1700 करोड़ चुकाने के बाद भी झारखंड पर 13,376 करोड़ का बोझ, केंद्रीय बलों का बढ़ता बकाया

रांची/एजेंसी। झारखंड में माओवादी विरोधी अभियान, विधि-व्यवस्था आदि में लगाए गए केंद्रीय बलों का 13376 करोड़ रुपये बकाया है। यह बकाया तब है, जब हेमंत सोरेन की सरकार ने वर्ष 2022 में 1700 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया था। बकाया का यह आंकड़ा 31 दिसंबर 2024 तक का है। वर्तमान में 2025 का बकाया अभी जुटना शेष है। 2025 का बकाया जुट जाए तो संख्या और आगे बढ़ जाएगा। बकाया के आंकड़े पर नजर दौड़ाएं तो मूल राशि से दंडात्मक ब्याज अधिक लगाया गया है। इस 13376 करोड़ रुपये के बकाया में मूल राशि 5853 करोड़ ही है। वहीं, ब्याज की राशि 7522 करोड़ रुपये है। बकाया भी देखें तो सर्वाधिक बकाया केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का है जो 12415 करोड़ रुपये है। वहीं, दूसरे स्थान पर सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) है, जिसका कुल बकाया 940 करोड़ रुपये है। तीसरे स्थान पर बीएसएफ है, जिसका बकाया 20 करोड़ रुपये है। वर्ष 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने केंद्र से बकाया राशि की माफी के लिए आग्रह किए थे। हालांकि, केंद्र ने उनके आग्रह को मानने से इंकार कर दिया था। अब हेमंत सोरेन भी केंद्र के साथ होने वाली बैठकों में लगातार इस बात को उठाते रहे हैं और बकाया माफी के लिए आग्रह कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूर्व में गृह मंत्री अमित शाह की बैठक में भी इस बात को उठाया था और कहा था कि माओवादी समस्या केवल राज्य की नहीं, बल्कि केंद्र की भी है। इसलिए माओवादी विरोधी अभियान में लगे केंद्रीय बल का खर्च केंद्र को वहन करना चाहिए।
मुख्य सचिव अविनाश कुमार की अध्यक्षता में सात जनवरी को केंद्रीय बलों के बकाया मामले में बैठक हुई थी। इस बैठक में गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की प्रधान सचिव वंदना दादेल, डीजीपी तदाशा मिश्रा व आइजी सीआरपीएफ साकेत कुमार सिंह उपस्थित थे।
बैठक में यह विमर्श किया गया था कि माओवादी समस्या राष्ट्र स्तरीय इंटरनल सिक्यूरिटी समस्या है। यह केंद्र व राज्य दोनों से संबंधित है। झारखंड राज्य माओवादी विरोधी अभियान के लिए किए गए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की तैनाती से संबंधित शुल्क को सहकारी संघवाद के सिद्धांत के तहत पूर्ण रूप से माफ किया जाना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि विधि व्यवस्था ड्यूटी, माओवादी विरोधी अभियान व अन्य विविध कार्यों के लिए केंद्र सरकार के माध्यम से किए गए सेंट्रल आर्म्स पुलिस फोर्स (सीएपीएफ) की तैनाती से संबंधित बिल को अलग-अलग करके उसपर लगने वाले शुल्क एवं दंडात्मक ब्याज की गणना की जाय। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि डीजीपी व आइजी सीआरपीएफ की संयुक्त टीम मिलकर केंद्र सरकार से प्राप्त बिल की गणना कर मिलान करें।

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