयुक्त रूप से आगे की रणनीति तय करेंगे।
अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर संबंधित न्यायालयों के कामकाज का बहिष्कार किया जा सकता है। इसके बाद भी समाधान नहीं निकला तो न्यायिक कार्य से विरत रहने या अनिश्चितकालीन हड़ताल जैसे विकल्पों पर विचार किया जाएगा। फिलहाल अधिवक्ताओं की मांग है कि शिकायतों पर गंभीरता से विचार कर ऐसा वातावरण सुनिश्चित किया जाए, जिसमें न्यायालय की मर्यादा और सभी संबंधित पक्षों का सम्मान बना रहे।




