नर्मदा में अवैध निर्माण पर बड़ी कार्रवाई: ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के पास अधिकारियों के 5 बंगले ढहाए
'स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी' के पास सरकारी अधिकारियों द्वारा सब्सिडी वाले रिहायशी प्लॉट के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया। अब गुजरात प्रशासन द्वारा अपने ही अधिकारियों के खिलाफ की गई सबसे बड़ी कार्रवाई में बदल गया है। नर्मदा ज़िला प्रशासन ने गरुड़ेश्वर में सरकारी ज़मीन पर बने पांच अवैध बंगले गिरा दिए।

अहमदाबाद/एजेंसी। गुजरात के नर्मदा जिले में प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के निकट गरुड़ेश्वर क्षेत्र में बने पांच अवैध स्ट्रक्चर को ध्वस्त कर दिया। ये निर्माण कथित तौर पर वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों द्वारा रियायती दरों पर आवंटित रिहायशी प्लॉट पर नियमों का उल्लंघन कर किए गए थे।
अधिकारियों के अनुसार, ये प्लॉट वर्ष 2019 में तत्कालीन नर्मदा कलेक्टर आर.एस. निनामा के कार्यकाल में 13 अधिकारियों को आवंटित किए गए थे। प्रत्येक 135 वर्ग मीटर के प्लॉट के लिए 37,210 से 50,000 रुपये तक की रियायती कीमत तय की गई थी, जो बाजार मूल्य से काफी कम थी।
प्रशासनिक जांच में सामने आया कि कई अधिकारियों ने आवंटन की शर्तों का उल्लंघन करते हुए निर्धारित समय सीमा में साधारण रिहायशी निर्माण नहीं किया, बल्कि बहुमंजिला और बड़े-बड़े बंगले खड़े कर दिए। इनमें से कुछ में 6 से 12 बेडरूम तक पाए गए और इन्हें कथित तौर पर व्यावसायिक ‘होमस्टे’ के रूप में उपयोग करने के संकेत मिले।
मामला एक आरटीआई आवेदन के जरिए उजागर हुआ, जिसके बाद तत्कालीन कलेक्टर संजय मोदी ने विस्तृत जांच के आदेश दिए। जांच रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की गई। रविवार को कड़ी सुरक्षा के बीच पांच बंगले ध्वस्त कर दिए गए।
प्रशासन ने बताया कि कुछ प्लॉट पहले ही नियमों के उल्लंघन के कारण वापस लिए जा चुके थे, जबकि दो अधिकारियों—डीआरडीए निदेशक एल.एस. डिंडोर और जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी बी.डी. बारिया—ने कार्रवाई के खिलाफ अदालत का रुख किया है, जिसके चलते उनके निर्माण को फिलहाल नहीं गिराया गया।
इस कार्रवाई पर भरूच से भाजपा सांसद मनसुख वसावा ने कहा कि कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो कार्रवाई उचित है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी कार्रवाई में भेदभाव नहीं होना चाहिए और अन्य संदिग्ध निर्माणों की भी जांच की जानी चाहिए। प्रशासन की इस कार्रवाई ने पर्यटन क्षेत्र के पास हो रहे अवैध व्यावसायिक निर्माण और सरकारी नियमों के उल्लंघन पर सख्त संदेश दिया है।




