औरंगाबाद में ‘खाकी’ हुई शर्मसार: ढिबरा थानाध्यक्ष का गाली-गलौज वाला ऑडियो आया सामने

ऑडियो के सामने आने के बाद पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल

औरंगाबाद/बिहार। औरंगाबाद जिले में पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। ढिबरा थाना के थानाध्यक्ष रितेश उपाध्याय का एक कथित ऑडियो चर्चा का विषय बना हुआ है। ऑडियो को लेकर पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। इस ऑडियो में एक दंपत्ति के साथ अभद्र भाषा में बात करने और उन्हें धमकाने के आरोप लगाए जा रहे हैं, जिससे ‘पुलिस आपकी दोस्त’ वाले दावे पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ऑडियो में ऐसी गालियां हैं कि हम आपको वो न तो सुना सकते हैं और न ही लिख सकते हैं। ऑडियो के मुताबिक, एक पीड़ित दंपत्ति अपनी समस्या लेकर थाने पहुंचा था। लेकिन उनकी शिकायत सुनने के बजाय थानाध्यक्ष रितेश उपाध्याय ने बेहद सख्त और अपमानजनक रवैया अपना लिया। आरोप है कि बातचीत के दौरान थानाध्यक्ष रितेश उपाध्याय ने गाली-गलौज की और यहां तक कि मारपीट की धमकी भी दी। दंपत्ति बार-बार अपनी बात रखने की कोशिश करता रहा, लेकिन उन्हें डांट-फटकार और अपमान का सामना करना पड़ा।
इस घटना के सामने आने के बाद आम लोगों में नाराजगी साफ देखी जा रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर थाने में ही फरियादियों के साथ ऐसा व्यवहार होगा, तो न्याय की उम्मीद कहां से की जाए? खासकर तब, जब जिला स्तर पर लगातार ‘फ्रेंडली पुलिसिंग’ को बढ़ावा देने की बात कही जाती रही है। पुलिस अधीक्षक अम्बरीश राहुल ने कई बार यह निर्देश दिया गया है कि जनता के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए। उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाए। लेकिन इस ऑडियो ने इन निर्देशों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि अगर अधिकारी ही नियमों का पालन नहीं करेंगे, तो सिस्टम में सुधार कैसे होगा?
मामला सामने आने के बाद औरंगाबाद जिले के एसपी अम्बरीष राहुल ने सफाई देते हुए कहा है कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है। जांच की जिम्मेदारी मदनपुर एसडीपीओ चंदन कुमार को सौंपी गई है। अधिकारियों का कहना है कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित थानाध्यक्ष के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी विवादों में रहे हैं थानाध्यक्ष रितेश उपाध्याय
गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है जब थानाध्यक्ष रितेश उपाध्याय विवादों में आए हैं। इससे पहले भी उन पर गंभीर आरोप लग चुके हैं। ढिबरा थाना में ही कार्यरत एक महिला कांस्टेबल ने उन पर दुर्व्यवहार और अनुचित दबाव बनाने जैसे आरोप लगाए थे। हालांकि उस मामले में क्या कार्रवाई हुई, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। अब इस नए ऑडियो के सामने आने के बाद फिर पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
फिलहाल, पूरे जिले की नजर इस जांच पर टिकी है। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला न सिर्फ एक अधिकारी की छवि, बल्कि पूरे पुलिस सिस्टम की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है। वहीं, अगर कार्रवाई नहीं होती है, तो ‘फ्रेंडली पुलिसिंग’ सिर्फ एक नारा बनकर रह जाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button