मालदा में पंचर बनाता था तस्कर, एटीएस ने सारनाथ से किया गिरफ़्तार, महाकुंभ और बांग्लादेश कनेक्शन

The smuggler used to repair punctures in Malda, ATS arrested him from Sarnath, Maha Kumbh and Bangladesh connection

  • वाराणसी के सारनाथ से 1.97 लाख के जाली नोटों के साथ दो तस्कर गिरफ्तार
  • बिहार के वैशाली जिले के रहने वाले हैं तस्कर, मालदा से लेकर आए थे जाली नोट
  • बांग्लादेश से मंगाया जाता है जाली नोट, बड़े रैकेट के बारे में एटीएस को जानकारी

वाराणसी/उत्तर प्रदेश। वाराणसी से नकली नोटों के साथ स्मग्लर्स के खिलाफ एक्शन लिया है। दो आरोपियों को 500 रुपये के 1.97 लाख के नकली करेंसी के साथ गिरफ्तार किया गया। स्मग्लर्स की कोशिश महाकुंभ में इन जाली नोटों को खपाने की थी। इन पकड़े गए आरोपी बिहार के वैशाली के जिले के नारीकला निवासी मो. सुलेमान अंसारी (67) और फतेहाबाद (सदर) निवासी इदरीश हैं। मो. सुलेमान इनका सरगना बताया जा रहा है। एटीएस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे पश्चिम बंगाल के मालदा के रहने वाले जाकिर से जाली नोट लेते थे।एटीएस की पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि जाकिर जाली नोट बांग्लादेश से मंगाता है। इस प्रकार जाली नोट मामले में बांग्लादेश कनेक्शन सामने आया है। बांग्लादेश से जाली नोट मंगाकर जाकिर मालदा में ही सुलेमान और इदरीश को देता था। वे दोनों ट्रेन से वाराणसी और अन्य शहरों में जाली नोट ले जाकर सप्लाई करते थे। एटीएस की पूछताछ में बांग्लादेश के तस्कर को भी चिह्नित किया गया है। उसके जरिए सीमा पार से जाली नोट की खेप पहुंचती है। सारनाथ थाने पर दोनों आरोपियों से देर रात तक एटीएस के साथ ही पुलिस अधिकारी पूछताछ में जुटे थे।
सारनाथ में पकड़े गए दोनों तस्करों ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि वे ट्रेन से दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन पर उतरे थे। इसके बाद दोनों वाराणसी घूमने आ गए। यहां से उन्हें प्रयागराज जाना था। प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान उनकी साजिश नकली नोट की सप्लाई की थी। प्रयागराज में भी उनके लोगों के सक्रिय होने की बात सामने आई है। हालांकि, प्रयागराज पहुंचने से पहले ही दोनों एटीएस के हत्थे चढ़ गए।
फर्जी नोटों की सप्लाई से जुड़े दोनों आरोपियों ने पूछताछ में अहम खुलासा किया है। जाली नोटों के तस्करों ने एटीएस को बताया कि दोनों पश्चिम बंगाल के मालदा में रहकर टायर पंक्चर बनाते थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात जाकिर से हो गई। उसने बताया कि जाली नोट की तस्करी में तीन से चार गुना फायदा होता है। दोनों लालच में आकर उससे जुड़ गए। तस्करों ने कबूल किया है कि जाली नोटों के धंधे में दोगुना मुनाफा होता है।
तस्करों ने बताया है कि 50- 55 हजार रुपये में वे एक लाख जाली नोट खरीदते हैं। इसके बाद अलग-अलग शहरों में उन्हें खपाते हैं। हालांकि, उन्होंने नहीं बताया कि अब कितने जाली नोट देश में खपाए हैं। अधिकारियों ने बताया कि उनके पूछताछ की जा रही है। जल्द ही कई अन्य खुलासे भी संभव हैं।
जाली नोट तस्करी से जुड़ा सरगना मोहम्मद सुलेमान अंसारी पहले भी पुलिस के हत्थे चढ़ चुका है। जाली नोट के साथ बिहार पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। इस मामले में वह 6 महीने तक हाजीपुर जेल में बंद था। जमानत पर छूटने के बाद वह दोबारा जाली नोटों के धंधे में लग गया। बांग्लादेश से आए जाली नोट को वह मालदा से लाकर यूपी और अन्य राज्यों के अलग-अलग जिलों में सप्लाई करता है। इस धंधे में कई लोगों के शामिल होने की बात है।

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