मालेगांव ब्लास्ट में बरी हुए कर्नल पुरोहित के सेना से रिटायरमेंट पर रोक, आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल का बड़ा फैसला

महाराष्ट्र डेस्क। महाराष्ट्र के चर्चित 2008 मालेगांव ब्लास्ट केस पहले फंसे और फिर बरी हुए कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित को बड़ी गुड न्यूज मिली है। आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (एएफटी) ने कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित के रिटायरमेंट पर रोक लगा दी है। ट्रिब्यूनल ने पहले लिए गए फैसले को निरस्त कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि पिछले साल मालेगांव ब्लास्ट पर आए मुंबई की स्पेशल कोर्ट के फैसले को देखकर लगता है कि कर्नल पुरोहित सही हैं। कर्नल पुरोहित ने मांग की थी कि अपने जूनियर के बराबर प्रमोशन और दूसरे सभी सर्विस बेनिफिट्स दिए जाने पर विचार किया जाना चाहिए। कर्नल पुरोहित का कहना था कि उन्हें इस मामले में गैर-कानूनी और मनगढ़ंत तरीके से फंसाए जाने की वजह से नहीं दिए गए थे।
अब ट्रिब्यूनल ने कहा है कि रिकॉर्ड में मौजूद चीजों, खासकर एनआईए कोर्ट, मुंबई के स्पेशल जज के 31.07.2025 के फैसले को देखने के बाद, पहली नजर में हमें लगता है कि एक ऐसा मामला बनता है जहां कर्नल पुरोहित का यह कहना सही हो सकता है कि उन्हें अपने जूनियर के बराबर प्रमोशन और दूसरे सभी सर्विस बेनिफिट्स दिए जाने पर विचार किया जाना चाहिए, जो उन्हें इस मामले में गैर-कानूनी और मनगढ़ंत तरीके से फंसाए जाने की वजह से नहीं दिए गए थे, जिसे क्रिमिनल कोर्ट ने उन्हें बरी करते हुए साबित किया है। ऊपर बताई गई बातों को ध्यान में रखते हुए हम निर्देश देते हैं कि कानूनी शिकायत पर फैसला होने तक, एप्लीकेंट का रिटायरमेंट रोक दिया जाए।
2008 मालेगांव विस्फोट के बाद कर्नल पुरोहित को अरेस्ट किया गया था। उन पर तब अभिनव भारत नाम संगठन बनाने और विस्फोटकों की व्यवस्था का आरोप लगा था। कर्नल पुरोहित को आगे 9 साल जेल में बिताने पड़े थे। इसके बाद उन्हें 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी थी। 31 जुलाई, 2005 को वह मुंबई की विशेष एनआईए कोर्ट से बरी हुए थे।एनआईए कोर्ट से बरी होने के बाद, भारतीय सेना ने उन्हें कर्नल (फुल कर्नल) के पद पर पदोन्नत किया। यह पदोन्नति सितंबर 2025 में दी गई, जिससे उनका 17 साल का लंबा इंतजार समाप्त हुआ।

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