शौचालय से सेमीकंडक्टर तक बदली भारत की विकास यात्रा, स्वतंत्रता दिवस के भाषणों में दिखी नई प्राथमिकताएं
प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषणों से भारत की विकास यात्रा का पता चलता है, जो बुनियादी सुविधाओं से लेकर उन्नत तकनीक तक फैली है।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषणों में पिछले एक दशक के दौरान भारत की बदलती विकास प्राथमिकताओं और बढ़ती महत्वाकांक्षाओं की झलक दिखाई देती है। शुरुआती वर्षों में शौचालय, बिजली, सड़क, बैंक खाते, गरीबी और किसानों जैसी बुनियादी जरूरतें प्रमुख मुद्दे थीं, जबकि अब चर्चा सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, रोबोटिक्स, अंतरिक्ष, 6जी और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों तक पहुंच गई है।
2014 के आसपास प्रधानमंत्री के भाषणों में महिलाओं की गरिमा, खुले में शौच, ग्रामीण विद्युतीकरण, बैंकिंग सुविधा और गरीबी जैसी समस्याओं पर विशेष जोर था। इसके बाद बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के साथ तकनीकी क्षमता, विनिर्माण और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका मजबूत करने पर जोर बढ़ता गया।
2014 में महिलाओं की गरिमा और खुले में शौच की समस्या को प्रमुखता से उठाया गया था। वहीं अब भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत भागीदारी की बात हो रही है। ग्रामीण सड़कों और बुनियादी ढांचे से शुरू हुई प्राथमिकताएं आगे चलकर चंद्रयान, गगनयान और अंतरिक्ष स्टेशन जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं तक पहुंचीं। 2026 के भाषण में एआई, क्वांटम तकनीक, रोबोटिक्स और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों को भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
गरीबी के मुद्दे पर भी प्राथमिकता का दायरा बदला है। 2014 में गरीबी को देश की प्रमुख चुनौतियों में शामिल करते हुए इसे खत्म करने का संकल्प जताया गया था, जबकि अब विकास के साथ सामाजिक सुरक्षा की पहुंच पर जोर दिया जा रहा है। 2026 के भाषण में सामाजिक सुरक्षा के दायरे में विस्तार का दावा करते हुए इसे विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने से जोड़ा गया।
महिलाओं से जुड़े मुद्दों में भी बदलाव दिखाई देता है। शुरुआती वर्षों में महिलाओं के लिए शौचालय और सम्मानजनक जीवन जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रमुख थीं, वहीं बाद के वर्षों में सशस्त्र बलों में महिलाओं की भूमिका और लोकसभा तथा विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण जैसे विषय सामने आए। किसानों के संदर्भ में भी चर्चा कर्ज और कृषि संकट से आगे बढ़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य, रिकॉर्ड कृषि उत्पादन, कृषि निर्यात और वैश्विक बाजार तक पहुंच जैसे विषयों तक पहुंची।
युवाओं और उद्यमिता के क्षेत्र में भी प्राथमिकताएं विस्तृत हुई हैं। ‘स्टार्टअप इंडिया’ के शुरुआती दौर में युवाओं को कारोबार और नवाचार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर था। अब निजी क्षेत्र के स्टार्टअप्स द्वारा उपग्रह और रॉकेट प्रक्षेपण जैसी उपलब्धियों को भारत की नई तकनीकी क्षमता के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। इसी तरह ‘मेक इन इंडिया’ अब केवल उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजाइन, कलपुर्जों और पूरी वैल्यू चेन को देश में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
ऊर्जा और डिजिटल क्षेत्र में भी बदलाव स्पष्ट है। ग्रामीण विद्युतीकरण और बैंक खाते खोलने की प्राथमिकताओं से आगे बढ़कर अब 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता, मेड-इन-इंडिया 6जी और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने जैसे लक्ष्य सामने हैं। बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार से शुरू हुई डिजिटल यात्रा यूपीआई और व्यापक डिजिटल भुगतान तक पहुंची है।
दूरसंचार क्षेत्र में 2015 में ग्रामीण इलाकों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर था। बाद में इंटरनेट और डिजिटल लेनदेन का तेजी से विस्तार हुआ। 2024 में 6जी के लिए मिशन मोड में काम करने की बात कही गई थी और अब भारत को अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीक में अग्रणी बनाने का लक्ष्य सामने है।
प्रधानमंत्री के भाषणों में वामपंथी उग्रवाद और युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का मुद्दा भी लगातार रहा है। शुरुआती वर्षों में माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में हिंसा रोकने और युवाओं को उग्रवाद से दूर रखने पर जोर दिया गया। इसके साथ विकास योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को रणनीति का हिस्सा बनाया गया। बाद के वर्षों में वामपंथी उग्रवाद प्रभावित जिलों की संख्या में कमी का उल्लेख किया गया और 2026 में ऐसे क्षेत्रों में विकास तथा लोकतांत्रिक भागीदारी को नई तस्वीर के रूप में प्रस्तुत किया गया।
कुल मिलाकर, स्वतंत्रता दिवस के भाषणों में दिखाई देने वाला बदलाव भारत की विकास प्राथमिकताओं में व्यापक परिवर्तन को रेखांकित करता है। बुनियादी सुविधाओं, गरीबी और सामाजिक सुरक्षा से शुरू हुई चर्चा अब तकनीकी आत्मनिर्भरता, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, ऊर्जा सुरक्षा और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य तक पहुंच चुकी है।



