कसोल ‘रेव पार्टी’ मामले में सख्त रुख, सुप्रीम कोर्ट ने डीसी और एसपी के तबादले के आदेश दिए
हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों को राहत देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के एक आदेश पर रोक लगाई है। इसमें कुल्लू के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारियों के खिलाफ 2025 में वहां रेव पार्टियों की इजाजत देने में उनकी कथित भूमिका के लिए एसआईटी बनाने और प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि उनका ट्रांसफर कर दिया गया है।

कुल्लू/हिमाचल प्रदेश। कुल्लू जिले के कसोल में कथित ‘रेव पार्टी’ मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए डिप्टी कमिश्नर अनुराग सी. शर्मा और पुलिस अधीक्षक मदन लाल के तत्काल तबादले के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले पर मुहर लगाई, जिसमें एसडीएम निशांत कुमार के साथ इन दोनों अधिकारियों के भी तबादले का निर्देश दिया गया था।
मामला 7 से 11 जून के बीच कसोल क्षेत्र में आयोजित कथित रेव पार्टियों से जुड़ा है, जहां बड़े पैमाने पर लोगों की मौजूदगी और नशीले पदार्थों के उपयोग की खबरें सामने आई थीं। आरोप है कि प्रशासन इन गतिविधियों को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहा।
सुप्रीम कोर्ट में अधिकारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि ये कार्यक्रम ‘रेव पार्टी’ नहीं थे और बिना अधिकारियों का पक्ष सुने तबादला, एफआईआर और एसआईटी जांच के आदेश देना उचित नहीं था। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस दलील से असहमति जताई।
पीठ ने एफआईआर और एसआईटी जांच पर फिलहाल रोक लगाने पर सहमति जताई, लेकिन निष्पक्ष विभागीय जांच के लिए संबंधित अधिकारियों का कुल्लू से बाहर तबादला आवश्यक बताया। कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर 10 अगस्त तक जवाब मांगा है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि जब डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) की प्रतिकूल रिपोर्ट के बावजूद ऐसे आयोजनों की अनुमति देने के आरोप हों, तो किसी अधिकारी को विशेष स्थान पर पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है।
यह मामला तब सामने आया जब एक मीडिया रिपोर्ट में ‘मिनी इजराइल’ के नाम से मशहूर कसोल में ‘ग्रीन फॉरेस्ट-I’ और ‘ग्रीन फॉरेस्ट-II’ नामक स्थानों पर बड़े पैमाने पर रेव इवेंट्स आयोजित होने का खुलासा हुआ। इन आयोजनों का व्यापक प्रचार किया गया था और टिकट की कीमत 10,000 से 16,000 रुपये प्रति व्यक्ति बताई गई, जिससे देश-विदेश से हजारों लोग शामिल हुए।
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के निर्देश पर कुल्लू जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में बताया गया कि एसडीएम ने 6 जून को इन आयोजनों की अनुमति दी थी। निरीक्षण के दौरान कोकीन और LSD जैसे मादक पदार्थ बरामद हुए, जिसके बाद दो पर्यटकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। एक रूसी डीजे, डारिया कुज़मिनिख की ड्रग ओवरडोज से मौत की आशंका भी जताई गई।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि आयोजन स्थल पर शराब की बोतलें, सिगरेट के अवशेष, रोलिंग पेपर, अस्थायी कैंप और 4,000 से 5,000 लोगों के ठहरने की व्यवस्थाएं पाई गईं। हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इन आयोजनों को तत्काल रोक दिया गया और दी गई अनुमति रद्द कर दी गई।




