हेड कांस्टेबल रतनलाल की हत्या साजिशकर्ता 3 साल बाद गिरफ्तार

नई दिल्ली। 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान दिल्ली पुलिस के हवलदार रतन लाल की हत्या में शामिल मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक मोहम्मद अयाज को स्पेशल सेल ने गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद वह दिल्ली छोड़कर मणिपुर आदि कई राज्यों में छिपता रहा।उसकी गिरफ्तारी पर दिल्ली पुलिस ने एक लाख रुपये का इनाम रखा था। कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित कर रखा था। विशेष आयुक्त स्पेशल सेल हर गोविंद सिंह धालीवाल के मुताबिक डीसीपी राजीव रंजन सिंह, एसीपी ललित मोहन नेगी, हृदय भूषण, इंस्पेक्टर प्रमोद चौहान, शिवराज रावत व आलोक कुमार की टीम लंबे समय से मोहम्मद अयाज की तलाश कर रही थी।
17 जून को बेंगलुरु से हुआ गिरफ्तार
वह चांद बाग, करावल नगर का रहने वाला है। 17 जून को उसे बेंगलुरु के चिक्काबल्लापुर स्थित एक गांव से गिरफ्तार किया गया। रतन लाल की हत्या के दौरान गोकुलपुरी के तत्कालीन एसीपी अनुज कुमार, शाहदरा के तत्कालीन डीसीपी अमित शर्मा समेत कई पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आईं थीं। जनवरी 2020 में मोहम्मद अयाज ने अपने भाई खालिद और अन्य लोगों के साथ शाहीन बाग प्रदर्शन की तर्ज पर चांद बाग में सीएए व एनआरसी के विरोध में धरना प्रदर्शन शुरू किया था।
23 फरवरी को अयाज के घर पर हुई थी गुप्त बैठक
23 फरवरी को उनके घर में एक गुप्त बैठक हुई थी जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया था कि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यात्रा को देखते हुए सड़क को अवरूद्ध करने के लिए लाठियां, लोहे की छड़ें आदि लाई जाए ताकि दंगा करने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक से अधिक ध्यान आकर्षित किया जा सके। इसके बाद उसी दिन पूर्व नियोजित षड्यंत्र के तहत दंगाइयों ने जाफराबाद मेट्रो स्टेशन की ओर जाने वाली सड़क को जाम कर दिया था। इसके परिणामस्वरूप उत्तर-पूर्वी और शाहदरा जिलों के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग समूहों ने दंगे शुरू कर दिए थे।
दंगों में मारे गए 50 से ज्यादा लोग
यह सिलसिला 26 फरवरी तक जारी रहा था। दंगों में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। सैकड़ों लोग घायल हुए थे। दंगों में सरकारी और निजी संपत्तियों का भारी नुकसान हुआ था। इस संबंध में शाहदरा और उत्तर-पूर्वी जिलों के विभिन्न थानों में 750 से अधिक मामले दर्ज किए गए थे। दंगों के दौरान 24 फरवरी 2020 की सुबह चांद बाग विरोधस्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई थी। भीड़ ने मुख्य वजीराबाद रोड को अवरुद्ध करने का प्रयास किया था।
जब पुलिस ने रोका तो शुरू किया पथराव
पुलिस टीम ने जब उन्हें रोकने का प्रयास किया तब अयाज, उसके भाई खालिद व अन्य दंगाइयों ने पथराव शुरू कर दिया था और पुलिस पार्टी पर हमला कर दिया था, जिससे हवलदार रतन लाल की मौत हो गई थी। साथ ही कई अन्य पुलिस अधिकारियों व कर्मियों को गंभीर चोटें आईं थी। इस संबंध में दयालपुर में मामला दर्ज किया गया था, जिसकी जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा द्वारा किया जा रहा है। स्पेशल सेल की टीमें उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों के मामलों में वांछित और इनामी अपराधियों को पकड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। जांच से पता चला था कि अयाज और उसका भाई खालिद बार-बार ठिकाने बदल रहे थे।
मणिपुर में भी छिपे थे आरोपित
लगातार कोशिशों के बाद यह बात सामने आई कि दोनों गिरफ्तारी से बचने के लिए मणिपुर के ग्रामीण इलाकों में चले गए हैं। इसके बाद मणिपुर में उनके मूवमेंट को ट्रैक करने की कोशिश की गई। वहां पता चला कि अयाज जून के पहले सप्ताह में बेंगलुरु गया है। वह बेंगलुरु से करीब 100 किलोमीटर दूर ढिबुराहल्ली के ग्रामीण इलाके में एक उपयुक्त ठिकाने की तलाश में था। स्पेशल सेल की टीम ने वहां से उसे दबोच लिया। अयाज कंस्ट्रक्शन और प्रॉपर्टी डीलिंग के कारोबार में था।



