दिल्ली पुलिस में बड़ा बदलाव: अब डीसीपी को मिला इंस्पेक्टर की पोस्टिंग का अधिकार

दिल्ली पुलिस में बड़ा बदलाव करते हुए डीसीपी को अपनी टीम चुनने का अधिकार दिया गया है। अब वे इंस्पेक्टर से सिपाही तक की तैनाती खुद कर सकेंगे, जिससे कानून व्यवस्था सुधारने और जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलेगी।

दिल्ली ब्यूरो। पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा ने जिलों के डीसीपी को अपनी टीम खुद चुनने की आजादी दी है। इसके तहत वो अब इंस्पेक्टर लेवल से लेकर सिपाही तक की तैनाती जिले की किसी भी यूनिट में कर सकते हैं। इससे पहले जिलों के डीसीपी सिर्फ कॉन्स्टेबल से लेकर एसआई तक को इधर से उधर कर सकते थे। पुलिस अफसरों का कहना है कि इसके पीछे मकसद है कि जिले की कप्तानी करते हुए डीसीपी को खुलकर काम करने का मौका दिया जाए, ताकि वो कानून-व्यवस्था और ऑर्गेनाइज्ड क्राइम समेत अन्य मामलों को बेहतर तरीके से डील करने के लिए अपने भरोसेमंद स्टाफ को नियुक्त कर सकें।
इससे पहले पूर्व कमिश्नर राकेश अस्थाना के फरवरी 2022 में जारी किए स्टैंडिंग ऑर्डर के मुताबिक, जिलों का डीसीपी की अगुआई वाला पीईबी सिर्फ कॉन्स्टेबल से लेकर एसआई तक को इधर से उधर कर सकता था। पुलिस स्टेशन के एसएचओ, इंस्पेक्टर इन्वेस्टिगेशन और लॉ एंड ऑर्डर के अलावा जिलों तैनात अन्य इंस्पेक्टरों और सब इंस्पेक्टरों को जिला लेवल की यूनिट्स में ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए एक अलग से पीईबी बनती थी, जिसके चेयरमैन जोन के स्पेशल कमिश्नर होते थे। रेंज के जॉइंट या एडिशनल सीपी, जिलों के तीनों डीसीपी इसके मेंबर होते थे। ऐसे में जिला लेवल पर तैनात इंस्पेक्टर को हटाना या लगाना डीसीपी के हाथ में नहीं था।
पुलिस के आला अफसर कहते हैं कि डीसीपी को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है। अगर उसे डिस्ट्रिक्ट की कमान सौंपी गई है तो फिर काम करने का पूरा मौका और छूट देना जरूरी है, ताकि उसकी जवाबदेही और जिम्मेदारी भी फिक्स हो। इसे स्टैंडिंग ऑर्डर के तहत जिलों के स्पेशल स्टाफ, स्पेशल टास्क फोर्स, एटी ऑटो थेफ्ट स्क्वॉड, एंटी नारकोटिक्स सेल जैसे ऑपरेशंस यूनिट्स, डिस्ट्रिक्ट इन्वेस्टिगेशन यूनिट, महिला सेल और पब्लिक ग्रीवांस सेल में डीसीपी अपने परखे हुए अफसरों को नियुक्त कर सकेंगे। इससे पहले ज्यादातर इंस्पेक्टर जिले के कप्तान को नजरअंदाज तक कर जाते थे, क्योंकि पता था कि उनको हटाना-लगाना डीसीपी के हाथ में नहीं है।

इंस्पेक्टर तक की तैनाती का अधिकार

  • पुलिस कमिश्नर ने बाकायदा इसके लिए एक स्टैंडिंग ऑर्डर भी जारी किया है, जिसमें जिले के डीसीपी, डीसीपी-1 और डीसीपी-2 की जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
  • साफ किया गया है कि डिस्ट्रिक्ट का ओवरऑल इंचार्ज डीसीपी होगा, जिसे रोजाना के कामकाज में दोनों एडिशनल डीसीपी सहयोग करेंगे।
  • इसी ऑर्डर में कहा गया है कि पक्षपात रहित और पारदर्शी ट्रांसफर-पोस्टिंग की पॉलिसी के लिए जिला लेवल पर बनने वाली पुलिस एस्टेब्लिशमेंट बोर्ड का चेयरमैन डीसीपी होगा, जिसके बाकी दो मेंबर एडिशनल डीसीपी होंगे।
  • इस बोर्ड को सिपाही से लेकर इंस्पेक्टर तक को जिले में कहीं भी तैनात करने की पावर होगी।

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