महाराष्ट्र में ट्रैफिक चालान पर 20 फीसदी की छूट, अभय योजना-2026 को कैबिनेट की मंजूरी; पालघर में बनेंगे तीन ग्राम न्यायालय

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को साप्ताहिक कैबिनेट बैठक की। इसमें महाराष्ट्र में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों , नियम तोड़ने वालों और समय पर फाइन न भरने वालों को सरकार ने बड़ी राहत दी है। सरकार ने ऐसे गाड़ी चालकों को एकमुश्त फाइन भरने पर 20 प्रतिशत की छूट देने के लिए अभय योजना लागू करने का ऐलान किया है।

मुंबई,एजेंसी। महाराष्ट्र सरकार ने ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने और लंबे समय से ई-चालान का जुर्माना नहीं भरने वाले वाहन चालकों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में ‘महाराष्ट्र ट्रैफिक पुलिस चालान अभय योजना-2026’ को मंजूरी दे दी गई। इसके तहत पात्र वाहन चालकों को बकाया चालान का एकमुश्त भुगतान करने पर 20 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। सरकार ने इस योजना को तीन चरणों में लागू करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही कैबिनेट ने मुंबई के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट को संपत्ति खरीद पर स्टाम्प ड्यूटी से छूट देने सहित कई अन्य महत्वपूर्ण फैसलों को भी मंजूरी दी है।

महाराष्ट्र में मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों और मालिकों से जुर्माना वसूला जाता है। इसके लिए 30 जनवरी 2019 से राज्य में ‘वन स्टेट वन चालान’ व्यवस्था शुरू की गई थी। इसके माध्यम से ई-चालान जारी कर वाहन चालकों के मोबाइल फोन पर जुर्माने की सूचना भेजी जाती है। हालांकि, लगातार प्रयासों के बावजूद बड़ी संख्या में चालान की राशि बकाया है। इसी बकाया राशि की वसूली और लोगों को यातायात नियमों के पालन के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार ने अभय योजना लागू करने का निर्णय लिया है।

योजना के पहले चरण में 21 जनवरी 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक जारी किए गए और वसूली के लिए लंबित पात्र चालानों पर कुल बकाया जुर्माना राशि में 20 प्रतिशत तक की एकमुश्त छूट दी जाएगी। इस छूट का लाभ लेने के लिए 30 दिनों की अवधि निर्धारित की गई है। दूसरे चरण के तहत 1 नवंबर 2026 के बाद जारी होने वाले चालानों पर वाहन मालिक को चालान जारी होने की तारीख से 45 दिनों के भीतर जुर्माना जमा करना होगा। निर्धारित समय में भुगतान करने पर 20 प्रतिशत की अर्ली पेमेंट छूट मिलेगी। इस व्यवस्था की अवधि एक वर्ष रखी गई है।

तीसरे चरण में 30 जनवरी 2019 से 20 जनवरी 2026 तक जारी किए गए ऐसे पात्र चालानों को शामिल किया गया है, जिनकी वसूली के लिए मामला अदालत में दाखिल किया जा चुका है। ऐसे चालानों के बकाया जुर्माने पर भी 20 प्रतिशत तक की एकमुश्त छूट दी जाएगी। इस चरण में छूट का लाभ लेने के लिए 30 दिनों का समय निर्धारित किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अभय योजना की समयसीमा समाप्त होने के बाद बार-बार यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करना, वाहन से जुड़े लेन-देन पर रोक लगाना और वाहन जब्त करने जैसी कार्रवाई शामिल हो सकती है। यह कार्रवाई केंद्रीय मोटर वाहन नियमों और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप की जाएगी।

मंत्रिमंडल की बैठक में मुंबई के प्रभादेवी स्थित श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट को भी बड़ी राहत दी गई। सरकार ने मंदिर ट्रस्ट द्वारा मंदिर से सटी ‘राम मेंशन’ इमारत की खरीद पर लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी माफ करने का फैसला किया है। मंदिर परिसर के विस्तार और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बेहतर बनाने के उद्देश्य से ट्रस्ट ने राम मेंशन कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी की संपत्ति खरीदी है। लगभग 708 वर्ग मीटर क्षेत्र में स्थित इस संपत्ति में 13 फ्लैट और सात व्यावसायिक इकाइयां शामिल हैं। इन 20 संपत्तियों की खरीद के लिए 94 करोड़ 11 लाख 65 हजार 550 रुपये की राशि मंजूर की गई है।

इस संपत्ति का उपयोग मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कतार प्रबंधन, प्रसादालय, रसोईघर, यात्री निवास और पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित करने में किया जाएगा। इस खरीद सौदे पर लगभग 2 करोड़ 32 लाख 38 हजार 700 रुपये स्टाम्प ड्यूटी देय थी, जिसे मंत्रिमंडल ने माफ करने की मंजूरी दे दी। सरकार के इस फैसले से मंदिर परिसर में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का रास्ता आसान होगा।

पालघर जिले में न्यायिक सुविधाओं को गांवों तक पहुंचाने के उद्देश्य से तीन ग्राम न्यायालय स्थापित करने को भी मंजूरी दी गई है। ये न्यायालय तलासरी, मोखाडा और विक्रमगढ़ में स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक ग्राम न्यायालय के लिए पांच पदों के हिसाब से कुल 15 सहायक पदों को स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके अलावा नांदेड़ जिले के मुखेड में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) न्यायालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। यह न्यायालय पहले से स्वीकृत लिंक कोर्ट यानी अतिरिक्त न्यायालय के स्थान पर काम करेगा।

कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और आधुनिक सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए नागपुर स्थित डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ के अंतर्गत आने वाले कृषि महाविद्यालय की जमीन पर अंतरराष्ट्रीय कृषि सुविधा केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। इस परियोजना के लिए 644.63 करोड़ रुपये की लागत स्वीकृत की गई है। इससे कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, सुविधाओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर की गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

मंत्रिमंडल ने सहकारी संस्थाओं के प्रशासन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए। श्रेणी-ए में आने वाली 18 सहकारी संस्थाओं का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद उनमें प्रशासक नियुक्त नहीं करने का फैसला किया गया है। वहीं, 500 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक कारोबार वाली सहकारी संस्थाओं के निदेशक मंडल में पांच नामित सदस्यों की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है। इनमें एक सरकारी अधिकारी और संस्था के कामकाज का अनुभव रखने वाले चार सदस्य शामिल होंगे। सरकारी अधिकारी को मतदान का अधिकार नहीं होगा, जबकि अन्य चार नामित सदस्यों को निदेशक मंडल में मतदान का अधिकार मिलेगा। हालांकि, ये सदस्य संस्था के भीतर किसी पदाधिकारी पद के लिए चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। यह संशोधन जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों पर लागू नहीं होगा।

सरकार के इन फैसलों में जहां एक ओर वाहन चालकों को बकाया चालान पर राहत देने और मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक ढांचे, कृषि विकास और सहकारी संस्थाओं की व्यवस्था में बदलाव से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी मिली है।

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