कॉकरोच जनता पार्टी में पड़ी फूट, अभिजीत दिपके के साथी मनीष ब्रह्मभट्ट ने लॉन्च की सीजेपी-डेमोक्रेटिक
मनीष ब्रह्मभट्ट का सफर 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने से लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ आंदोलन के सक्रिय कार्यकर्ता और अब ‘कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक’ के गठन तक पहुंचा है।

अहमदाबाद/एजेंसी। गुजरात से ताल्लुक रखने वाले मनीष ब्रह्मभट्ट इन दिनों ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के भीतर चल रहे विवाद को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने गुरुवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक’ की घोषणा कर संगठन की मौजूदा राष्ट्रीय नेतृत्व व्यवस्था को चुनौती दी है। ब्रह्मभट्ट का कहना है कि जिस आंदोलन को देशभर के स्वयंसेवकों और जमीनी कार्यकर्ताओं ने खड़ा किया, उसके भविष्य से जुड़े फैसलों में उन्हीं कार्यकर्ताओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने अभिजीत दिपके के खिलाफ मोर्चा खोला है।
हालांकि, मनीष ब्रह्मभट्ट की राजनीति में यह पहली सक्रियता नहीं है। वह वर्ष 2022 में गुजरात की पालनपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ चुके हैं। विधानसभा चुनाव में उन्हें 964 वोट मिले थे और वह पांचवें स्थान पर रहे थे। इस सीट पर भाजपा के अनिकेत गिरीशभाई ठाकर ने 95,588 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी।
चुनावी हलफनामे के मुताबिक, वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान ब्रह्मभट्ट की उम्र 37 वर्ष थी और वह प्रबंधन सलाहकार के तौर पर कार्यरत थे। उन्होंने हेमचंद्राचार्य उत्तर गुजरात विश्वविद्यालय से बीकॉम और एलएलबी की पढ़ाई की थी। हलफनामे में उनकी घोषित संपत्ति करीब 44.42 लाख रुपये बताई गई थी, जबकि उनके ऊपर किसी तरह की देनदारी नहीं होने की जानकारी दी गई थी।
ब्रह्मभट्ट के चुनावी हलफनामे में उनके खिलाफ चार लंबित आपराधिक मामलों का भी उल्लेख किया गया था। इनमें भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत गंभीर चोट पहुंचाने, समूहों के बीच दुश्मनी या नफरत फैलाने वाले बयान, उकसावे, दंगा भड़काने, मानहानि संबंधी सामग्री प्रकाशित करने तथा ऐसी सामग्री की बिक्री से जुड़े आरोप शामिल थे।
वर्ष 2022 के चुनाव के बाद ब्रह्मभट्ट कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े छात्र नेतृत्व वाले आंदोलन में सक्रिय हुए। उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए संगठन के नेतृत्व वाले प्रदर्शन में भी हिस्सा लिया। ब्रह्मभट्ट का दावा है कि आंदोलन की शुरुआती सफलता किसी एक व्यक्ति की वजह से नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों और जमीनी कार्यकर्ताओं के सामूहिक प्रयास से मिली थी। उनका कहना है कि आंदोलन को देश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों का समर्थन मिला और सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने इसे मजबूत करने में भूमिका निभाई।
इसी बीच अगस्त में ब्रह्मभट्ट गुजरात से छत्रपति संभाजीनगर पहुंचे थे, जहां अभिजीत दिपके कोर टीम की बैठक कर रहे थे। ब्रह्मभट्ट और उनके साथी कार्यकर्ता राहुल पांड्या ने दिपके के घर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था। दोनों कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि आंदोलन को जमीन पर मजबूत करने वाले लोगों को संगठन के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में शामिल नहीं किया जा रहा है।
ब्रह्मभट्ट के मुताबिक, जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन से करीब 450 समन्वयक जुड़े थे। उनका आरोप है कि संगठन की नई राष्ट्रीय नेतृत्व व्यवस्था में इन जमीनी कार्यकर्ताओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। अगस्त में राष्ट्रीय नेतृत्व की घोषणा के बाद यह विवाद और गहरा गया। अभिजीत दिपके को राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया, जबकि सौरव दास और आशुतोष रंका को सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई।
ब्रह्मभट्ट का आरोप है कि जिस आंदोलन को खड़ा करने और उसे देशव्यापी स्वरूप देने में सैकड़ों जमीनी कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों ने योगदान दिया, उसी संगठन के भविष्य से जुड़े फैसलों में उन्हें दरकिनार कर दिया गया। उनका कहना है कि आंदोलन की मूल भावना में सामूहिक भागीदारी और स्वयंसेवकों की भूमिका महत्वपूर्ण थी, लेकिन बाद में संगठन की निर्णय प्रक्रिया कुछ लोगों तक सीमित होती चली गई।
गुरुवार को ब्रह्मभट्ट ने इसी विवाद के बीच ‘कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक’ की घोषणा की। उन्होंने आरोप लगाया कि मूल आंदोलन देशव्यापी था और उसकी सफलता में आम लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। ब्रह्मभट्ट के मुताबिक, आंदोलन के सफल होने के बाद उसे उसके मूल स्वरूप से अलग कर दिया गया और उसका राजनीतिकरण कर दिया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कॉकरोच जनता पार्टी अब ‘टीम केजरीवाल’ में बदल गई है। ब्रह्मभट्ट का दावा है कि अभिजीत दिपके और उनके सहयोगियों ने स्वयंसेवकों से पर्याप्त सलाह किए बिना 12 सदस्यों की टीम का गठन किया। उनका आरोप है कि इनमें से आठ सदस्यों के आम आदमी पार्टी से संबंध रहे हैं और वे दिपके के मित्र या कॉलेज के सहपाठी भी रहे हैं। ब्रह्मभट्ट ने इन आरोपों के आधार पर संगठन की मौजूदा कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
मनीष ब्रह्मभट्ट की ओर से नए संगठन की घोषणा ऐसे समय की गई है, जब कॉकरोच जनता पार्टी के भीतर नेतृत्व और प्रतिनिधित्व को लेकर मतभेद सामने आए हैं। एक ओर मौजूदा नेतृत्व संगठन को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, वहीं ब्रह्मभट्ट जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका और भागीदारी का मुद्दा उठाकर अलग मंच बनाने की दिशा में आगे बढ़े हैं।
अब ब्रह्मभट्ट की ओर से घोषित कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक को कितना समर्थन मिलता है और यह नया राजनीतिक मंच मूल संगठन के सामने कितनी बड़ी चुनौती बन पाता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल संगठन के भीतर नेतृत्व, प्रतिनिधित्व और आंदोलन की मूल भावना को लेकर छिड़ा विवाद राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।




