राजौरी गार्डन-मायापुरी क्षेत्र में सर्विस रोड पर कथित अवैध पार्किंग और अतिक्रमण से उठे सवाल, जिम्मेदार कौन?

राजौरी गार्डन-मायापुरी क्षेत्र की सर्विस रोड और सतगुरु राम सिंह मार्ग पर कथित अवैध पार्किंग व अतिक्रमण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मार्बल दुकानों, कार शोरूम और बैंक्वेट हॉल के आसपास सार्वजनिक सड़कों पर वाहनों की पार्किंग और सामान फैलाए जाने से यातायात प्रभावित हो रहा है।

राजीव कुमार गौड़/दिल्ली स्टेट हेड

पश्चिमी दिल्ली। राजौरी गार्डन मेट्रो स्टेशन के आसपास दोनों ओर की सर्विस रोड, मायापुरी औद्योगिक क्षेत्र और सतगुरु राम सिंह मार्ग पर कथित अतिक्रमण तथा अवैध पार्किंग की स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाई गई सर्विस रोड के बड़े हिस्से पर वाहनों की पार्किंग और दुकानों का सामान सड़क तक फैलाए जाने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ऐसे में लोगों ने नगर निगम, लोक निर्माण विभाग और दिल्ली यातायात पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं।
राजौरी गार्डन मेट्रो स्टेशन की मुख्य सड़क पर फ्लाईओवर के नीचे तथा उसके आगे सर्विस रोड पर मार्बल और अन्य दुकानों के सामने बड़ी संख्या में वाहनों के खड़े रहने की स्थिति दिखाई देने की बात कही जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कई स्थानों पर दुकानों के बाहर रखा सामान भी सार्वजनिक रास्ते तक पहुंच जाता है, जिससे सड़क की उपलब्ध चौड़ाई कम हो जाती है। इसी तरह मायापुरी क्षेत्र की सड़कों पर कार शोरूम और बैंक्वेट हॉल के आसपास वाहनों की पार्किंग को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि अतिक्रमण और अवैध पार्किंग के खिलाफ संबंधित विभाग समय-समय पर कार्रवाई के दावे करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं देता। लोगों का सवाल है कि यदि कोई आम नागरिक सार्वजनिक सड़क पर वाहन खड़ा करता है या सड़क के हिस्से पर अतिक्रमण करता है तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाती है, फिर लंबे समय तक किसी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पार्किंग और अतिक्रमण की स्थिति बनी रहने पर जिम्मेदारी तय क्यों नहीं होती।
स्थानीय लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि सतगुरु राम सिंह मार्ग अथवा आसपास की सर्विस रोड पर यदि किसी प्रकार की अधिकृत पार्किंग व्यवस्था संचालित की जा रही है तो उसकी अनुमति किस विभाग ने दी है। पार्किंग की अनुमति किस संस्था या एजेंसी के नाम पर है, इसकी अवधि क्या है और इसके लिए निर्धारित नियम एवं शर्तें क्या हैं, इसकी जानकारी सार्वजनिक किए जाने की मांग की जा रही है। यदि वाहनों से पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है तो शुल्क वसूलने वाली एजेंसी कौन है और उससे संबंधित राजस्व का हिसाब किस विभाग के पास दर्ज है, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।
मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि राजौरी गार्डन, मायापुरी और सतगुरु राम सिंह मार्ग का संबंधित सड़क और सर्विस रोड वाला हिस्सा किस विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है। क्षेत्रवासियों की मांग है कि नगर निगम, लोक निर्माण विभाग और दिल्ली यातायात पुलिस अपने-अपने अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट करें और यह बताया जाए कि संबंधित सड़कों पर अतिक्रमण तथा पार्किंग की निगरानी की जिम्मेदारी किस अधिकारी या विभाग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मामला केवल वाहनों के सड़क किनारे खड़े होने तक सीमित नहीं है। यदि सार्वजनिक सड़क का कोई हिस्सा लंबे समय तक पार्किंग अथवा व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हो रहा है, तो इससे पैदल यात्रियों, वाहन चालकों और आसपास के निवासियों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। व्यस्त राजौरी गार्डन-मायापुरी मार्ग पर ऐसी स्थिति यातायात दबाव को भी बढ़ा सकती है।
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित स्थानों का मौके पर निरीक्षण कराया जाए और सर्विस रोड तथा सड़क किनारे मौजूद अतिक्रमण की स्थिति की जांच की जाए। यदि किसी स्थान पर पार्किंग अधिकृत है तो उसकी अनुमति, जिम्मेदार एजेंसी और नियमों की जानकारी सार्वजनिक की जाए। वहीं यदि जांच में अनधिकृत पार्किंग, अतिक्रमण या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के साथ-साथ निगरानी में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी तय की जाए।
लोगों का कहना है कि सार्वजनिक सड़कों और सर्विस रोड का इस्तेमाल सभी नागरिकों के लिए समान नियमों के तहत होना चाहिए। किसी प्रभावशाली कारोबारी प्रतिष्ठान, शोरूम या अन्य व्यावसायिक गतिविधि के कारण सड़क का सार्वजनिक उपयोग प्रभावित नहीं होना चाहिए। इसके लिए नियमित निरीक्षण और प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।
फिलहाल क्षेत्रवासियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजौरी गार्डन मेट्रो स्टेशन से लेकर मायापुरी औद्योगिक क्षेत्र और सतगुरु राम सिंह मार्ग तक कथित पार्किंग तथा अतिक्रमण की स्थिति पर निगरानी की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है और अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाएं, ताकि सार्वजनिक सड़क के इस्तेमाल को लेकर बनी शंकाएं दूर हो सकें और जिम्मेदारी भी स्पष्ट हो सके। सवाल अब केवल पार्किंग का नहीं, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति के इस्तेमाल और प्रशासनिक जवाबदेही का भी है।

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