अलीगढ़ में अनोखी ‘दंडोती कांवड़’ बनी आकर्षण का केंद्र, कीलों की शैय्या पर लेटकर पूरी की 60 किमी यात्रा
अलीगढ़ में इस सावन पर्व पर एक अनोखी कावड़ देखने को मिली है। एक कांवड़िया लोहे की कीले लगें एक लकड़ी के तख्ते पर लेटकर कावड़ यात्रा करता दिखा। इस अनोखी कांवड़ यात्रा को देखकर लोग चकित हैं।

अलीगढ़/उत्तर प्रदेश। सावन माह में शिवभक्ति के विभिन्न रंगों के बीच अलीगढ़ जिले में एक अनोखी ‘दंडोती कांवड़’ इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां एक कांवड़िया चार पहियों वाले प्लेटफॉर्म पर रखी कांवड़ के साथ-साथ कीलों से जड़ी शैय्या पर लेटकर दंडवत करते हुए अपनी कठिन यात्रा पूरी कर रहा है, जिसे देखने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंच रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, अलीगढ़ जिले के जारौठी गांव निवासी संजय ने करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित राजघाट गंगा घाट से गंगाजल लाकर अपने गांव स्थित शिवालय तक पहुंचाने का संकल्प लिया था। विशेष बात यह रही कि उन्होंने यह यात्रा सामान्य तरीके से पैदल न कर, बल्कि कीलों से जड़ी शैय्या पर लेटकर दंडोती करते हुए पूरी की।
यात्रा के दौरान कांवड़ एक अलग प्लेटफॉर्म पर रखी जाती है, जबकि संजय कीलों वाले दूसरे प्लेटफॉर्म पर लेटकर दंडवत करते हैं। जैसे-जैसे कांवड़ आगे बढ़ती है, उनके साथ चल रहा सहयोगी कीलों वाले प्लेटफॉर्म को भी आगे खिसकाता रहता है। कई दिनों तक चली इस कठिन तपस्या को स्थानीय लोग ‘हठ-कांवड़’ के रूप में देख रहे हैं।
कांवड़िया संजय के अनुसार, उनकी इस तपस्या के पीछे परिवार की सुख-समृद्धि, गांव की खुशहाली और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने की भावना है। उन्होंने बताया कि यह यात्रा केवल गंगाजल लाने का माध्यम नहीं, बल्कि शिव के प्रति अपनी अटूट आस्था और भक्ति प्रकट करने का एक प्रयास है।
सोमवार को जब संजय अपनी कांवड़ लेकर गांव पहुंचे, तो ग्रामीणों ने उनका फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने गंगाजल शिवालय में अर्पित कर भगवान शिव का स्मरण किया और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की।
इस अनोखी कांवड़ यात्रा को देखने वाले लोग एक ओर जहां हैरान हैं, वहीं इसे शिवभक्ति की अनूठी मिसाल के रूप में भी देख रहे हैं।




