महाराष्ट्र के रायगढ़ में भारी ट्रैफिक के कारण पुल ढहा, मॉनसून से ठीक पहले आदिवासी बस्तियों का टूटा संपर्क
रायगढ़ जिले के सुधागढ़ तालुका में अमनोली गांव की ओर जाने वाले एक महत्वपूर्ण पैदल पुल के अचानक ढह जाने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। शुरुआती रिपोर्टों से पता चलता है कि पुल पर उसकी क्षमता से अधिक भार ले जाने वाले भारी वाहनों की आवाजाही के कारण यह हादसा हुआ।

रायगढ़/महाराष्ट्र। रायगढ़ जिले में सुधागढ़ तालुका के अमानोली गांव की ओर जाने वाला एक जरूरी यात्री पुल अचानक गिर गया। इससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई है। बताया गया है कि यह पुल भारी वाहनों खास तौर पर उन वाहनों के कारण गिरा, जो कि पुल की वजन उठाने की क्षमता से ज्यादा माल ढो रहे थे। गांव वाले इस घटना पर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। गनीमत यह रही कि इस दुर्घटना में किसी की जान नहीं गई। हालांकि, कई गांवों का संपर्क टूट जाने से लोगों कों को अब एक बड़े संकट का सामना करना पड़ रहा है।
इस पुल को जंभुलपाड़ा रास्ते से अमानोली, दहीगांव, कोलतारे और आस-पास की आदिवासी बस्तियों तक पहुंचने के लिए एक बेहद अहम कड़ी माना जाता था। संकरा होने और वजन उठाने की सीमित क्षमता होने के बावजूद, यह पुल स्थानीय निवासियों के रोजाना के आवागमन का एकमात्र जरिया था। हालांकि गांव वालों ने आरोप लगाया है कि कुछ उद्योगपति और कारोबारी लगातार इस पुल का इस्तेमाल डंपर और हाइवा जैसे भारी वाहनों को लाने-ले जाने के लिए कर रहे थे।
खबर है कि स्थानीय लोगों ने इस मुद्दे को लेकर कई बार प्रशासन से शिकायतें की थीं। फिर भी भारी वाहनों की आवाजाही बिना किसी रोक-टोक के जारी रही और आखिरकार पुल इतना ज्यादा वजन न सह पाने के कारण ढह गया। नाराज गांव वाले कह रहे हैं कि अगर प्रशासन ने समय पर कार्रवाई की होती, तो हमें इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
मॉनसून का मौसम बस आने ही वाला है। ऐसे में पुल के ढह जाने से अब स्थानीय लोगों के लिए एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इसका सीधा असर रोजाना के आवागमन, बाजारों तक पहुंच, स्वास्थ्य सेवाओं और स्कूली छात्रों की आवाजाही पर पड़ेगा। इसके अलावा कुछ ही दिनों में स्कूल और कॉलेज फिर से खुलने वाले हैं। ऐसे में छात्रों की शिक्षा का मुद्दा भी सामने आ गया है।
इस बीच घटना की जानकारी मिलते ही हेमलता शेरेकर स्थिति का जायजा लेने के लिए घटनास्थल पर पहुंचीं। इस मौके पर पुलिस सब-इंस्पेक्टर अंकुश सांगले, पुलिस कांस्टेबल कल्पेश कांबले, गणेश भोईर, मिलिंद कांबले और अन्य पुलिसकर्मी मौजूद थे। इस घटना के बाद पुल की सुरक्षा और भारी वाहनों के नियमन को लेकर प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोगों ने तत्काल वैकल्पिक व्यवस्थाएं करने के साथ-साथ एक नए और मज़बूत पुल के निर्माण की भी मांग की है।




