आतंकी धमकी के बाद कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को 25 अगस्त की प्रशासनिक छुट्टी, सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह

श्रीनगर/एजेंसी। जम्मू-कश्मीर सरकार ने घाटी में तैनात सैकड़ों कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को 25 अगस्त को प्रशासनिक अवकाश देने का निर्णय लिया है। यह कदम कथित तौर पर आतंकी धमकी के बाद एहतियात के तौर पर उठाया गया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है, जबकि पुलिस ने उन्हें ड्यूटी पर नहीं जाने और घाटी में रहने की स्थिति में अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलने की हिदायत दी है।
सूत्रों के मुताबिक, हाल के दिनों में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक आतंकी संगठन की ओर से कथित तौर पर धमकी भरी हिट लिस्ट जारी की गई थी। इसमें सरकारी विभागों में कार्यरत कई कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के नाम और संपर्क संबंधी विवरण शामिल होने की बात सामने आई है। इनमें बड़ी संख्या में वे कर्मचारी बताए जा रहे हैं, जिनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री के विशेष रोजगार पैकेज के तहत हुई थी।
धमकी भरे पत्र के सामने आने के बाद कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री विशेष रोजगार पैकेज के तहत नियुक्त कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। जिन कर्मचारियों के नाम कथित धमकी पत्र में शामिल थे, उन्हें जम्मू भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस का कहना है कि कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं। घाटी में अल्पसंख्यक समुदाय और कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की मौजूदगी वाले इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के साथ गश्त बढ़ाई गई है। सुरक्षा एजेंसियां भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
गौरतलब है कि कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी और पुनर्वास के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने वर्ष 2010 में प्रधानमंत्री विशेष रोजगार पैकेज शुरू किया था। इसके तहत करीब छह हजार कश्मीरी पंडितों को सरकारी नौकरियां दी गई थीं। वर्ष 2022 में लक्षित हत्याओं की घटनाओं के बाद इस योजना के तहत नियुक्त कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता सामने आई थी।
2022 में आतंकियों की लक्षित हत्याओं में पांच कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की हत्या के बाद कर्मचारियों ने लंबे समय तक प्रदर्शन किया था। उन्होंने घाटी से बाहर जम्मू में स्थानांतरण की मांग की थी। हालांकि, उनकी मांग पूरी तरह स्वीकार नहीं की गई, लेकिन कई कर्मचारियों को श्रीनगर और आसपास के अपेक्षाकृत सुरक्षित क्षेत्रों में तैनाती दी गई थी।
हाल के दिनों में घाटी में आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियां फिर सतर्क हो गई हैं। 22 जुलाई को अनंतनाग में एक पुलिसकर्मी की हत्या और कुलगाम में छत्तीसगढ़ से आए दो प्रवासी मजदूरों की हत्या के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ी है। अधिकारियों के अनुसार, इन घटनाओं के बाद संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी और गश्त बढ़ाई गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों ने घाटी में अभियान चलाकर करीब तीन हजार ऐसे लोगों को हिरासत में लिया है, जिन पर आतंकी संगठनों को किसी न किसी रूप में मदद पहुंचाने का संदेह है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और संभावित खतरे को रोकने के लिए एहतियाती कदम लगातार जारी हैं।




