पटवारियों की हडताल वाली दबाव की राजनीति से जिले की जनता परेशान

- फार्मर रजिस्ट्री कार्य में प्रदेश में जिले की स्थिति दयनीय
- सीमांकन, बंटवारा, नक्शा तरमीम, ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र जैसे कार्य दो हफ्ते से ठप्प
- जिला प्रशासन पर बना रहे हैं अनावश्यक दबाव
सुमिता शर्मा,अनूपपु्र/मध्य प्रदेश। जिले मे पटवारियों की हडताल से आम जनता परेशान है। पिछले 12 फरवरी से पटवारियों की हडताल लगातार जारी है। शासन -प्रशासन की समझाईश, नोटिस, कार्यवाही का कोई असर पटवारियों पर नहीं दिख रहा है। स्थिति इतनी खराब है कि तहसीलों और एसडीएम कार्यालयों मे भूमि और राजस्व से जुडे कार्य बिल्कुल ठप्प है। भूमि, नक्शा तरमीम , सीमांकन, बंटवारा, फार्मर आईडी, ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र सहित अन्य कार्य नहीं होने से किसान, जमीन मालिक, हितग्राही, छात्र-छात्राएं परेशान हैं। कल पुराने तहसील परिसर मे अनाधिकृत तंबू लगाकर आन्दोलन कर रहे पटवारियों के विरुद्ध सख्त रुख अपनाते हुए एसडीएम कमलेश पुरी ने उन्हे वहाँ से हटा दिया था। इसके बावजूद पटवारी संघ अपनी मांगों को लेकर अडिग है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना फार्मर रजिस्ट्री बकटिंग का लक्ष्य प्रदेश मे निचले स्तर पर है। अनूपपु्र जिला निचले स्तर मे 13वें नम्बर पर है और केवल 26 प्रतिशत कार्य ही किया गया है। जबकि प्रमुख सचिव राजस्व म.प्र शासन के निर्देशानुसार फार्मर रजिस्ट्री करा कार्य (भूमिस्वामीवार) शीघ्र पूर्ण किये जाने के निर्देश हैं। फार्मर रजिस्ट्री नैचुरशन ( Bucket unclaimed) कार्य में प्रदेश स्तर पर अनूपपु्र जिले की प्रगति अति निम्न है। 30 जनवरी 2026 को आयोजित पटवारियो की बैठक में फार्मर रजिस्ट्री कार्य की समीक्षा किया जाकर कार्य पूर्ण करने हेतु निर्देश कलेक्टर हर्षल पंचोली ने दिये थे। वांछित प्रगति न होने की दशा में 03 फरवरी को पटवारियों का माह जनवरी का वेतन रोका दिया गया। जाहिर है कि लक्ष्यपरक कार्य समय पर पूर्ण ना होने से प्रदेश मे अनूपपु्र जिले की किरकिरी हो रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार कलेक्टर हर्षल पंचोली के आदेशानुसार तहसील स्तर पर पदस्थ पटवारी, जिन्होने अपने प्रभार के किसी भी एक ग्राम में 30 प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री बकटिंग का कार्य पूर्ण कर लिया हो, उन पटवारियों का वेतन आहरण की अनुमति प्रदान की गयी है। शेष ऐसे पटवारी जिन्होने अपने प्रभार के किसी भी ग्राम में 30 प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री बकटिंग कार्य पूर्ण नही किया है उनका वेतन आहरण प्रतिबंधित रहेगा। इससे साफ जाहिर है कि पटवारी अपने काम के प्रति गंभीर नहीं है, उन पर कलेक्टर के आदेश का कोई असर नहीं हो रहा है। इससे जिले भर मे यह संदेश जा रहा है कि पटवारी जिला प्रशासन को संगठन के दबाव मे काम करने के लिये मजबूर करना चाह रहे हैं। लोकतंत्र मे हडताल, धरना प्रदर्शन करने का सबको अधिकार है । लेकिन कलेक्टर सहित अपने अधिकारियों के आदेश/निर्देशों की अवहेलना करना, कार्य ना करना और हडताल के माध्यम से दबाव बनाना उचित नहीं कहा जा सकता।




