‘थाने में खड़ी गाड़ियों को जर्जर होने से पहले मालिकों को सौंपे’, सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों को निर्देश दिया है कि पुलिस थानों में जब्त वाहनों को जर्जर होने से बचाने के लिए मालिकों को समय पर सौंप दिया जाए।

नई दिल्ली/एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस थानों में लंबे समय से खड़े जब्त वाहनों को जर्जर होने से बचाने के लिए अदालतों को महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि छोटी-बड़ी गाड़ियों को अनावश्यक रूप से थानों में खड़ा रखने के बजाय, वाहन मालिकों की ओर से अंतरिम कस्टडी की अर्जी आने पर अदालतों को उचित शर्तों के साथ मामले में तेजी से कार्रवाई करनी चाहिए। अदालत ने कहा कि थानों में लंबे समय तक खड़े रहने से वाहनों का न केवल उपयोगी स्थान घिरता है, बल्कि समय के साथ उनके कल-पुर्जे भी खराब होने या गायब होने का खतरा बना रहता है।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्र और जस्टिस चंद्रशेखर की पीठ ने शराब के अवैध कारोबार में इस्तेमाल किए गए एक ट्रक को अंतरिम कस्टडी में दिए जाने के आदेश के दौरान यह टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि जब्त वाहन को लंबे समय तक थाने के बाहर खड़ा रखने से किसी का कोई लाभ नहीं होता। वाहन के मामले में मुकदमे के दौरान यदि उसकी जरूरत पड़ती है तो अदालत संबंधित वाहन के संबंध में पूछताछ कर सकती है। ऐसे में वाहन को सुरक्षित रखने के साथ उसके संबंध में आवश्यक साक्ष्य भी संरक्षित किए जाने चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वाहन जब्त किए जाने के बाद उसे लंबे समय तक खुले में या थाने के परिसर में खड़ा रखने की व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है। मौसम और अन्य परिस्थितियों के कारण वाहन लगातार खराब होते रहते हैं। इसके अलावा थानों में जगह की कमी की समस्या भी बढ़ती है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि जब्त वाहनों को केवल इस आधार पर लंबे समय तक खड़ा रखना उचित नहीं है कि मुकदमे के दौरान कभी उनकी आवश्यकता पड़ सकती है।
पीठ ने कहा कि वाहन की पहचान और उससे जुड़े साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए उसके फोटो और वीडियो बनाए जा सकते हैं। इस तरह वाहन की स्थिति, उसकी पहचान और उससे संबंधित महत्वपूर्ण विवरण रिकॉर्ड में सुरक्षित रहेंगे। मुकदमे के दौरान आवश्यकता पड़ने पर इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अदालत वाहन से संबंधित तथ्यों की पड़ताल कर सकती है। इस व्यवस्था से वाहन को वर्षों तक थाने में खड़ा रखने की आवश्यकता भी कम हो सकती है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि वाहन मालिक की ओर से अंतरिम कस्टडी के लिए आवेदन आने पर संबंधित अदालतों को मामले पर शीघ्रता से विचार करना चाहिए। हालांकि वाहन सौंपने से पहले अदालत आवश्यक शर्तें निर्धारित कर सकती है, ताकि मुकदमे के दौरान वाहन की उपलब्धता सुनिश्चित रहे और उससे जुड़े साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो। इस प्रक्रिया का उद्देश्य जब्त वाहनों को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक थानों में पड़े रहने से बचाना है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वाहनों को लंबे समय तक निष्क्रिय अवस्था में रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होता। समय बीतने के साथ वाहन की हालत खराब होती जाती है और उसकी कीमत भी प्रभावित होती है। ऐसे में अंतरिम कस्टडी की व्यवस्था के माध्यम से वाहन को सुरक्षित रखने के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया की आवश्यकताओं को भी पूरा किया जा सकता है।
शीर्ष अदालत की इस टिप्पणी को देशभर के पुलिस थानों में लंबे समय से खड़े जब्त वाहनों की समस्या के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई मामलों में जब्त वाहन वर्षों तक खुले में खड़े रहते हैं और धीरे-धीरे खराब हो जाते हैं। ऐसे वाहनों के रखरखाव के लिए पुलिस और प्रशासन के सामने भी व्यावहारिक कठिनाइयां रहती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि साक्ष्यों को संरक्षित रखते हुए वाहनों के संबंध में समयबद्ध तरीके से निर्णय लेना अधिक उचित व्यवस्था है।
अदालत के निर्देश का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी मामले में जब्त वाहन न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा होने के बावजूद अनिश्चितकाल तक थानों में खड़े न रहें। वाहन के फोटो और वीडियो जैसे साक्ष्य सुरक्षित रखने तथा उचित शर्तों के साथ अंतरिम कस्टडी देने से एक ओर मुकदमे के लिए जरूरी साक्ष्य संरक्षित रहेंगे, वहीं दूसरी ओर वाहनों के जर्जर होने और पुलिस परिसरों में अनावश्यक रूप से जगह घेरने की समस्या से भी राहत मिल सकेगी।




