पिलर टूटने से जर्जर हुआ लखनऊ का एसए अपार्टमेंट, अब पूरी इमारत पर चलेगा बुलडोजर

लखनऊ के एसए अपार्टमेंट पर बुलडोजर एक्शन की तैयारी है। एलडीए की तकनीकी जांच में अपार्टमेंट में गड़बड़ी का खुलासा हुआ है।

लखनऊ,एजेंसी। वजीरगंज थाना क्षेत्र के बारूदखाना स्थित छह मंजिला एसए अपार्टमेंट के मुख्य पिलर के क्षतिग्रस्त होने के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने पूरी इमारत को ध्वस्त करने का निर्णय लिया है। तकनीकी जांच में भवन की संरचना में गंभीर खामियां मिलने और इसे सुरक्षित स्थिति में लाना संभव नहीं पाए जाने के बाद एलडीए की ओर से बिल्डर को नया नोटिस जारी किया जा रहा है। नोटिस में 15 दिन का समय दिया जाएगा। निर्धारित अवधि में स्वयं ध्वस्तीकरण नहीं कराने पर एलडीए की ओर से कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य पिलर क्षतिग्रस्त होने के बाद इमारत में रहने वाले परिवारों को बाहर निकालकर भवन को सुरक्षित किया गया। एलडीए की तकनीकी टीम ने मौके पर जांच के बाद भवन को असुरक्षित माना। फिलहाल इमारत को अचानक ढहने से रोकने के लिए हाइड्रोलिक जैक लगाए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह व्यवस्था अस्थायी सहारे के तौर पर की जा रही है, ताकि तकनीकी कार्रवाई के दौरान किसी तरह की दुर्घटना का खतरा कम किया जा सके।
एलडीए के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार, इस भवन का नक्शा वर्ष 2009 में स्वीकृत कराया गया था। प्राधिकरण के रिकॉर्ड और जांच में निर्माण से जुड़े नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई है। एलडीए का कहना है कि भवन की मौजूदा संरचनात्मक स्थिति को देखते हुए केवल अवैध हिस्से को हटाना या निर्माण को नियमित करना पर्याप्त नहीं होगा, इसलिए पूरी इमारत को हटाने की कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।
एलडीए ने पहले भवन की छत पर बने कथित अवैध पेंटहाउस को हटाने का आदेश दिया था। मुख्य पिलर क्षतिग्रस्त होने के बाद अब पूरी इमारत के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। नए नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद यदि बिल्डर स्वयं भवन नहीं गिराता है तो प्राधिकरण अपनी मशीनरी के माध्यम से ध्वस्तीकरण करेगा।
इमारत को स्थिर करने के लिए तकनीकी टीम द्वारा कई हाइड्रोलिक जैक लगाए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, आवश्यकतानुसार जैकों की संख्या बढ़ाई जाएगी। भवन पूरी तरह सुरक्षित होने के बाद ही फ्लैट मालिकों को अंदर जाकर अपना जरूरी सामान निकालने की अनुमति दी जाएगी। इस प्रक्रिया में समय लगने की संभावना है।
एलडीए की ओर से यह भी कहा गया है कि फ्लैट मालिकों के पुनर्वास और नुकसान की भरपाई से संबंधित जिम्मेदारी को लेकर प्राधिकरण की नीति अलग है। प्राधिकरण के अनुसार, फ्लैट मालिकों को विस्थापित श्रेणी में रखकर वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने का निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में संपत्ति से हुए नुकसान की भरपाई के लिए प्रभावित लोगों को बिल्डर से दावा करना होगा।
मामले में निर्माण की निगरानी और स्वीकृति से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। एलडीए उपाध्यक्ष ने संबंधित जोनल अधिकारी से वर्ष 2009 से निर्माण अवधि के दौरान तैनात अभियंताओं और अधिकारियों की सूची मांगी है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि निर्माण के दौरान नियमों के उल्लंघन पर संबंधित स्तर पर क्या कार्रवाई हुई और यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसकी जवाबदेही तय की जा सके।

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