रामायण रिसर्च काउंसिल के तत्वावधान में ‘रामायणी सम्मान’ का भव्य आयोजन, 28 हस्तियां सम्मानित

काशी हिंदू विश्वविद्यालय में गोस्वामी तुलसीदास जयंती के अवसर पर रामायण रिसर्च काउंसिल द्वारा ‘रामायणी सम्मान’ समारोह आयोजित किया गया। समारोह में रामायण, भारतीय संस्कृति, साहित्य और सामाजिक क्षेत्र में योगदान देने वाली देशभर की 28 हस्तियों को सम्मानित किया गया। अनुप जलोटा ने श्रीराम के भजनों की प्रस्तुति दी।

वाराणसी/उत्तर प्रदेश। गोस्वामी तुलसीदास जयंती के पावन अवसर पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में रामायण रिसर्च काउंसिल के तत्वावधान में ‘रामायणी सम्मान’ समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देशभर की 28 प्रतिष्ठित हस्तियों को रामायण, भारतीय संस्कृति, साहित्य, अध्यात्म और सामाजिक क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में रामायण से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने और उनके योगदान को समाज के सामने लाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। चयन समिति के सदस्य एवं काउंसिल के ट्रस्टी डॉ. भारत नागर ने सम्मान चयन प्रक्रिया की जानकारी देते हुए कहा कि श्रीराम, सीतामाता और रामायण के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों तक पहुंचने के लिए काउंसिल की ओर से पूरे वर्ष प्रत्येक जिले में विशेष अभियान चलाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य ऐसे लोगों के योगदान की पहचान कर उन्हें सम्मान और प्रोत्साहन देना है, ताकि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा मिल सके तथा भारतीय संस्कृति और रामायण की परंपरा का संदेश विश्वभर में पहुंचाया जा सके।
नैनीताल-ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड के सांसद एवं काउंसिल के अध्यक्ष ने कहा कि देश में रामायण साहित्य, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय हित के क्षेत्र में अनेक प्रतिभाएं कार्य कर रही हैं। ऐसी प्रतिभाओं को उचित मंच और पहचान प्रदान करना आवश्यक है।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा से सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देना बेहद जरूरी है। युवाओं को सही दिशा और सकारात्मक सोच देने के लिए ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत चतुर्वेदी ने ‘रामायणी सम्मान’ के आयोजन को गौरव का विषय बताया। उन्होंने ऐसे आयोजनों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और रामायण की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
समारोह में भजन सम्राट एवं पद्मश्री से सम्मानित अनुप जलोटा को भी ‘रामायणी सम्मान’ से सम्मानित किया गया। उन्होंने भगवान श्रीराम के प्रति समर्पित भजन प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया।
रामायण रिसर्च काउंसिल के ट्रस्टी एवं ‘रामायणी सम्मान’ के संयोजक देवदत्त शर्मा, सेवानिवृत्त आईएएस, ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य उन व्यक्तियों को सम्मानित करना है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। कार्यक्रम का संचालन पीतांबर मिश्रा ने किया।
समारोह में महर्षि योगी मधुसूदन, संस्थापक महर्षि योग आश्रम, कंकाल, हरिद्वार, पद्मश्री आचार्य डॉ. हरिहर कृपालु त्रिपाठी महाराज, पूर्व अध्यक्ष श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट, पद्मभूषण प्रो. डॉ. देवी प्रसाद द्विवेदी, ज्योतिषाचार्य प्रो. चंद्रमौली उपाध्याय, विश्व भूषण मिश्रा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट सहित अनेक विद्वान और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
‘रामायणी सम्मान’ से अनुप जलोटा, अनुराधा पौडवाल, आर.के. सिन्हा, किशोर कुणाल (मरणोपरांत), डॉ. अर्चना प्रकाश, भगवान दास, डॉ. उदय प्रताप सिंह, डॉ. अवधिहारी, योगेश्वर प्रसाद देवरानी, आदित्य जैन, अभय मानके, संत हरिओम, नरेंद्रनाथ गगन, योगेश चंद्र शर्मा ‘योगी’, संजीव कुमार, डॉ. आशा ओझा, मडुगुल्ला प्रफुल्ला, विनोद कुमार तिवारी, डॉ. चंद्र प्रभा मदान, आचार्य संतोष पांडेय, अजय याग्निक, विंध्याचल मणि त्रिपाठी, राजराधे कृष्ण शर्मा, प्रेम प्रकाश दुबे, त्रिलोकी नाथ पांडेय, रामभानी द्विवेदी, डॉ. रविशंकर पांडेय और रेखा मेहरा को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर अजय भट्ट ने बताया कि बिहार के सीतामढ़ी में, जिसे माता सीता की प्रकट स्थली माना जाता है, बिहार सरकार की ओर से श्रीराम-जानकी के प्राचीन स्थल के लिए 12 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित स्थल पर 51 शक्तिपीठों की मिट्टी से अखंड ज्योति स्थापित की जाएगी तथा चतुर्भुजी महालक्ष्मी की प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी।
उन्होंने बताया कि 25 अप्रैल 2026 को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से इस स्थल पर भूमि पूजन किया गया था। कार्यक्रम में इस परियोजना को भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़कर देखा गया। समारोह का समापन सम्मानित अतिथियों, विद्वानों और उपस्थित लोगों के बीच भारतीय संस्कृति, रामायण परंपरा और जनजागरण को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ।

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