गाजियाबाद में खुला देश का पहला एआई अल्ट्रासाउंड केंद्र, गर्भवती महिलाओं को मिलेगा लाभ

गाजियाबाद। देश का पहला एआई आधारित अल्ट्रासाउंड केंद्र बुधवार को जिला महिला अस्पताल में शुरू कर दिया गया। गर्भवती महिलाओं के प्रसव के समय आवश्यक भारत वर्ष के प्रथम जिला स्तरीय पायलट प्रोजेक्ट टू रिड्यूस वाया स्पेशलाइज्ड अल्ट्रासाउंड स्वीपस तकनीक (ऑटोमेटेड इंटरप्रिटेशन) के अल्ट्रासाउंड जांच सेंटर का उद्घाटन सीडीओ अभिनव गोपाल (आइएएस) द्वारा किया गया। इस मौके पर सीएमओ डा. अखिलेश मोहन ने सीडीओ को बताया कि एडवांस्ड डायग्नोस्टिक सेंटर के डॉ. कृष्ण गोपाल रेडियोलाजिस्ट व विप्रो जीई हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से यह पायलट प्रोजेक्ट प्रारंभ किया गया है। इस पहल एवं प्रयास से मातृत्व मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में बहुत अधिक मदद मिलेगी। ऐसे चिकित्सालय जहां पर रेडियोलाजिस्ट कि पूर्ण उपलब्धता नहीं है, वहां पर भी इस तकनीक कि मदद से चिकित्सा सेवायें प्रदान किया जाना संभव हो सकेगा।
सीडीओ ने चिकित्सालय का निरीक्षण करते हुए निर्माणाधीन दोनों माड्यूलर ओटी में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा भी की। इस मौके पर सीएमएस डा. अभिषेक त्रिपाठी , डा. आरके गुप्ता , डा. अनुराग संजोग, डा. विवेक लोधी रेडियोलाजिस्ट, डा. सुषमा भारती , चीफ फार्मासिस्ट कृष्णधार दुबे, दिनेश चंद्र , अमरीश रानी ,मेट्रन आरती शर्मा और फार्मासिस्ट प्रवीण त्यागी मौजूद रहे।
इस केंद्र के माध्यम से प्रसव को आने वाली गर्भवती महिलाओं में प्रसव के दौरान संबंधित जटिलताओं की पहचान तथा उपयुक्त चिकित्सकीय निर्णय (सामान्य प्रसव, सिजेरियन,रेफर) लेने के लिए निश्शुल्क एआई (आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस)आधारित हब एंड स्पोक केंद्र के रूप में रेडियोलाजी सेवाएं उपलब्ध कराई जायेंगी।
खासकर गर्भ में पल रहे बच्चे की सहीं स्थिति का पता लगाने को अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जायेगा। एआई आधारित अल्ट्रासाउंड में कई छवियों को अलग-अलग कोणों से लिया जा सकता। उन्हें जोड़कर एक त्रि-आयामी छवि बनाई जाती है। यह छवि आमतौर पर तस्वीरों में दिखाई देने वाली छवि जैसी ही लगती है। इसमें बच्चे की हलचल दिखाई देगी। उसे लात मारते हुए या आंखें खोलते और बंद करते हुए देख सकते हैं। सामान्य अल्ट्रासाउंड में सामान्य और सिजेरियन का निर्णय संभव नहीं है। इसका निर्णय लेबर रूम में ही किया जाता है, लेकिन एआई अल्ट्रासाउंड जांच में यह पता चल जाएगा कि जच्चा बच्चा की सुरक्षा को ध्यान में रखकर सामान्य प्रसव होगा या सिजेरियन।इस केंद्र को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चालू किया गया है। सफल होने पर पूरे प्रदेश में केंद्र खोलने की योजना है।




