चार शहरों में जयपुर रियासत की संपत्तियों पर राजस्थान के दावे से यूपी में हलचल, घरों की खरीद-बिक्री रोकी

राजस्थान सरकार ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश के चार शहरों में उसकी रियासतों के दौर की संपत्तियां हैं, जिन पर उसका अधिकार है। इस दावे पर उत्तर प्रदेश सरकार ने रेवेन्यू विभाग के रिकॉर्डों की जांच शुरू कर दी है। प्रयागराज में इस दावे से 1263 घरों और दुकानों की खरीद और बिक्री रोक दी गई है।

फाइल फोटो

उत्तर प्रदेश डेस्क। राजस्थान सरकार की ओर से आगरा, प्रयागराज, वाराणसी और मथुरा में पूर्व जयपुर रियासत की संपत्तियों पर मालिकाना हक का दावा किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश में सात दशक से अधिक पुराने राजस्व और स्वामित्व संबंधी अभिलेखों की दोबारा जांच शुरू हो गई है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने उत्तर प्रदेश सरकार से संबंधित संपत्तियों को राजस्थान सरकार के नाम दर्ज किए जाने का अनुरोध किया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद के आयुक्त ने चारों जिलों के जिलाधिकारियों को पुराने रिकॉर्ड की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
राजस्थान ने अपने दावे के समर्थन में 1949 में हुए राजस्थान समझौते के अनुच्छेद छह के उपबंध दो के खंड सी और 1952 के विलय काल से जुड़े अभिलेखों का हवाला दिया है। राजस्थान सरकार का तर्क है कि रियासतों के भारत में विलय के बाद राजस्थान से बाहर स्थित तत्कालीन जयपुर रियासत की संपत्तियां भी राजस्थान सरकार के अधिकार में आ गई थीं। इसी दावे के बाद उत्तर प्रदेश के संबंधित जिलों में पुरानी बिक्री विलेख, नामांतरण, विकास योजनाओं और वर्तमान कब्जे से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
आगरा में राजस्थान का दावा जयपुर हाउस की करीब 100 बीघा जमीन, दो हवेलियों, सदाशिव मान कामेश्वर मंदिर और सड़क की जमीन के एक हिस्से से संबंधित बताया जा रहा है। वर्तमान में जयपुर हाउस क्षेत्र घनी आबादी वाले आवासीय और व्यावसायिक इलाके में बदल चुका है। यहां आगरा विकास प्राधिकरण, जीएसटी भवन सहित विभिन्न संस्थानों और संगठनों के कार्यालय भी मौजूद हैं।
आगरा विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एम. अरुणमौलि के अनुसार, जयपुर हाउस एस्टेट से जुड़े पुराने अभिलेखों और 31 मई 1969 की पंजीकृत डीड की जांच की जा रही है। उनके अनुसार, उपलब्ध रिकॉर्ड में यह उल्लेख है कि जमीन नगर निगम ने राजस्थान सरकार के लोक निर्माण विभाग से खरीदी थी। इस संबंध में रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को भेजी जा रही है और आगे की कार्रवाई सरकार के निर्णय के अनुसार होगी।
प्रयागराज में राजस्थान का दावा अपेक्षाकृत बड़े क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। अधिकारियों ने कटरा सवाई जय सिंह क्षेत्र में करीब 35.25 एकड़ में फैले 1,263 मकानों और दुकानों की पहचान की है। जिला प्रशासन ने इन संपत्तियों की खरीद-बिक्री पर फिलहाल अस्थायी रोक लगाई है। प्रशासन पुराने स्वामित्व अभिलेख, नामांतरण और वर्तमान कब्जे से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रहा है। रिकॉर्ड की जांच पूरी होने तक क्षेत्र की कई संपत्तियों में लेन-देन प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई है।
वाराणसी और मथुरा में भी पुराने अभिलेखों की जांच शुरू की गई है। वाराणसी के मानमंदिर क्षेत्र में मानमंदिर घाट के साथ 44 मकानों पर राजस्थान की ओर से दावा किए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं मथुरा में करीब 2.16 एकड़ जमीन पर दावा बताया जा रहा है, जिसमें जसवंतगंज धर्मशाला के छह कमरे भी शामिल हैं। दोनों जिलों के राजस्व और नगर निकाय अधिकारी ऐतिहासिक अभिलेखों की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को भेजेंगे।
फिलहाल चारों जिलों में प्रशासनिक स्तर पर दस्तावेजों और पुराने स्वामित्व रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। इन अभिलेखों के आधार पर राजस्थान के दावे की स्थिति और संबंधित संपत्तियों के वर्तमान स्वामित्व को लेकर आगे का निर्णय लिया जाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button