कानपुर के भीषण जाम में तीन घंटे फंसी रही एंबुलेंस, घायल सिपाही ने रास्ते में तोड़ा दम; पिता लगाते रहे रास्ता देने की गुहार
फतेहपुर में सड़क हादसे में घायल सिपाही प्रांशु सचान की एंबुलेंस कानपुर के टाटमिल चौराहे पर करीब तीन घंटे जाम में फंसी रही। हैलट अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

कानपुर,उत्तर प्रदेश। त्योहारों के दौरान बाजारों में उमड़ रही भीड़ और वीवीआईपी आवागमन के बीच कानपुर की यातायात व्यवस्था बदहाल नजर आ रही है। शहर के कई प्रमुख मार्गों और चौराहों पर दिनभर जाम की स्थिति बनी हुई है। गोविंदपुरी, टाटमिल और दादानगर पुल समेत कई इलाकों में वाहन रेंगते नजर आए। हैरानी की बात यह है कि यातायात माह चलने के बावजूद कई व्यस्त चौराहों पर पर्याप्त ट्रैफिक पुलिसकर्मी दिखाई नहीं दिए। इस अव्यवस्था के बीच एक ऐसा दर्दनाक मामला सामने आया, जिसने यातायात प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। फतेहपुर में सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल एक युवा सिपाही को लेकर कानपुर आ रही एंबुलेंस करीब तीन घंटे तक जाम में फंसी रही। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
जानकारी के अनुसार, घाटमपुर थाना क्षेत्र के मोतीपुर गांव निवासी किसान प्रमोद सचान का 22 वर्षीय बेटा प्रांशु सचान वर्ष 2025 बैच का पुलिसकर्मी था। उसकी तैनाती अंबेडकरनगर जिले की डांडा कोतवाली में थी। हादसे के समय वह अपने पिता के साथ बाइक से जा रहा था। प्रमोद सचान के मुताबिक, दोनों बक्सर मोड़ के पास पहुंचे ही थे कि पीछे से तेज रफ्तार में आए एक डंपर ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि पिता-पुत्र सड़क पर दूर जा गिरे। बाइक पर पीछे बैठा प्रांशु डंपर के पहिये की चपेट में आ गया और गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि उसके पिता को मामूली चोटें आईं।
हादसे के बाद डंपर चालक मौके से फरार हो गया। दुर्घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। स्थानीय पुलिस ने दोनों घायलों को नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने प्रांशु की गंभीर हालत को देखते हुए उसे कानपुर के हैलट अस्पताल रेफर कर दिया। इसके बाद उसे एंबुलेंस से कानपुर ले जाया जाने लगा।
लेकिन कानपुर पहुंचते ही एंबुलेंस टाटमिल चौराहे पर लगे भीषण जाम में फंस गई। परिजनों के अनुसार, एंबुलेंस करीब तीन घंटे तक जाम में फंसी रही। अपने घायल बेटे को जल्द अस्पताल पहुंचाने की बेचैनी में पिता प्रमोद सचान कभी राहगीरों के सामने हाथ जोड़कर रास्ता देने की गुहार लगाते रहे तो कभी मौके पर मौजूद ट्रैफिक पुलिसकर्मियों से मदद मांगते रहे। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने भी एंबुलेंस को जाम से निकालने का प्रयास किया, लेकिन वाहनों की लंबी कतारों के कारण उसे रास्ता नहीं मिल सका।
काफी मशक्कत के बाद जब एंबुलेंस हैलट अस्पताल पहुंची तो पिता को उम्मीद थी कि डॉक्टर उनके बेटे की जान बचा लेंगे। लेकिन अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच के बाद प्रांशु को मृत घोषित कर दिया। बेटे की मौत की खबर सुनते ही पिता बदहवास हो गए और अस्पताल परिसर में ही फूट-फूटकर रोने लगे। परिवार के इकलौते बेटे को खोने का सदमा पूरे परिवार पर टूट पड़ा। सूचना मिलने पर परिजन भी अस्पताल पहुंच गए, जहां चीख-पुकार मच गई।
परिजनों के मुताबिक, एंबुलेंस को समय पर रास्ता नहीं मिल पाने के कारण अस्पताल पहुंचने में काफी देरी हुई। इस घटना ने शहर की यातायात व्यवस्था और आपातकालीन वाहनों को रास्ता उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, सिपाही की मौत के कारणों और उपचार में हुई देरी की भूमिका का आधिकारिक आकलन जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। उधर, डंपर चालक की तलाश और सड़क हादसे से जुड़े मामले में पुलिस कार्रवाई जारी है।
त्योहारों के दौरान शहर में बढ़ते यातायात दबाव के बीच यह घटना एक बड़ा सवाल छोड़ गई है कि जब किसी की जिंदगी बचाने के लिए एंबुलेंस को तत्काल रास्ते की जरूरत हो, तब जाम से निपटने और ग्रीन कॉरिडोर जैसी व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है।




