दिल्ली की जेलों में रंगदारी-रिश्वतखोरी का भंडाफोड़, 11 आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच ने जेलों में चल रहे रंगदारी और रिश्वतखोरी के नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें जेल अधिकारी, वार्डर, वकील और निजी व्यक्ति शामिल हैं।

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में जेलों के भीतर चल रहे कथित रंगदारी और रिश्वतखोरी के संगठित नेटवर्क का एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया है कि जेल अधिकारियों, वार्डरों, कैदियों, वकीलों और निजी व्यक्तियों का एक संगठित गिरोह अंडर ट्रायल कैदियों के परिजनों से सुरक्षा, बेहतर सुविधाएं और विशेष व्यवहार दिलाने के नाम पर अवैध वसूली करता था।
एसीबी प्रमुख व जॉइंट सीपी विक्रमजीत सिंह ने बताया कि मामले की शुरुआत 9 फरवरी को मिली एक शिकायत से हुई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि रोहिणी जेल में बंद उसके पिता और भाई की सुरक्षा और सुविधाओं के नाम पर उससे लगातार पैसे मांगे जा रहे थे। शिकायत के आधार पर एसीबी ने ट्रैप लगाकर कार्रवाई की और एफआईआर दर्ज की, जिसमें एक लाख रुपये की रिश्वत बरामद की गई।
प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ कि रोहिणी जेल के वार्डर दिनेश डबास, पंकज कुमार और रवि कुमार, तिहाड़ जेल के हेड वार्डर जोगेंद्र, फरीदाबाद निवासी वकील मनीष और दिल्ली निवासी आशीष राणा इस अवैध वसूली में शामिल थे। इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
आगे की जांच में बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से पता चला कि अवैध वसूली की रकम कई बैंक खातों के माध्यम से भेजी जाती थी और बाद में नकद निकालकर गिरोह के सदस्यों में बांटी जाती थी। साक्ष्यों के आधार पर पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें रोहिणी जेल के सहायक अधीक्षक सुनील कुमार, हेड वार्डर योगेश, वार्डर जगबीर, उत्तर प्रदेश के बागपत निवासी वकील हरेंद्र बंसल और दिल्ली निवासी विप्लव खारी शामिल हैं।
एसीबी के अनुसार, गिरफ्तार 11 आरोपियों में एक सहायक अधीक्षक, छह जेल वार्डर, दो वकील और दो निजी व्यक्ति शामिल हैं। एजेंसी अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान, अवैध लेनदेन के पूरे मनी ट्रेल और साजिश के दायरे की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच जारी है और इसके आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।

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