शास्त्री पार्क में प्रॉपर्टी डीलर के सिर में दो और पेट में तीन गोली मारकर हत्या

दोस्त ने रेहड़ी पर लिटाकर पहुंचाया अस्पताल

उत्तर पूर्वी दिल्ली। गणतंत्र दिवस पर पुलिस की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने के दावे किए जा रहे हैं। उत्तर पूर्वी जिले में बदमाश पुलिस के दावों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। शास्त्री पार्क इलाका शनिवार रात को गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। बेटी के लिए दुकान से खाने के लिए चीज लेने के गए प्राॅपर्टी डीलर पिता पर बीच गली में बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर हत्या कर दी। चार अज्ञात बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया। आरोप है कि दस मिनट मृतक का दोस्त स्थानीय लोगों से वाहन देने के लिए गुहार लगाता रहा, लेकिन लोग मदद करने से पीछे हट गए। इसके बाद घायल को उसका दोस्त रेहड़ी पर लिटाकर जग प्रवेश चंद्र अस्पताल लेकर गया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसकी पहचान समीर उर्फ कामो पहलवान के रूप में हुई है। आशंका है कि रंजिश में वारदात को अंजाम दिया गया है। शास्त्री पार्क थाना पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया है। उत्तर पूर्वी जिले में 24 घंटे के अंदर दो अलग-अलग जगह दो हत्याएं करके बदमाशों ने यह दिखा दिया कि वह जिले में कितने बेखाैफ हैं।
समीर अपने परिवार के साथ बुलंद मस्जिद क्षेत्र में रहते थे। परिवार में पत्नी व दो बेटियां और पांच भाई हैं। छह माह पहले ही समीर के पिता की मौत हुई थी। समीर पहलवानी करने के साथ ही पेशे से प्राॅपर्टी डीलर थे। मृतक के भाई नदीम ने बताया कि शनिवार रात करीब दस बजे वह अपने भाई से मिले थे। समीर की बड़ी बेटी को बुखार हो रहा था। समीर ने घर के पास के एक डाॅक्टर से उसकी दवाई दिलवाई। घर जाने के बाद बेटी चीज खाने की जिद करने लगी। समीर चीज लेने के लिए दुकान पर चले गए। बिहारी चौक पर चार अज्ञात बदमाशों ने उन्हें अकेले घेर लिया और बहुत करीब से सिर में दो व कमर और पेट पर तीन गोलियां मार दीं। वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश दिल्ली सहारनपुर सहारनपुर हाइवे की तरफ पैदल भाग गए। उनके चेहरे ढके हुए नहीं थे।
मृतक के दोस्त अजरूद्दीन का आरोप है कि वह शनिवार रात साढ़े दस बजे अपनी दुकान बंद करके पैदल घर जा रहे थे। जब वह बिहारी चौक पर पहुंचे तो देखा उनका दोस्त समीर खून से लथपथ हालत में गली में पड़ा हुआ है। उनके पास कोई वाहन नहीं था।
वह आसपास के लोगों से हाथ जोड़कर मदद की गुहार लगाने लगे कि कोई वाहन दे देते वह घायल को अस्पताल ले जाएं। इतने में वहां पर अजरूद्दीन का छोटा भाई भी आ गया। आरोप है कि दस मिनट तक वह दोनों लोगों से वाहन मांगते रहे किसी ने नहीं दिया। रेहड़ी वाले ने मानवता दिखाते हुए उन्हें अपनी रेहड़ी दी। दोनों भाइयों ने समीर को रेहड़ी पर लैटाया और अस्पताल लेकर गए।

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