कोरिया स्थित तामडाड जलाशय के नहर निर्माण कार्य में खुलेआम किया जा रहा है घटिया निर्माण कार्य

  • क्या करोड़ों रुपए लागत की नहर लाइनिंग निर्माण कार्य में आर एम सी प्लांट (रेडी कंक्रीट मिक्स प्लांट) का उपयोग नहीं किया जाना है या नहीं किया जा रहा है?
  • ठेकेदार को जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का खुला संरक्षण प्राप्त हो रहा है?
  • क्षेत्र में करोड़ों रुपए कि लागत से नहर लाइनिंग निर्माण कार्य घटिया गुणवत्ता विहीन किया जा रहा है बिना विभागीय इंजिनियर एवं अधिकारीयों के देखरेख के?
  • शिकायत की नहीं होती जांच ठेकेदार के द्वारा किया जा रहा है मनमाने तरीके से नहर का कार्य?

शोभित शर्मा,कोरिया/छत्तीसगढ़। जिले के तामडाड जलाशय को निर्मित हुए लगभग पंद्रह से बीस साल हो गए इसमें करोड़ों रुपए कि लागत से नहर लाइनिंग निर्माण कार्य कराया जा रहा है जो गुणवत्ता विहीन होने के कारण किसानों को उसका लाभ नहीं मिल पाएगा इस नहर लाइनिंग कार्य करोड़ों रुपए कि लागत से ठेकेदार के द्वारा नहर लाइनिंग का कार्य कराया जा रहा है जिसमें निर्माण कार्य के तकनीकी पहलुओं को पूर्ण से अमल नहीं किया जा रहा है और कार्य गुणवत्ता विहीन एवं घटिया किया जा रहा है। जबकि नहर लाइनिंग के निर्माण कार्य के बेसमेंट की ढलाई का कार्य विभागीय मापदंडों के आधार पर नहीं किया जा रहा है जबकि बेसमेंट की ढलाई 8 इंच की होनी चाहिए मगर ठेकेदार के द्वारा बेसमेंट की ढलाई महज़ 6 इंच कर नहर लाइनिंग का 65/ प्रतिशत निर्माण कार्य धड़ल्ले से पूर्ण कर दिया गया है।
तामडाड जलाशय से निकल रही नहर लाइनिंग का कार्य में ठेकेदार के द्वारा काफी घटिया और गुणवत्ता विहीन जिस सामाग्री के माप और मानक के आधार पर निर्माण कार्य किया जाना है वो नहीं किया जा रहा है। और निर्माण कार्य पर बाईब्रेटर का इस्तेमाल भी नहीं किया जा रहा है। इस संबंध में ठेकेदार के इंजिनियर से पूछा गया तो उन्होंने ने कहा की 6 इंच की ढलाई में बाईब्रेटर कैसे चलेगा इन इंजिनियर को सिर्फ इतना पता है कि सिर्फ निडिल वाईब्रेटर ही ढलाई में इस्तेमाल किया जा है क्या फ्लेट बाईब्रेटर का इस्तेमाल नहीं होता है ये इंजिनियर करोड़ों रुपए की नहर लाइनिंग का कार्य करा रहे हैं। इस निर्माण कार्य में उपयोग होने वाली सामग्री भी ब्रांडेड का उपयोग नहीं किया जा रहा है।
नहर लाइनिंग निर्माण कार्य में विभागीय अनुबंध के आधार और मापदंडों मानक के तहत कार्य नहीं किया जाना स्थल पर प्राप्त हो रहा है। और निर्माण कार्य में ओवर साइज़ कि गिट्टी का उपयोग 20 एम एम करना है मगर ठेकेदार के द्वारा 30 एम एम गिट्टी का उपयोग कर नहर लाइनिंग का कार्य लगभग 65/ प्रतिशत कर दिया गया है। ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों के मिली भगत से निर्माण स्थल पर निर्माण से संबंधित किसी प्रकार का कोई सूचना पटल या बोर्ड नहीं लगाया गया है जिससे निर्माण से संबंधित ग्रामीणों कोई जानकारी प्राप्त ना हो सके।
जलसंसाधन विभाग के निर्माण स्थल पर विभागीय अधिकारी उपस्थित रहकर निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार करा रहे हैं। अधिकारियों के संरक्षण मे नहर लाइनिंग निर्माण कार्य मे उपयोग की जा रही प्लास्टिक गुणवत्ता पर प्रश्न चिह्न लग रहा है जिस जीएसएम की प्लास्टिक को बिछाकर ढलाई किया जा रहा है वो पूर्णतः घटिया एवं गुणवत्ता विहीन है। नहर लाइनिंग निर्माण कार्य में नहर की दोनों साइड पर जो ढलाई का कार्य किया जा रहा है वो सिर्फ प्लास्टिक बिछाकर किया जा रहा है जबकि इन दोनों साइड को पहले पानी डालकर दबाया जाता है जिससे की ढलाई का कार्य मजबूरी से और टिकाऊ हो सके।
विभाग नहर लाइनिंग निर्माण के नियम को दरकिनार करते हुए निर्माण स्थल पर छोटी मिकशर मशीनों से करोड़ों के लागत की नहर लाइनिंग कार्य किया जा रहा है जबकि इस करोड़ों रुपए की लागत की नहर निर्माण कार्य आर एम सी प्लांट के द्वारा किया जाना चाहिए। जिससे गुणवत्ता और मापदंडों का एवं निर्माण सामाग्री का सही और पूर्ण मात्रा में मिश्रण हो सके और गुणवत्ता पूर्ण कार्य भी हो। विभागीय इंजिनियर कि उपस्थिति में ठेकेदार के द्वारा धड़ल्ले मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी में बताया गया कि कि नहर लाइनिंग निर्माण कार्य की सामग्री गुणवत्ता युक्त नहीं है। इस संबंध में जलसंसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता से जानकारी चाही तो उन्होंने ने कहा कि मैं एसडीओ और इंजिनियर को निर्माण की गुणवत्ता की जांच कर कार्य सही करने का निर्देश दिया है।

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