बड़गाई जमीन मामले में हेमंत सोरेन पर आरोप तय, अब अदालत में शुरू होगा ट्रायल
बड़गाई जमीन घोटाला में चार्ज फ्रेम होने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ अब कोर्ट में ट्रायल शुरू होगा। बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष की ओर से दलीलें दी जाएंगी, गवाही कराई जाएगी।

रांची,एजेंसी। बड़गाई जमीन मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ विशेष पीएमएलए अदालत ने आरोप तय कर दिए हैं। बुधवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश हुए हेमंत सोरेन ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को निराधार बताते हुए खुद को निर्दोष बताया। आरोप तय होने के साथ ही अब मामले में नियमित सुनवाई और गवाहों के बयान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अगली सुनवाई 30 नवंबर को निर्धारित की गई है।
यह मामला रांची के बड़गाई अंचल की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि जमीन से संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेजों में कथित हेरफेर के जरिए इसे अवैध तरीके से हासिल किया गया। इस मामले में अदालत ने हेमंत सोरेन को 17वां आरोपी बनाया है। उनसे पहले 16 अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए जा चुके हैं।
कानूनी प्रक्रिया में आरोप तय किए जाने का अर्थ यह नहीं होता कि आरोपी दोषी साबित हो गया है। इसका मतलब है कि अदालत ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर मुकदमे को आगे बढ़ाने योग्य मामला पाया है। अब अभियोजन पक्ष की ओर से गवाह और साक्ष्य पेश किए जाएंगे तथा बचाव पक्ष को भी अपना पक्ष रखने और जिरह करने का अवसर मिलेगा। मामले का अंतिम परिणाम सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत के फैसले से तय होगा।
मामला उस समय सामने आया जब प्रवर्तन निदेशालय रांची में जमीन से जुड़े एक अन्य मामले की जांच कर रहा था। जांच के दौरान बड़गाई अंचल के तत्कालीन राजस्व उपनिरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद से जुड़े दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सामग्री भी जांच के दायरे में आई। ईडी ने इसी जांच के आधार पर बड़गाई की जमीन से संबंधित कथित रिकॉर्ड हेरफेर और स्वामित्व के दावों की पड़ताल की। एजेंसी का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेजों और सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर की गई।
जमीन मामले में हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी 31 जनवरी 2024 को ईडी ने की थी। गिरफ्तारी से पहले उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। वह करीब पांच महीने तक जेल में रहे और जून 2024 में झारखंड हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आए। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ ईडी की चुनौती को सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दिया था।
अब आरोप तय होने के बाद मामले की अगली महत्वपूर्ण कड़ी मुकदमे की सुनवाई होगी। अदालत में अभियोजन पक्ष अपने साक्ष्य और गवाह पेश करेगा, जबकि बचाव पक्ष को उन पर जिरह करने तथा अपना पक्ष रखने का अधिकार होगा। हेमंत सोरेन की ओर से आरोपों को पहले ही खारिज किया जा चुका है। उनके खिलाफ आरोपों की अंतिम पुष्टि या खंडन अदालत में होने वाले ट्रायल और उसके अंतिम फैसले से ही होगा।
इस बीच हेमंत सोरेन ने विशेष अदालत की कार्यवाही को चुनौती देते हुए झारखंड हाईकोर्ट का भी रुख किया है। हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय से जवाब मांगा है, लेकिन निचली अदालत की कार्यवाही पर फिलहाल रोक नहीं लगाई गई है। इस मामले में हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को सूचीबद्ध है, जबकि विशेष पीएमएलए अदालत में ट्रायल की प्रक्रिया 30 नवंबर से आगे बढ़ने की संभावना है।
आरोप तय होने के बाद फिलहाल सबसे बड़ा बदलाव यह है कि मामला जांच और आरोप निर्धारण के चरण से आगे बढ़कर ट्रायल के चरण में पहुंच गया है। मुख्यमंत्री पद पर हेमंत सोरेन की स्थिति को लेकर तत्काल कोई स्वतः कानूनी बदलाव आरोप तय होने मात्र से नहीं होता; मामले में आगे की कानूनी स्थिति अदालत में होने वाली सुनवाई और भविष्य के न्यायिक आदेशों पर निर्भर करेगी।




