फर्रुखाबाद में ठेकेदार हत्याकांड में फैसला, माफिया अनुपम दुबे को आजीवन कारावास की सजा

फर्रुखाबाद/उत्तर प्रदेश। पिता की हत्या का बदला लेने को लेकर माफिया ने पीडब्ल्यूडी ठेकेदार की फतेहगढ़ में दिन दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में पांच अभियुक्तों के खिलाफ सीबीसीआइडी के निरीक्षक ने आरोप पत्र दाखिल किया। ईसी एक्ट न्यायालय के विशेष न्यायाधीश ने बुधवार को माफिया और उसके साथी को आजीवन कारावास की सजा के साथ ही 2.06 लाख रुपये जुर्माना से भी दंडित किया है।
माफिया के गुर्गों ने फैसला टालने के लिए न्यायालय में ट्रांसफार्मर याचिका दायर की थी। इसे जनपद न्यायाधीश ने खारिज कर दिया। बुधवार को उच्च न्यायालय के एक अधिवक्ता ने मेल भेजा। जिसमें कहा गया कि ट्रांसफार्मर प्रार्थना पत्र खारिज करने के विरोध में अपील दायर कर दी गई है। फैसला रोक दिया जाए। इससे पूर्व ही अपर जिला जज ने दोनों अभियुक्तों को दोषी करार दे दिया था।
जनपद कन्नौज थाना गुरसहायगंज के कस्बा समधन निवासी पीडब्ल्यूडी ठेकेदार शमीम खान के छोटे भाई नसीम खान ने 26 जुलाई 1995 को फतेहगढ़ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें कहा गया था कि वह अपने भाई व गांव के निवासी सरफराज व इदरीश के साथ फतेहगढ़ आया था। काम होने के कारण वह न्यायालय चला गया। शमीम के साथ इदरीश व सरफराज ठेकेदारी में साझेदार मुहल्ला बजरिया अलीगंज निवासी राजेंद्र प्रसाद तिवारी से मिलने के लिए चले गए।
साझेदार के मकान के बाहर गली में आरोपितों ने घेर लिया और फायरिंग कर दी। गोली लगने से शमीम की मौके पर ही मौत हो गई। इस मामले में सीबीसीआइडी ने मामले में अनुपम दुबे, उसके चाचा कौशल किशोर दुबे, लक्ष्मीनारायन, राजू लंगड़ा उर्फ राजेंद्र बाथम, बालकिशन उर्फ शिशु व नेमकुमार बिलैया के खिलाफ अलग-अलग तिथियों में आरोप पत्र दाखिल किया। इस मामले में अपर जिला सत्र न्यायाधीश तरुण कुमार सिंह ने अभियोजन पक्ष के जिला शासकीय अधिवक्ता सुदेश प्रताप सिंह, एडीजीसी तेज सिंह राजपूत, हरिनाथ सिंह, श्रवण कुमार, अभिषेक सक्सेना व बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद माफिया अनुपम दुबे व उसके साथ बालकिशन उर्फ शिशु को आजीवन कारावास व 2.06 लाख जुर्माना की सजा सुनाई है।
मृतक के भाई नसीम हुसैन ने न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि देर से ही सही लेकिन सच्चाई की जीत हुई है। इससे उनके परिवार को ही नहीं बल्कि तमाम उन निर्दोष लोगों को न्याय मिला है जिनके अपनों ने जान गवाई है। बताया कि वह दिल्ली में परिवार के साथ उपचार कराने गए थे। नहीं तो वह भी इस फैसले के गवाह होते। कहा कि फैसले से परिवार संतुष्ट है और संविधान पर भरोसा रखता है। कानून से बढ़कर कोई भी नहीं है।

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