जम्मू-कश्मीर स्वास्थ्य विभाग के नॉन गजेटेड कर्मचारियों की चेतावनी

12 मार्च को हड़ताल पर रहेंगे

जम्मू/एजेंसी। जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की ज्वाइंट एक्शन कमेटी नेे चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने ढाई दिन वेतन बंद करने का आदेश वापस नहीं लिया तो 12 मार्च को प्रदेश के सभी अस्पतालों में नॉन गजेटेड कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे। यह हड़ताल अनिश्चितकालीन भी हो सकती है।उन्होंने ढाई दिन के वेतन के बराबर मिलने वाले मासिक भत्ते को तुरंत बहाल करने की मांग की है। वीरवार को प्रेस क्लब जम्मू में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में जम्मू-कश्मीर मेडिकल इंप्लाइज फेडरेशन के अध्यक्ष जसविंदर सिंह ने कहा कि 20 जनवरी 2026 को जारी आदेश के जरिए नॉन गजेटेड कर्मचारियों को मिलने वाला ढाई दिन के वेतन के बराबर मासिक भत्ता बंद कर दिया गया है, जो कर्मचारियों के साथ अन्याय है।
उन्होंने कहा कि यह फैसला एसआरओ-274 एचएमई (1991) और 7 मार्च 1991 के संशोधन का स्पष्ट उल्लंघन है। इन नियमों के तहत स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के नॉन गजेटेड कर्मचारियों को रविवार, राजपत्रित छुट्टियों और रोस्टर ड्यूटी करने के बदले विशेष भत्ता दिया जाता है। उन्होंने कहा कि ये कर्मचारी अस्पतालों में 24 घंटे सेवाएं देकर मरीजों की देखभाल सुनिश्चित करते हैं।
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू, मुख्य सचिव अटल डुल्लू, वित्त आयुक्त और स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त/सचिव को ज्ञापन भी सौंपा जा चुका है, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
कर्मचारियों ने विरोध स्वरूप 10 दिनों तक काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया और 20 फरवरी 2026 को दो घंटे की हड़ताल भी की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भत्ता बहाल नहीं किया गया तो 12 मार्च 2026 को जम्मू-कश्मीर के सभी सरकारी अस्पतालों में एक दिन की हड़ताल की जाएगी। हालांकि मरीजों के हित में आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी। इस मौके पर ज्वाइंट एक्शन कमेटी और जीएमसी जम्मू व संबद्ध अस्पताल जम्मू के अध्यक्ष अरुण शर्मा ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में पहले से ही 40 प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं, जिससे कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ गया है। ऐसे में ढाई दिन के वेतन का भत्ता बंद होने से प्रशासनिक कामकाज और मरीजों की सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।
कमेटी के अन्य सदस्यों ने कहा कि नॉन गजेटेड कर्मचारी सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं, जो अस्पतालों में रविवार और राजपत्रित छुट्टियों सहित लगातार रोस्टर ड्यूटी निभाते हैं। ऐसे में उनके वैध वित्तीय लाभों को बंद करना कर्मचारियों के मनोबल को प्रभावित कर रहा है।
समिति ने 23 जुलाई 2019 को स्वास्थ्य निदेशक जम्मू द्वारा जारी पत्र का भी जिक्र किया, जिसमें रोस्टर ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को ढाई दिन के वेतन के भुगतान का समर्थन किया गया था। कमेटी ने उम्मीद जताई कि सरकार इस मामले पर जल्द ही सकारात्मक और सहानुभूतिपूर्ण निर्णय लेगी ताकि कर्मचारियों के हितों के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं का सुचारु संचालन भी सुनिश्चित हो सके।
पत्रकार वार्ता में परफुल्लत सिंह, बहादुर सिंह, चौधरी असलम, अजय फूल, भारत भूषण, हरपाल सिंह, नसीम, नीलम, राजेश, अनीता देवी, अनूप, अजय शान, यशपाल, राम लाल, सुरजीत कुमार और गारु राम सहित कई कर्मचारी प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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