कराची के पास चरना द्वीप पर लश्कर आतंकियों को कमांडो ट्रेनिंग देने का दावा, समुद्री हमले की आशंका से भारत की बढ़ी चिंता
चरना द्वीप बलूचिस्तान और सिंध प्रांत की सीमा के पास कराची से 9 किलोमीटर दूर मुबारक गांव के पास स्थित है। ये एक निर्जन स्थान है जो अब जो स्कूबा डाइविंग, स्नोर्कलिंग के लिए प्रसिद्ध हो गया है। यहां लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन 'पाकिस्तानी मरकज़ी मुस्लिम लीग' के आतंकियों को समुद्री ट्रेनिंग दी जा रही है।

इस्लामाबाद,एजेंसी। पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों को कराची के पास अरब सागर में स्थित चरना द्वीप पर कमांडो ट्रेनिंग दिए जाने का दावा सामने आया है। ‘रेजोनेंट न्यूज’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा के कथित प्रॉक्सी संगठन पाकिस्तानी मरकजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) से जुड़े लोगों को द्वीप के आसपास स्कूबा डाइविंग करते देखा गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आतंकियों को समुद्र के भीतर गतिविधियों और कमांडो शैली के प्रशिक्षण से जुड़ी गतिविधियों में शामिल किया जा रहा है। इस रिपोर्ट ने एक बार फिर भारत की समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है और यह सवाल खड़ा किया है कि कहीं पाकिस्तान में आतंकियों को 26/11 जैसे किसी समुद्री हमले की तैयारी तो नहीं कराई जा रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
चरना द्वीप को चूर्णा और छरना द्वीप के नाम से भी जाना जाता है। यह पाकिस्तान के कराची शहर से पश्चिम दिशा में अरब सागर में स्थित है। हब नदी के मुहाने से करीब नौ किलोमीटर दूर और बलूचिस्तान तथा सिंध प्रांत की सीमा के पास स्थित यह द्वीप मुबारक गांव के निकट है। निर्जन होने के बावजूद यह स्थान स्कूबा डाइविंग और स्नोर्कलिंग जैसी समुद्री गतिविधियों के लिए लोकप्रिय है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इसी पर्यटन गतिविधि की आड़ में कथित तौर पर आतंकियों को समुद्री प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, आतंकियों को स्कूबा डाइविंग के साथ कॉम्बैट स्विमिंग यानी पानी के भीतर सैन्य गतिविधियों का प्रशिक्षण दिए जाने की आशंका है। सुरक्षा से जुड़े दावों में कहा गया है कि इस तरह का प्रशिक्षण समुद्री निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने के उद्देश्य से दिया जा सकता है। लश्कर-ए-तैयबा की एक कथित समुद्री शाखा का भी उल्लेख किया गया है, जिसे ‘दावा मरीन विंग’ या ‘सदा-ए-हुर्रियत’ के नाम से संबोधित किए जाने का दावा है। हालांकि, इस संगठन की गतिविधियों और मौजूदा प्रशिक्षण के बारे में सामने आई जानकारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
विशेषज्ञों की चिंता है कि यदि आतंकियों को समुद्र के भीतर गोपनीय गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, तो इससे भारत के समुद्री तटों और महत्वपूर्ण बंदरगाहों की सुरक्षा के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है। मुंबई, गुजरात और कोच्चि जैसे तटीय क्षेत्रों के अलावा नौसैनिक प्रतिष्ठानों, व्यापारिक जहाजों और बंदरगाहों की सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा सकती है। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि पानी के भीतर काम करने की क्षमता का इस्तेमाल समुद्री प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने या सुरक्षा घेरे में सेंध लगाने के लिए किया जा सकता है।
चरना द्वीप को कथित प्रशिक्षण स्थल के रूप में चुने जाने के पीछे उसकी भौगोलिक स्थिति को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। यह कराची बंदरगाह और पाकिस्तानी नौसैनिक गतिविधियों वाले क्षेत्र के अपेक्षाकृत निकट है। द्वीप पर पर्यटकों की आवाजाही के कारण सामान्य समुद्री गतिविधियों और संदिग्ध गतिविधियों के बीच अंतर करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसके अलावा, यहां का पथरीला भूभाग, गहरी चट्टानें और समुद्र की कठिन परिस्थितियां किसी भी प्रकार के समुद्री प्रशिक्षण के लिए अनुकूल मानी जा सकती हैं।
रिपोर्ट में यह भी आशंका जताई गई है कि कठिन समुद्री परिस्थितियों में प्रशिक्षण लेने से प्रशिक्षित लोग रात के समय और खराब मौसम के दौरान भी समुद्र में गतिविधियां करने में सक्षम हो सकते हैं। हालांकि, किसी संभावित हमले की योजना, उसके लक्ष्य या प्रशिक्षण के वास्तविक उद्देश्य को लेकर अभी कोई ठोस सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है।
पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकियों को समुद्री कमांडो प्रशिक्षण दिए जाने के दावे ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले की यादें ताजा कर दी हैं। उस हमले में आतंकियों ने समुद्री रास्ते से मुंबई पहुंचकर बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। ऐसे में चरना द्वीप से जुड़ी रिपोर्ट को भारत की समुद्री सुरक्षा के लिहाज से गंभीरता से देखे जाने की जरूरत है। हालांकि, फिलहाल यह मामला मीडिया रिपोर्ट में किए गए दावों और आशंकाओं पर आधारित है, जिनकी पुष्टि संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की जांच और आधिकारिक जानकारी से ही हो सकेगी।




